‘CHINKI’: Might land you behind the bars for 5 years
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अभी हाल ही में कुछ दिनों पहले भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इटली के मरीन को जब सरकार की तरफ से वोट देने के लिये वहाँ जाने की इजाज़त दी थी तभी से ये बात तो सिद्ध हो गयी थी की हमारी सरकार की विदेश नीतियाँ कितनी परिपक्व हैं उसके बाद जब चीन के भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की खबरे आयीं तो हमारे विदेश मंत्री ने बड़ी ही विनम्रता से चीन दौरे पे जाकर इस मुद्दे पे बात करने का मन बना लिया | इस सब के बाद जब सरबजीत का बेहद संजीदा मुद्दा सामने आया तो फिर से हमारी सरकार की कोशिशें बेअसर दिखायीं दीं |
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आप क्या सोचते है आप जाने लेकिन मैंने पिछली दफ़ा कई बार दिल्ली पुलिस से लाठियां खाते,आँसू गेस के गोले खाते युवाओं की आँखो में आँसू देखें या नारे लगाने वक़्त ज़रूरत कम होने पर उनको एक कोने पर पैंट या कमीज़ उपर कर चोंट पर फूंक मारते देखा हैं|इसी दौरान पुलिस भी कई दफ़ा अजीब किस्म की मानसिक प्रताड़ना से गुज़रती है जब आते-जाते बच्चे उन्हें गालियां दे कर गुज़रते या उन्हीं के नाम से हाय-हाय के नारे लगाते|कई पुलिस अफसर तो अनेक मौकों पर कहते कि "बेटा हम तुम्हारे साथ हैं बस ड्यूटी की मजबूरी समझो,कई बताते कि आंदोलन में मेरी भी बच्ची या बच्चा शिरकत करने आए हैं हमें खुशी है कि आप युवा देश के लिए अपने स्वयं के लिए इतना सोचने लगे हो"|हालांकि उस दौरान भी पुलिस पर जमकर आक्रोश निकाला था मैंने भी कुछ चीज़ो को देख मसलन लड़कियो को ही पीटना लाठियों से या धोखे में रखकर आंदोलन कुचलने का प्रयास करना|फिर भी भीतर ही भीतर जानता था कि 1861 के पुलिस अधिनियम पर आधारित ये पुलिस दरअसल आज के भारत के अनुरूप कार्य करे भी तो कैसे जब औपनिवेश्क काल के शासकों के बाद सत्ता के शीर्ष पर विराजमान ताक़ते इन्हें जनता नहीं खुद का सेवक समझती और बनाए रखना चाहती हो|पुलिस सुधार को लेकर सर्वोच्च न्यायलय से लेकर न जाने कहां-कहा़ं और कितनी दफ़ा सरकारों को फटकार नहीं लगी फिर भी कोई ऐसे बदलाव को स्वीकार करे भी तो कैसे जिससे उनके खुद के आने वाले कल की राते कहां गुज़रेगी जैसे प्रश्न मुंह बाहें खड़े हो जाएं ?पुलिस की आलोचना उसके उन सभी निंदनीय क्रियाकलापों को लेकर अवश्य होनी चाहिए जिसकी वह हक़दार हैं|उदाहरणार्थ गांधीनगर में पांच वर्षिय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी में भी उसके परिवारजनों की माने तो वक़्त रहते कारवाई होती तो काफी कुछ होने से बचा जा सकता था,वो नहीं तो न सहीं चोरी पर सीनाजोरी अलग कि मामला रफादफा कीजिए क्योंकि आप गरीब हैं,कहां इन सब चक्करों में पड़ रहे हैं चलिए दो हज़ार रूपय काफी होंगे!ज्यादा नारे लगाती हो लो थप्पड़!लानत है ऐसी मानसिकता,ऐसी इंसानियत पर|
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We all are aware or the craziness of Indian people for gold. Record declines of 25% in yellow metal has raised the expectations of the
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ह्रितिक बॉलीवुड के उन कुछ चुनिन्दा कलाकारों में से है जो कम से कम मगर बेहतरीन कहानियों पर फिल्म करने में यकीं रखते है पर आने वाले समय में ह्रितिक के पास एक के बाद एक फिल्मो की कतार लगी हुई है ।
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