Friday, 29 June 2012

अतिक्रमण हटाने के नाम पर छिनती है जिन्दगी

महानरक कानपुर, अरे ! अरे ! माफ़ कीजियेगा । महानगर कानपुर । वैसे महानगर कहें या महानरक कोई विशेष अंतर नहीं है । यहाँ सड़कों पर निकलते ही सड़कों पर बसी झुग्गी झोपड़ियाँ, जगह २ लगे फल के और सब्जियों के ठेले । कहीं बिकते पकौड़े तो कहीं गरमा गरम जलेबियाँ , वहीँ कहीं पड़ा मलबा, कहीं कीचड, तो कहीं गढ्ढे , सड़कों पर लटकती होर्डिगें बस यही दिखाई पड़ता है हर जगह ।
हम भले ही कुछ भी सोंचे जनाब, पर इसी में  बसी है लाखों लोगो की जिन्दगी । इसी तरह के काम से पलते हैं सबके पेट । सड़क के किनारे वो टूटी हुई झोपडी ही छुपाती है इनकी इज्जत, वही देती है इन गरीबों को सहारा । इनमे बसने वाले छोटे छोटे मजदूर बड़ी बड़ी इमारते खड़ी करने का काम करते हैं । हम जैसे आम लोगों को इनसे कोई शिकायत नहीं । कम से कम वो चोरी तो नहीं करते बसर तो कर रहें हैं अपनी जिन्दगी इमानदारी से । पर पता नहीं नगरमहापालिका  को अपने आलिशान घर में रहते हुए इन बेचारे लोगों से क्या तकलीफ हो गई । शुरू कर दिया उसने अतिक्रमण हटाओ अभियान ।
हाय ! उजाड़ दिए उसने कितनो के आशियाने  ख़तम कर दी न जाने कितनों कि रोटी के ठिकाने । उस दिन जब मैं सड़क पर निकली तो सड़क कुछ चौड़ी लगी । किनारे ठेले जो नहीं थे वो टूटी फूटी झोपड़ियाँ भी नहीं थी । कीचड वहीँ था, गढ्ढे वहीँ थे वो बदबूदार कीचड़ भी जस का तस पड़ा था । बस मन में सवालों की  आंधी शुरू हो गई कि क्या आज उन लोगों के घर का चूल्हा जला होगा ? आज रात कहाँ बसर की होगी उन्होंने ? कहीं किसी माँ के आंचल में कोई बेटा भूखा तो नहीं सो गया न? उन बड़े अफसरों को कचरे, कूड़े, गढ्ढे जैसी समाज की गंदगी क्यों नहीं दिखी? क्यों सिर्फ गरीबों की जिन्दगी नजर आई? इन तमाम सवालों के बीच उसी छण खुद ने खुदी को एक तंज भरा जवाब भी पेश कर दिया । ये कोई अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं है, ये है गरीबी हटाओ अभियान । न रहेंगे गरीब और न रहेगी गरीबी । और सीना तानकर सरकार आम जनता के आगे आकड़े पेश करते हुए कहेगी " देखो गिरा दिया न गरीबी का प्रतिशत ।
जय हिंद जय भारत ।

स्वाती गुप्ता 

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Thursday, 28 June 2012

आज रात से 2.46 रुपये सस्‍ता हो जायेगा पेट्रोल

महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए थोड़ी राहत की खबर है। तेल कंपनियों ने आज आधी रात से पेट्रोल के दाम 2.46 रु प्रति लीटर घटाने का ऐलान किया है। पेट्रोल मूल्यों में यह कटौती विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपये की विनिमय दर के आधार पर की गई है। प्रत्येक राज्य में स्थानीय करों के हिसाब से यह कटौती 2.46 रुपये से लेकर 3.22 रुपये तक होगी।
अब दिल्ली में 67.78 रुपये का एक लिटर पेट्रोल मिलेगा। मुंबई में 73.35 रुपये के दाम से पेट्रोल की बिक्री की जाएगी। कोलकाता में अब एक लिटर पेट्रोल के लिए 72.24 रुपये चुकाने होंगे, जबकि चेन्नई में पेट्रोल का मूल्य 72.27 रुपये प्रति लिटर होगा। मालूम हो कि मई की 23 तारीख को पेट्रोल के दामों में हुई 6.28 रुपये (कर अतिरिक्त) की सबसे बड़ी बढ़ोतरी के बाद यह दूसरी बार दामों में कमी की गई है। जून की 3 तारीख को भी तेल कंपनियों ने 1.68 रुपये प्रति लिटर की कटौती की थी।
आपको यह भी बता दें कि बुधवार को ही सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों में से एक कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था, ‘हां, पेट्रोल की कीमतों में कटौती की गुंजाइश है। लेकिन, इस बारे में मैं पक्का नहीं कह सकता क्योंकि हमें रुपया में भी उतार-चढ़ाव देखना है।'

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Wednesday, 27 June 2012

कोई बता दे कहाँ है मेरा घर !

बेटियां जब पैदा होती हैं तो माँ बाप ये समझना शुरू कर देते हैं कि उनका सर झुक गया । बेटी के कानों में जब ये बातें डाली जाती हैं कि वो पराया धन हैं तो वो खुद फैसला नहीं कर पाती कि वो कहाँ जाएँ । क्योकि सारी उम्र वो खाना बदोश ही रहती हैं उनका कोई घर नहीं होता । कभी वो माँ बाप के घर में मेहमान होती हैं तो कभी ससुराल के घर में अजनबी ।
कभी हमसफ़र का घर भी उसका अपना नहीं होता तो बेटे के घर में भी कभी उसके लिए जगह नहीं होती । वो सारी उम्र न सिर्फ इसी तरह बसर करती  है बल्कि अपने अरमानों का भी गला घोंट देती है । फिर भी कभी अपने ख्वाहिशों को कभी भी सरे आम नहीं करती कि पता नहीं वो पूरी होंगी भी या नहीं ।
लड़की माँ बाप और अपने हमसफ़र के घर में सिर्फ अजनबी ही नहीं रहती बल्कि हमेशा डर खौफ और नशीहतों के साए में भी परवान चढती है ।
फिर कभी जब एक दिन एक लड़की बड़े अरमानो के साथ दुल्हन बनती है तो  उसकी ख़ुशी नाखुशी, उसका हसी मजाक ,  दुःख सुख सब कुछ ससुराल वालों के हाथ में होता है । उसकी अपनी कोई राय नहीं होती । और तो और इस अजनबी भरे माहौल में उसे ये भी नहीं पता होता कि वो अपना कदम कहाँ रखे । वो हमेशा ससुराल वालों के रहमों करम पर ही पलती है । क्योकि ससुराल में वो अपने माँ बाप कि इज्जत खाक में नहीं मिला सकती ।
और अगर आज के दौर में उसको जगह मिल भी जाए पर जब तक उसको जगह मिलती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । उसकी तकरीबन आधी जिन्दगी ख़त्म  हो चुकी है । उसके कदम तक जमीन में रखने के काबिल नहीं रहते ।
बेटियां पराई थी पराई है, पर क्या ये पराई ही रहेंगी ? शायद कोई भी इन्हें मुक्कमल जगह नहीं दिला सकता यहाँ तक कि खुद खुदा तक नहीं । नारी सबसे शक्तिशाली है ये सिर्फ वाक्य नहीं है ये सही है क्योंकि इतना कुछ वो अकेली ही सहती है । पुरुषो में इतनी ताकत  नहीं ।
आप लोगो से बस इतनी गुजारिश है कि आप अपनी बहन , बेटी , माँ और पत्नी को उसका घर जरूर बता देना । मुझे भी तलाश है अपने घर की ।

स्वाति गुप्ता

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Tuesday, 26 June 2012

भारत में लांच होगा 4,999 रुपए का लैपटॉप

अभी तक आकाश को दुनिया का सबसे सस्‍ता टैबलेट कहा जाता था मगर अब दुनिया का सबसे सस्‍ता लैपटॉप भी भारत में आने वाला है। जिसकी कीमत मात्र 4,999 रुपए होगी। हो सकता है आपको इस बात में यकीन न हो मगर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित लैपटॉप ब्रांड ‘एसीआई’ ने यह कारनामा कर दिखाया है।
कंपनी के अनुसार इसे जून तक भारतीय बाजार में उतार दिया जाएगा। एलाइड इंडिया कंप्यूटर्स के मैनेजिंग डायरेक्‍टर हीरजी पटेल ने जानकारी देते हुए बताया नये लैपटॉप में 10 इंच स्‍क्रीन दी गई है वहीं विंडो प्‍लेटफार्म में रन करने वाला यह अभी तक का सबसे सस्‍ता लैपटॉप है।
उन्‍होंने जानकारी दी इसके अलावा बजट लैपटॉप की रेंज में 9,999 का लैपटॉप भी लांच किया जाएगा। नए एलाइड लैपटॉप को चीन से मैन्‍यूफैक्‍चर किया जाएगा। इतना ही नहीं 19,999 रुपए की रेंज में इंटल आई3 सीपीयू से लैस लैपटॉप बाजार में उतारा जाएगा।
इतनी कम कीमत के सवाल पर उन्‍होंने बताया लैपटॉप में काफी कम मार्जिन रखा गया है जिसकी वजह से इसकी कीमत काफी कम है।

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एक और आतंकवादी गिरफ्तार खातिरदारी के खातिर

   मुंबई पर २६/११ को हुए आतंकी हमले में हेन्द्लर बन कर आतंकियों को हिंदी सिखाने और कई तरह के निर्देश देने का आरोपी अबू हमजा उर्फ़ अबू जिंदाल उर्फ़ सैयद जबिउद्दीन को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है और उससे लगातार पूछ-ताछ जरी है, बताया जाता है की अबू हमजा के सम्बन्ध इंडियन मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैबा के साथ भी हैं  
                    मगर सवाल ये उठता है की मुंबई हमले के जो दोषी जेल में हैं वो तो दामाद की तरह पल ही रहे हैं तो क्या ये नया आरोपी भी उन्ही की तरह हमारी हिन्दुस्तान की जेल में अपनी बाकी की ज़िन्दगी मज़े से काटने के लिए लाया गया है, पता नहीं हमारी सरकार किस तरह के सुबूत और आधारों के इंतज़ार में है जिनके मिलने, फिर जाँच होने, फिर विश्वसनीय होने, फिर सभी की सहमती पाने के बाद वो इन सभी दोषियों को सज़ा देने की स्थिति में आएगी 
                   भारत को एक दुःख से भरी तारीख देने वाले ये आतंकवादी जितने आराम से जिलो में अपनी जिंदगी काट रहे है, इन परिस्थितियों को देख कर उन वीरों के परिवार वालों पर दुःख व क्रोध का एहसास असहनीय स्थिति में है जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए प्राण लुटाते समय एक बार भी नहीं सोंचा की उनके बाद उनकी इस क़ुरबानी की क्या कीमत लगाएगी ये भारत सरकार और क्या उसके परिवार वालों को उनकी क़ुरबानी पर इन्साफ मिलेगा या नहीं 

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दो इस्तीफे कारण अलग अलग

आज कांग्रेस के दो मंत्रियो ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौपा , हालाँकि दोनों ही मंत्रियो का इस्तीफा देने का कारण अलग अलग था पर कमी तो हो ही गयी दो मंत्रियो की कांग्रेस के मंत्रिमंडल से ।
एक तरफ भ्रष्‍टाचार के आरोपो से घिरे हिमांचल प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री और तत्‍कालीन केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रधानमंत्री को इस्‍तीफा सौप  दिया। प्रधानमंत्री ने उनका इस्‍तीफा मंजूर कर लिया गया है। वीरभद्र सिंह लघु और कुटीर मंत्री थे। सोमवार को वीरभद्र सिंह और उनकी उनकी पत्‍नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ शिमला की अदालत ने आरोप तय किया था। वही दूसरी तरफ कांग्रेस के कद्दावर नेता और वित्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। आज से उनकी नई यात्रा की शुरूआत हो गयी है। 28 जून को प्रणव राष्‍ट्रपति पद के लिए नामांकन करेंगे। प्रणव दादा की राजनीतिक पारी औपचारिक रूप से आज से खत्‍म हो गयी है। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि 40 साल की राजनीति छोड़कर दुख हो रहा है।

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सरबजीत सिंह को रिहा करेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान राष्ट्रपति ने सरबजीत की फंसी की सजा को माफ़ कर दिया है , सरबजीत सिंह की फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी गयी है , सरबजीत सिंह पिछले २२ वर्षो से जेल में बंद है इसलिए सरबजीत को अब रिहा करा जा सकता है
सरबजीत १९९० में हुए सिलसिलेवार बम धमाको में दोषी पाया गया था , जिसमे १४ लोग मारे गए थे , जबकि सरबजीत का दावा था की वो एक किसान है और गलत पहचान का शिकार हुआ है

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Monday, 25 June 2012

सारा देश मजबूर है पौष्टिकता के नाम पर खाने को जहर


युवाओं का देश कहा जाता है भारत, कोई संदेह नही f सबसे जादा युवा वर्ग इसी देश मे रहते हैं  पर लगता है कि अब ये है, था मे बदल चुका है अब बूढ़ा होता जा रहा है भारत का युवावर्ग, युवा होने से पहले शायद बुढ़ापे की सीढ़ी चढ़ने लगा है आज का युवावर्ग, बात तो पहले से ही जानते थे पर आज आमिर ख़ान के शो सत्यमेव जयते को देखकर पूरा विश्वास हो गया 
सारे तथ्य सत्य और सच ही तो है, कभी अच्छा और भर पेट ख़ाता था व्यक्ति, बाजुओं मे ताक़त होती थी, कोई झाँसी की रानी होती थी, कोई भगतसिंग. भारत माता की सदा कृपा रही अपने लालो पर कि बेशक खाली पेट उठाया पर खाली पेट सुलाया कभी नहीं, जनता चाहे जितनी भी रही हो पर भारत माता ने सबको पाला है,  शुरू से ही  अच्छी ख़ासी पैदावार चल रही थी कि हरित क्रांति  गई और मच गई इस भारत माता की लाड़ करने वाली मिट्टी पर जहर उडेलने की होड़, लगता है जैसे शाजिस रची गई हो युवा वर्ग को कमज़ोर बनाने की.
 ऐसे--ऐसे  कीटनाशक जो वाकई मे मानव के शरीर के अंदर पहुँचकर क्या संग्राम मचा रहें हैं कोई कल्पना भी नही कर सकता, इस शो की रिसर्च जो कुछ रही हो पर मैं जादा दूर नहीं जाऊँगी बल्कि मैं तो अपनी पहली रिसर्च अपने पड़ोस से ही शुरू करना चाहूँगी, मैं अपने आस पड़ोस के अस्पतालों और क्लिनीकों में सुबह से लेकर शाम तक लोगों का ताँता लगा देखती हूँ  आख़िर ऐसा क्यो मेरे पड़ोस मे रहने वाला एक १० वर्षीय बालक पिछले  वर्ष से पथरी से ग्रसित है, आख़िर ऐसा क्यो लगभग सभी घरॉ मे ८०% सदस्य बीमार है, हर माता पिता अपने बच्चों को अपनी समझ से भरपूर पौष्टिक आहार देता है लेकिन ज़्यादातर बच्चे ऐनिमिक हैं, उनका शरीर मजबूत नही है वो जादा दौड़ नही सकते जादा वजन नही उठा सकते बहुत जल्दी थक जाते हैं.
 क्या यहाँ ये सवाल बार--बार मन मे नही उठता कि भर पेट और पोषक आहार लेने के बाद भी उनका पोषण उन्हे क्यों नही मिलता और क्या इस बात से हम इस बात पर संदेह नही कर सकते कि कहीं हम आहार के तौर पर स्लो पोइजन तो नही ले रहे हैं, खेती की विकास के आड़ मे डाला जाने वाला कीटनाशक ना केवल हमारे खाने मे जहर घोल रहा है बल्कि हमे साफ सुथरी वायु के लिए भी मोहताज बना रहा है कही ऐसा ना हो कि युवा वर्ग के साथ--साथ  भारत का बचपन भी कमज़ोर और धुँधला हो जाए, यहाँ ज़रूरत किसी और के कदम उठाने की नही है और ना ही एक दूसरे का मूह देखने की कि कौन आगे बढ़ेगा! यहाँ ज़रूरत है हमारे जागने की और किसान भाइयों के अच्छे प्रशिक्षण की, सरकार को खुद किसानो को प्रशिक्षित कराकर जैविक खेती के मार्ग खोलने चाहिए, आख़िरकार एक उत्तम आहार ही एक उत्तम शरीर खड़ा कर सकता है और तभी तो होगी देश की सुरक्षा मजबूत युवाओं के हाथ में                                                    

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