Tuesday, 22 July 2014

‘भेड़ियो’ के पौरुषत्व का ‘कीड़ा’-उठाना होगा इसको मिटाने का ‘बीड़ा’


कौन हूँ मैं”..... क्यूँ मौन” हूँ मैं....
मानो रची है समीप मेरे लाल रं-गोली
क्या खेली है मैंने खून-की-होली”
पूंछती हूँ खुद से क्यूँ “बोर्न” हूँ “मैं”
क्यूँ युगो-युगो से “मौन” हूँ मैं

चलो बताती हूँ अपना परिचय ...मैं हूँ अभागी” भारतीय नारी
लूटी जिसकी अस्मिता ....आज नहीं....कल नहीं.... हर युग मे बारी-बारी
कभी लूटी” मै निर्भया” बनके .... कभी बनके गीतिका
आरुषि” के जीवन मै ग्रहण” कुछ ऐसा लगा
निर्लज्ज” हो गयी मधुमिता

               ‘बेहोशी-के-चादर मे, बेहवास-बैसुध हो                  
                      क्यूँ खूनी-लथपथ मे बेखबर पड़ी हूँ मैं                           ना जाने जीवन के किस “मोड” पर खड़ी हूँ मैं

लज्जा-शर्म-मर्यादा नारी का गहना” सब कहने की बात
कलयुगी-दौर मे हो गई देखो हैवानियत की सारी हदें पार ....
वहसी-दरिंदे बेदर्दी से मुझे नौचते आज L L L
क्यूँ करते हो आप अपनी माँ’…’बहन’… जीवन-संगिनी बेटी पर नाज’?
दादा-नाना-बाप-पिता-ससुर-चाचा-मामा-भतीजा-भांजा रिश्तो को बदनाम कर करते घिनोना पाप  L L

नहीं सहूँगी मे अब ये असहनीय पीड़ा’…… मिटाना ही होगा इन भेड़ियो के पौरुषत्व का कीड़ा
उठ जा भारतीय नारी ...तू ही दुर्गा....तू ही काली .... तुझे ही बनना होगा अपने लज्जा के पुष्प का माली J

------ रोहित श्रीवास्तव ------ 

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Sunday, 13 July 2014

“वैदिक का ‘अनैतिक-मिलाप-क्या आप है इसके खिलाफ ?




बाबा रामदेव के प्रमुख सहयोगी एवं वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने हाल मे ही कुख्यात आतंकवादी जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद से पाकिस्तान की पावन-धरती पर मुलाक़ात की। ट्वीटर पर एक फोटो के माध्यम से उन्होने इस अजीबोगरीब-मिलनकी पुष्टि भी की। आपको बताना चाहूँगा वैदिक जी बतौर पत्रकार पाकिस्तान के दौरे पर थे जहां उन्होने नवाज़-शरीफ़ से लेकर पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओ से मुलाक़ात की।

अब बड़ा प्रश्न यह उठता है की क्या हाफिज़ सईद जैसे भस्मासुर से मिलना अति-आवश्यक था? हाफिज़ सईद ना तो पाकिस्तान का औपचारिक तौर पर कोई राजनेता है ना कोई बड़ी प्रसिद्ध-हस्ती’? फिर भी वैदिक जी ने ऐसे कुकर्मी जो की हजारो हत्याओ का जिम्मेदार है, उसके साथ मिलना उपयुक्त समझा। उनका तर्क है की “संवाद ही एक मात्र रास्ता है? वैदिक जी संवाद सरकार एवं उसके प्रतिनिधियों और राजनयिकों के साथ किया जाता है, ना की हाफ़िज़ सईद जैसे निर्मम “नर-भक्षक” के साथ??
आप कहते है आप पत्रकार के रूप मे पूर्ण रूप से स्वतंत्र है की आप किसी से भी मिले और वार्ता करे। वेद जी शायद आप आपने नाम की तरह “वैदिक” नहीं, आपके स्वभाव एवं ज्ञान मे “नैतिकता” एवं “मौलिकता” का अभाव लगता है। पता नहीं अगर आप जैसे कुछ “बुद्धिजीवी” ऐसे ही शांति-दूत” बन गए और आपकी राह पर चल पड़े तोह शायद समस्त-संसार मे शांति स्थापित हो जाएगी। क्यूकी आपको तोह यही लगता है की आपने तो कोई बहुत बड़ा कारनामा किया है।

इंडिया टीवी पर रजत शर्मा के साथ आपका साक्षात्कार देखा, आपके चेहरे के भाव बता रहे थे की आपने कितनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कितना शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है ना की एक तरफ जहां दुनिया के कई बड़े अमेरिका एवं ब्रिटेन जैसे  देश हाफिज़ को वांटेड घोषित कर उसके संगठन को प्रतिबंधित करते है वही दूसरी तरफ भारत के स्वतंत्र-देशभक्त-पत्रकार वैदिक जी उसे इतना महत्व देते है की उससे  मुलाकात करने मे कोई गुरेज नहीं है,  ना ही शायद इसमे उन्हे कुछ अनैतिक लगता है। देखने वाली बात होगी की बाबा रामदेव इस भरत-मिलाप पर क्या प्रतिकृया देते है।
उम्मीद है सम्पूर्ण भारत एक स्वर मे इसका विरोध करेगा। विशेष रूप से राजनीतिक वर्ग को सख्त प्रतिकृया के साथ कड़ा संदेश देना चाहिए की आपकी “स्वतन्त्रता का अभिप्राय बिलकुल ये नहीं की आप देश के गुनहगारों एवं दुश्मनों के साथ गुटूर-गू” करेंगे और हमदेखते रहेंगे। ऐसे सारे कृत देशविरोधी है,  हम ये कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

वैदिक जी नरेंद्र मोदी के समर्थक के तौर पर भी देखे जाते है, बड़ा ही दिलचस्प होगा अगर नरेंद्र मोदी इस मसले पर कोई प्रतिकृया देते है। व्यक्तिगत तौर पर मैंने नरेंद्र-मोदी का समर्थन केवल मात्र देश के स्वाभिमान-के-मुद्दे पर किया है। मुझे लगता है बहुत दिनो बाद भारत-माता को एक देशप्रेमी-देशभक्त प्रधानमंत्री नसीब हुआ है जो देश को प्राथमिकता देता है और देश के बारे मे सोचता है।

जय हिन्द..... जय भारत

रोहित श्रीवास्तव 
                                                                                                                                                                                                                               

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Friday, 4 July 2014

Interview with Alok Dixit


 स्टॉप एसिड अटैक मुहिम चलाने वाले अलोक दीक्षित का हमारी रफ्तार लाइव की टीम ने एक संक्षिप्त साक्षात्कार किया व उनसे इस मुहिम से सम्बंधित कुछ प्रष्न किये, नजर डालते हैं इस साक्षात्कार पर 

रफ्तार लाइव- अलोक जी, सर्वप्रथम तों हम आपकी इस प्रभावशाली सामाजिक मुहिम की सफलता के लिया बधाई देते हैं ।
अलोक- जी धन्यवाद ।

रफ्तार लाइव- अलोक जी आपने अपना यह अभियान कब प्रारंभ किया ?
अलोक- वैसे तों हमारा यह अभियान निर्भया दुर्घटना के एक वर्श पहले फेसबुक पर प्रारम्भ हो चुका था पर, जनअभियान के रूप मे इसका प्रारंभ निर्भया दुर्घटना के कुछ महीनो बाद 8 मार्च से प्रारंभ किया गया ।

रफ्तार लाइव- अपने इस अभियान के बारे मे कुछ बताइये ?
अलोक- वस्तुतः हमारा यह अभियान महिला हिंसा के विरोध मे प्रारंभ किया गया है, मै ये बहुत समय पहले महसूस करने लगा था कि महिलाओं के प्रति हिंसा कभी भी कानून के
द्वारा नहीं रोकी जा सकती है, इसके लिये एक ठोस प्रयास की आवष्यकता है जिसके द्वारा समाज मे एक नयी जागरूकता लाकर समाज मे व्याप्त महिलाओं के प्रति दोहरी सोंच को समाप्त किया जाये ।

रफ्तार लाइव- महिला हिंसा मे तो बलात्कार, छेड़खानी आदि भी आते हैं परन्तु आपने एसिड अटैक के खिलाफ ही अपना अभियान प्रारंभ किया ?
अलोक- देखिये, यधपि महिलाओं पर की गयी कोई भी, कैसी भी व कितनी भी हिंसा निंदनीय है परन्तु एसिड अटैक एक ऐसी हिंसा है जिसे भुक्तभोगी महिला चाह कर भी छुपा नहीं सकती है, उसके ऊपर हुई ऐसी घिनौनी हिंसा के सबूत ताउम्र रहते हैं जो उसे किसी मृत प्राणी के सामान बना देते हैं ।

रफ्तार लाइव- अलोक जी आपको अपना अभियान सफल क्यों लगता है ? दूसरे षब्दों मे पूछें तो आपके अभियान की सफलता का मापदण्ड क्या है ?

अलोक- वास्तव मे किसी भी सामाजिक अभियान का अंतिम और एकमात्र लक्ष्य होता है समाज मे पनपी विसंगति का अंत । हमारे अभियान का भी यही लक्ष्य है कि हम समाज की सोंच मे वह बदलाव ला सकें जिससे एसिड अटैक जैसी घिनौनी हिंसा का वजूद हमारे समाज से मिट सके, परन्तु जैसा मैंने कहा कि यह अंतिम लक्ष्य है जो भविश्य मे एक-न-एक दिन अवष्य पूरा होगा । इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये हमने बहुत सारे उपलक्ष्य बनाये हैं, एक-एक करके हम अपने उपलक्ष्यों को प्राप्त करते जा रहे हैं, इसी कारण हम अपने अभियान को सफल मानते हैं, पहला उपलक्ष्य था कि लोग हमसे जुड़ें, आज हमारे इस अभियान से बहुत लोग जुड चुके हैं, हमारा दूसरा उपलक्ष्य था कि हम जिनके लिये लड़ रहे हैं वे हमारे अभियान के माध्यम से सषक्त होकर अपनी लड़ाई खुद प्रारंभ करें और देखिये आज हमारे अभियान मे बहुत सी भुक्तभोगी महिलाएं नाकि जुड़ी हैं बल्कि अपनी लड़ाई भी खुद  लड़ रहीं हैं, लक्ष्मी आपके सामने इसका एक बड़ा उदाहरण है ।   

रफ्तार लाइव- अलोक जी आप जानते हैं कि हमारा आज का युवा जागरूक है, जोष एवं होष से परिपूर्ण है, परन्तु प्रत्येक युवा एक अभियान नहीं चला सकता इसके बावजूद भी वह समाज के लिये कुछ करना चाहता है, ऐसे युवाओं को आप क्या सुझाव देना चाहेंगे ?
अलोक- अभियान चलाना तो एक अंतिम अस्त्र की भांति है, नए कानून का बनना नए अभियान का प्रारंभ होना ही इस बात का प्रमाण है कि समाज मे कोई न कोई बिमारी अवष्य व्याप्त है । मेरा तो यह मानना है कि एक स्वस्थ समाज वही होगा जिसमे न तो कोई नया कानून बनेगा और न कोई नया अभियान जन्म लेगा । हमारा भविश्य का समाज स्वस्थ हो इसकी जिम्मेदारी प्रत्येक युवा की है और यदि इस जिम्मेदारी को हमारे प्रत्येक युवा ने निभा लिया तो प्रत्येक जिम्मेदार युवक का छोटा प्रयास भी किसी बड़े अभियान से अधिक फलदायक होगा, युवाओं का कर्तव्य है कि अपने आस-पास होने वाली छोटी से छोटी सामाजिक हिंसा पर आवाज अवष्य उठायें ।

रफ्तार लाइव- अलोक जी हम आषा करते हैं कि हमारे पाठकों को आपके सुझावों से एवं आपसे प्रेरणा मिलेगी । हमारी पत्रिका का भी यही प्रयास है कि आप जैसे लोग द्वारा किये जा रहे क्रांतिकारी प्रयासों को हम समाज के प्रत्येक वर्ग एवं अंग मे पहुचाए ।

अलोक- आपकी पत्रिका का प्रयास सराहनीय है, आशा करता हूँ कि आपकी पत्रिका रफ्तार लाइव अपने प्रयासों मे अवष्य सफल होगी ।  

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Thursday, 3 July 2014

भारत की स्वतंत्र "विदेश नीति" :?? ) :)


भारत की या सही मायनों मे स्पष्ट शब्दो मे कहु तो नरेंद्र मोदी जी की "विदेश नीति" बड़ी ही दिलचस्प होने वाली है।

जिसका एक नमूनाहम देख ही चुके है। एक तरफ वो अपने कट्टर प्रतिद्वंदी नवाज़ शरीफ को "शराफत" से हिंदुस्तान आने का न्योता देते है , पर उनके मनमाफिक (पाकिस्तान को मीडिया के हवाले से खबर) "नवाज़े" नहीं जाते ...... दूसरी तरफ वो चाइना को "पुचकारते" है .....ओबामा को "दुलारते" है।

हिन्दी को गौरान्वितऔर प्रसारितकरने के लिए विदेशी प्रतिनेताओ एवं राजनयिको से अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी मे संवादकरने का मील का पत्थरसाबित होने वाला निर्णय भी एक महत्वपूर्ण विदेश नीतिका हिस्सा ही है। मानो एक नए युग (नमो-युग) की शुरुआत होने जा रही।

आप को बताना चाहूँगा हर एक देश अपने विपक्षी देश के लिए एक विदेश नीति" निर्धारित करता है। वो देश राजनयिक और कूटनीतिक स्तर पर उसी "नीति" के अनुसार चलता है।

दुर्भाग्य ये है की शायद ही हिंदुस्तान की खुद की कोई "विदेश-नीति" है। अगर किसी भी प्रकार की कथाकथित "नीति" है भी तो वो भी कोई (अमेरिका जैसा) देश प्रभावी तौर पर "प्रभावित" करता है। पूर्व की यूपीए सरकार का "श्रीलंका" से लेकर "ईरान" एवं अन्य देशो के प्रति "कूटनीतिक रुख" इसका "प्रत्यक्ष" प्रमाण है।

पर जहा तक मेरी स्वयं की राजनीतिक समझ का सवाल है तो मुझे यही प्रतीत होता है मोदी जी "अमेरीकन-फूड" (जोकि मनमोहन जी का "मनपसंद" फूड ) से ज्यादा "चाइनिज-फूड" को तवज्जो देंगे

उनके इरादों से ऐसा भी लगता है की अब भारत की विदेश नीति किसी (अमेरिका) के दबाव मे बिलकुल प्रभावित नहीं होगी .... उन्होने ही कहा था "देश नहीं झुकने देंगे" देखते है वो झुकते है या “झुकाते" है अभी के हालात तो कुछ और ही तस्वीर बयान करते है भारत के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री जी असमंजस मे है की पहले किस देश को प्राथमिकता दे.... ओबामा से लेकर नवाज़.... भूटान....वर्मा....श्रीलंका.... नेपाल सभी "नमो-नमो" का मानो जाप कर रहे है ...... और कह रहे है मोदी जी से "पधारो मारे देश " .....

मोदी जी अपने सभी छोटे से लेकर बड़े देशो को एक साथ लेकर चलना चाहेंगे ...पूर्व की यूपीए सरकार मे सभी पड़ोसी देशो के साथ भारत के संबंध इतने मधुर नहीं थे यहाँ तक नेपाल और श्रीलंका जैसे मित्र देश भी नाराज़ थे। उम्मीद है मोदी जी रिश्तो मे आई इस "कटुता" को भर पाएंगे और ऐसा "समन्वय" स्थापित होगा जिससे भारतीय उपमहाद्वीप खुशहाली और उन्नति के पथ पर दौड़ेगा ...... वो मोदी जी कहते है न "सबका साथ-सबका विकास" वैसे लाचार जनता की भी यही है "आस":

चलिये ये सब तो ख्याली पुलाव है ...... आगे आगे देखिये होता है क्या........

पर खुशी है भारत की "विदेश नीति होगी" अब शायद "स्वतंत्र" होगी ? :) :)

(रोहित श्रीवास्तव द्वारा )

(आलेख मे प्रस्तुत विचार निजी है)

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