Thursday, 31 May 2012

इन्टरनेट : छोटी शुरुआत और बड़ा साधन ।

भारत वर्ष आई टी के छेत्र में भले ही बहुत तेजी से विकास कर रहा हो लेकिन इन्टरनेट जैसे  सरल , सुगम एवं महान साधन की महिमा का विस्तार पूरी तरह यहाँ पर नहीं हो पाया है जहाँ विदेशो में अभिव्यक्ति की आजादी को इस साधन के माध्यम से पूरी तरह इस्तेमाल करा जा रहा है वही भारत में इस क्रम में इसका इस्तेमाल अति अल्प ही होता है ।
भारत में इन्टरनेट उसेर की संख्या २०% से भी कम है और इनमे वो भी शामिल है जो इसका इस्तेमाल ऑफिस , कॉर्पोरेट वर्ल्ड , बिज़नस आदि के लिए करते है अतः इस तरह से इन्टरनेट भारत वर्ष में एक पौधे के सामान है जिसका अगर सही दिशा में तथा सही ढंघ से पालन पोषण किया जाये तो वह एक ऐसे मज़बूत साधन के रूप में विकसित हो जायेगा जोकि भारत वर्ष की अभिव्यक्ति की आजादी को व्यक्त करने में पूरी तरह शशाक्त हो जायेगा ।

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ईश्वर की कला, मानव का विनाश

कला कहने को सिर्फ़ एक शब्द ही तो है पर अर्थ इतना व्यापक कि इसके बिना तो जैसे जीवन की कल्पना ही नही की जा सकती। जीवन कला बिना ऐसा लगता मानो प्रकृति के सृजनकर्ता ने जीवन रूपी पुष्प मे कोई रंग ही ना भरा हो।
कला की परिभाषा कहने को विद्वानों को बोलें तो वे ना जाने कितने रूप मे कला को परिभाषित कर दें। पर मेरे विचार मे कार्य मे आत्मा का समागम ही कला है। कला को प्रदर्शित करने के लिए दिमाग़ की आव्यशकता नही होती। यहाँ केवल हृदय की अनुभूति की आव्यशकता है।
कवि, लेखक, चित्रकार, नृत्यकार ये सभी अपनी - अपनी कलाओं से जीवन को तरह - तरह के रंगों से भर देते हैं।
जब एक लेखक अपने विचारों को कागज पर उतारता है तो उसे किसी दिमाग़ की आव्यशकता नही होती है', आव्यशकता होती है तो केवल भाव की । जिसके द्वारा वह अपनी हृदय की धड़कानों को विचारों की कलम द्वारा कागज पर बड़ा ही सुंदर रूप प्रदान करता है ।

उसी तरह एक नृत्यांगना अपने कदमो की ताल को अपने दिल की धड़कन से मिलाकर सबका मन मोह लेती है । चित्रकार अपनी चित्रकारी से ना जाने कैसे कैसे भावों को प्रकट कर देता है ।

गायक अपने सरगम को सुरों मे ढ़ालकर ना जाने कितने भावों को ध्वनियों मे समेटे हुए गायन के रूप मे प्रकट करते हैं।
परन्तु जब बात आती है ईस्वर की कलाकारी की तो लगता है, हाँ वाकई उससे बड़ा कलाकार तो कोई है ही नही । वही तो है कलाकारों का कलाकार।
ईश्वर ने इस पूरी सृष्टि को कितने सुंदर-२ रंगो से नवाजा है प्रक्रति में वितरित ये तमाम रंग केवल परोपकार, दया, कृपा, ममता जैसे भावों को ही दिखाते हैं। जो सृजन का प्रतीक है, प्रेम का उदगम है, भावों का सागर है, ममता का भंडार है।
भगवान के सृजन के आगे मानव के निर्मित अविष्कार कभी -२ विध्वंस की ओर ले जाते लगते हैं । मानव के अविष्कार कभी- कभी क्रूरता को प्रकट करते हैं।
खुले गगन मे अपने परों को फैलाकर उड़ते हुए ईश्वर के द्वारा सृजित पक्षी कितने आज़ाद लगते हैं पर बदले में इंसान ने बनाया पिंजरा ओर क़ैद। जिसमे पक्षी अपने पखों को फड़फड़ाकार केवल आज़ादी की गुहार लगाता है। पता नही आप इसे मानव का प्रेम कहेगें या क्रूरता, पर मैं इसे प्रेम की संगया नही दे सकती।
ईश्वर ने अपने प्रेम का प्रदर्शन पशुओं को बनाकर किया जो जीते जी मानव को कितना लाभ पहुँचाते हैं । कोई सामान धोता है तो कोई स्वयं  मानव को ढोता है । कोई हमे दूध, मख्खन, मिष्ठान से भरपूर करता है तो कोई ना जाने कितने ही अन्य तरीकों से। पर मानव की कलाकृति के क्या कहने ! उसने इसी के माँस से बनाया चमड़ा और किसी ने अपने पेट का आहार । ईश्वर ने तरह -२ की फसल बनाई, मेवा, दूध, घी, अन्न-धन सब कुछ पैदा किया पर मानव ने बनाया माँस । यहाँ तक जब ईश्वर ने बनाया मानव, जो उसकी कलाकृतियों मे सर्वश्रेष्ठ कही जाती है तो बदले मे मानव ने अपने आपको भी नही बक्शा । उसने बना दी जातियाँ, धर्म, संप्रदाय ।
मानव, मानव नही रहा या तो हिंदू बना या मुसलमान । ईश्वर ने बनाया इंसान और इंसान ने बना दिए दायरे । अमीरी ग़रीबी के दायरे , धर्म के दायरे, जात के दायरे, लिंग के दायरे। और अपने ही दायरॉं मे उलझकर दुखी होता रहा मानव ।ये है वमानव की कलाकृति । ईश्वर ने बनाया खनिज  संसाधन और मानव बना बैठा अपने विनाश की कलाकृति डायनामाइड । पहले तो मानव अपने निवास की कमी पूरा करने के लिए ईश्वर निर्मित उन सुंदर वनों को काटता रहा ओर जब ग्लोबलवार्मिंग और थर्मल पल्यूशन जैसी समस्याएँ सामने आई तो वो भयाभीत होने लगा । चाहे कितनी दूर तक दृष्टि चली जाए, ईश्वर ने हर रूप मे सृजन किया है और मानव ही बना है विनाश का कारण । दोनो की कलाकृतियों मे बड़ा अंतर है उस विधाता की कृतियाँ हैं प्रेम की प्रतीक और इंसान की कृतियाँ क्रूरता का प्रतीक।
नज़रे दूर तक दौड़ा ली जाएँ तो ऐसे बहुत सारे मुद्दे हैं जैसे ग्लोबलवार्मिंग, थर्मल पल्यूशन, बढ़ता जल स्तर, नाभकीय प्रदूषण, और ना जाने कितने मुद्दे जिनमे सोचा जाए तो मानव का ही हाथ रहा है । मानव माने या ना माने लेकिन इस बात को नकारा नही जा सकता की एक ना एक दिन वो ही बनेगा विनाश का कारण।
कृपया जागें और बचा ले उस ईश्वर के उस अथाह प्रेम को ।

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२०१२ हो सकता है सफल बॉलीवुड के लिए

साल २०११ बॉलीवुड के लिए बहुत ही अच्छा सबित हुआ जहां बॉडीगार्ड जैसी फिल्मो  ने कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए तो वही इस साल ने कुछ बेहतरीन फिल्मे दी जिनमे नो वन किल्ड जेसिका,सात खून माफ़, तनु वेड्स मनु,रेडी,बुड्ढा होगा तेरा बाप, डेली बेली, सिंघम,फ़ोर्स, रा-वन, द डर्टी पिक्चर, डॉन-२ आदि थीं    २०१२ में आने वाली फिल्मो की सूचि अभी से तयार हो चुकी है और जिनसे कई बड़े नाम जुड़े होने की वजह से उम्मीद की जा रही है की ये भी इस साल को बॉलीवुड के सफलतम सालो में से एक बना देंगी आने वाली फिल्मो में रोहित शेट्टी की बोल बच्चन , कबीर  खान की एक था टायगर, रीमा कागती की तलाश और यश चोपरा की अनाम फिल्म जिनसे दर्शको को बहुत उम्मीदें है

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Tuesday, 29 May 2012

फिर दिखा खान वार का असर ।

 बॉलीवुड में प्रचिलित खान वार का असर हाल ही में देखने को मिला , गौरतलब है की शाहरुख़ खान रोहित शेट्टी के साथ चेन्नई एक्सप्रेस में काम कर रहे है जिसका सेट मुंबई के फिल्म सिटी में लगना था मगर इस समय सलमान खान की आने वाली फिल्म एक था टाईगर का सेट वही पर लगा हुआ है इस लिए मौके की नजाकत को समझते हुए शाहरुख़ खान ने रोहित शेट्टी से चेन्नई एक्सप्रेस का सेट महबूब स्टूडियो में लगाने की सलाह दी , जैसा की हम सब जानते है की २००८ में कैटरिना कैफ की बर्थडे पार्टी में सलमान और शाहरुख़ खान के बीच कहा सुनी की अब वो एक दूसरे को सामने नहीं आना चाह्ते

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खेल को निगलता भ्रष्टाचार का जिन्न !

हमेशा से ही खेल उस भावना के तहत खेला जाता है जिसमे मित्रता , अपनत्व एवं सम्मान को सबसे बड़ा दर्ज़ा दिया गया है , परन्तु जब खेल में भ्रस्टाचार का आगमन हो जाता है तो वो खेल की मर्यादा को गर्त के उस सागर में ले जाता है , जहाँ पर खेल की साड़ी नैतिकताओ का अंत हो जा है खिलाड़ी जब किसी खेल से जुड़ता है तो उसका एक मात्र लक्ष्य ये होना चाहिए की वह अपने प्रदर्शन के द्वारा अपना एवं अपने राष्ट्र का सम्मान बढ़ाये तथा अपने प्रदर्शन को उस ऊच्च कोटि का साबित करके दिखाए जहाँ उसके देश को उसके नाम से जाना जाये
      क्रिकेट जगत में पहली मैच फिक्सिंग १९९४ में हुई थी उस समय ये कोई नहीं जानता था की फिक्सिंग या यह दीमक क्रिकेट जगत को धीरे धीरे खोकला कर देगा , एक मात्र खिलाड़ी हेंची क्रोनिये जोकि साउथ अफ्रीका से थे उन्होंने जानता के समक्ष इस बात की पुष्टि की थी की वह भी फिक्सिंग का हिस्सा रहे है और वो आत्म ग्लानी की वजह से इस इकरार के समय रो भी पड़े थे
हमारा भारतीय क्रिकेट जगत भी फिक्सिंग के दंश से अछूता नहीं रहा है , इसने कई भारतीय क्रिक्केटर जैसे अजय जडेजा , नैन मोंगिया , अजहरुद्दीन आदि को भी अपना निशाना बनाया है
ये दुर्भाग्यपूर्ण है की खेल जोकि मत्रिपूर्ण संबंधो को और प्रगाड़ करने का एक जरिया है उसे आज के समय में कुछ लोगो ने निजी हितो के लिए एक अनैतिक एवं गन्दा रूप दे डाला है


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YOUTH BRIGADE OF INDIA.


India is one of the youngest nation of the world where youth contributes to 56 percent of its total
population .and youth politician is the need of time to build a strong and developed nation ..

During last two Lok Sabha polls youth are been taken seriously and as a responsible shoulders but
did the youth brigade has meet out the expectations of the country men .

Supriya Sule
Daughter of President Nationalist Congress party Sharad Pawar. A Congress alliance holding two
ministries in current government.

Supriya is M.P From pune constituency in Maharashtra.

Education - B.Sc degree from Jai Hind College Mumbai.

Was accused along wth her father for irregularities during I.p.L


Akhilesh Yadav

Son of the Samaj Wadi party president Mulayam Singh Yadav. M.P from Kannauj

Education B.E from Mysore University.

M.E FROM Australia

Projected as the next successor of S.P. leding party for the upcoming Vidhan Sabha election


Priya Dutt

Daughter of late Sunil Dutt actor and one of the most noble politician ..M.P from central constituency
Mumbai.

Education - B.A In Sociology From Sophiya College Mumbai University.

Worked In Television And Video and studied at the Center for the media arts in New York.

She has been appointed secretary general of the all india congress committee . Runs a charitable
trust Nargis Dutt memorial charitable trust named after her mother late Nargis Dutt


Naveen Jindal

M.P Since 2004 from Kurukhsetra. (HARYANA) Jindal is the member of Indian National Congress.

Chancellor of O.P Jindal Global University

And Chairman of Jindal Steel.


Sachin Pilot

Son of deceased congress politician Rajesh Pilot ( SQUADRON LEADER OF INDIAN AIR FORCE )
Sachin is currently the minister state for communication and information.

Education - B.A from ST.Stephens college.

M.B.A from Warton Business School University of Pennsylvania Philadelphia U.S.A


Jyodiraditya Scindia

Son of prominent Indian politician and minister from the congress party  Madhavrao Scindia ,
Jyotiaditya is the minister who heads commerce an industry ministry

Education
After earning a management degree from the Stanford college in the united states he worked as
investment banker for merill lynch and as an intern in un economic development cell .


Agatha K. Sangama
Agatha Sangma debuted in Indian politics in 15 lok sabha after her father P.A Sangma a prominent
leader has resigned and joined state politics.Agatha became the youngest female M.P from
tura constituency on the ticket of nationalist congress party (n c p) she heds the ministry of rural
development

Education l.l.b degree from pune university and also a masters iin environmental management from
Nottingham university UK


Varun Gandhi

Grandson o indira Gandhi ..and son of sanjay Gandhi and menka Gandhi..

Education. B.Sc from London school of Economics

Masters in science in public school of orientation and African studies fom University of London



Oomar Abdullah

Son of former JMK C.M Farrokh Abdullah.Omar was a union minister for external affairs in Atal
Bihari vajpayee'S NDA Government.

Later on he resigned and after forming a alliance with Indian national congress he became the
youngest C.M of Jammu and Kashmir










Rahul Gandhi

Rahul Gandhi comes from India,s most powerful family the Nehru and Gandhi family. After Jawahar
Lal Nehru . Indira Gandhi and Rajiv Gandhi. Rahul is advertised as the next prime minister of India
from the Gandhi Nehru family

Education B.A from university of Florida . M-Phil from Cambridge university

Constituency - Amethi

All of the youth politicians have inherited politics. They are brought up in a political
background  and of they are on limelight not because of there work but due to there controversial
statements. Politician like Sachin Pilot, Priya Dutt , Naveen Jindal are highly admirable and are
warmly received by the mass but apart from a M.P they are carrying the responsibility of
nation on there shoulders but they have a poor attendance at parliament and they are least bother in
decision making.

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Monday, 28 May 2012

समझदार सरकार और मूर्ख जनता का आमना सामना

पेट्रोल के दामो पर हो रही जद्दो जहद के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने जब पेट्रोल से २० % वैट हटाया तो ऐसा प्रतीत हुआ मनो ऊँट के मुह में जीरा और दूसरी तरफ आम जनता पर केंद्र सरकार ने एक और उपकार कर दिया , जब उसने C N G पे ५ %, वैट बढा दिया और इसके साथ ही साबित कर दिया की वो बहुत समझदार है और देश की जनता मूर्ख है
वही दूसरी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को तूल देकर ये बात साबित करने में कोई कमी न छोड़ी की वह इस ब्रह्माण्ड में भारतीय जनता के सबसे बड़े हितैसी है
जनता जोकि इस सारे मुद्दों को मूक बधिर की तरह देख सकती है और हात पैर मार कर शांत  बैठ सकती है , वो आखिर कब तक आटा , दाल , चावल के लिए लड़े और किस किस से लड़े

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Sunday, 27 May 2012

IPL और इसकी मर्यादा

 IPL इस समय प्रसिद्धी के उस मक़ाम पर है जहाँ  क्रिकेट का हर प्रेमी उसे पूजा  की तरह पूजता है मगर वही दूसरी तरफ कुछ जानकारों और इस खेल की बारीकियो को करीब से समझने वालो का कहना है की IPL क्रिकेट के भविष्य के लिए एक बुरा संकेत भी हो सकता है तो अब सवाल यह उठता है की क्या सच में IPL , क्रिकेट की मर्यादा को गिरा रहा है
       हालिया विवादों को देख कर कही न कही तो ये लगता है की IPL में क्रिकेट में मर्यादाओ का हनन हो रहा है क्रिकेट हमेशा से ही जेंतेलमेंस  गेम कहा गया है मगर जिस तरह से IPL -5 विवादों में घिरा रहा है उससे तो ये लगता है की पैसा कमाने की होड़ में BCCI ने इस खेल की मर्यादा को ताक पर रख दिया है
                       ये माना जा सकता है की युवा प्रतिभा  को निखारने के लिए IPL एक बेहतरीन जरिया है मगर इस जरिये का इस्तेमाल अगर पूरी सकारात्मकता के साथ किया जाये तो निश्चित ही भविष्य में इस से निकले हुए खिलाडी एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आ सकते है

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Saturday, 26 May 2012

क्या अब रीमेक और हॉलीवुड के भरोसे ही है हमारा बॉलीवुड ?

फ़िल्मे हमेशा से ही समाज का आइना रही हैं मगर आज के समय में निर्देशकों के पास तो जैसे कहानियों का अकाल सा पड़ गया है तभी तो आज जब भी दर्शक जब सिनेमा हॉल में नयी स्टोरी के लिए जाता है तो उसके हाथ सिर्फ निराशा ही लगती है अब सवाल ये उठता है की तड़क भड़क के साथ फिल्म का प्रचार करने वाले फिल्म निर्माताओ के पास नई कहानियों का अकाल क्यों है और अगर वाकई में ऐसी बात है तो क्या उन्हें एक अच्छी खोज के बाद अपनी फिल्म का प्रस्तुतिकारण करने में कैसी झिझक है    डॉन, अग्निपथ,देवदास, शोले जैसी फिल्मो का रीमेक इस बात की पुष्टि करता है और बॉलीवुड कॉपी करने में भी पीछे नहीं रह गया है यहाँ कई सफल हॉलीवुड की कॉपी की गयी है आज के समय में लेखको के पास कहानियों की कितनी कमी है,अगर आने वाले समय में भी लेखकों ने नयी कहानिया प्रस्तुत न की तो वह समय दूर नहीं जब एक बड़ा दर्शकवर्ग सिनेमा से कट जायेगा

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Thursday, 24 May 2012

डीमआरसी हुयी अव्यवस्थाओं का शिकार

नई दिल्ली - मेट्रो के सफ़र की चाह लिए आते तमाम मुसाफिरों को आज दिल्ली में मेट्रो की अव्यवस्थाओं का शिकार होना पड़ा ,दिल्ली और एनसीआर पूरी मेट्रो के जाल में बुनी है पर अब दिन प्रतिदिन मेट्रो का अव्यवस्थाओं का शिकार होती दिख रही है आज हमारे विशेष संवाददाता ने मेट्रो का सफ़र वहां की अव्यवस्थाओं के बारे में जायज लिया ,उन्होंने प्रतिदिन चलने वाले यात्रियों से मेट्रो के सफ़र के अनुभव के बारे पूछा तो उन्होंने इस अनुभव को कुछ खट्टा  कुछ मीठा बताया पर जब वहां मौजूद विधार्थीयों से पूछा गया कि आपका अनुभव कैसा रहा तो वहां मौजूद एक छात्र का जवाब एक दम  स्पष्ट था उसने बताया कि -मेट्रो के प्लेटफ़ार्म पर  पहुचने पर  मेट्रो के डिस्प्ले बोर्ड  पर मेट्रो का प्लेटफार्म पर आने का समय दिखता है पर अक्सर मेट्रो दिखाए गये समयानुसार के पहले आती है या फिर देर से आती है ,जिससे समय पर पहुच पाना मुश्किल हो रहा और कालेज प्रशासन से उन्हें अक्सर पटकार मिलती है |
वहीँ नेपाल से आये राजा  से मेट्रो के अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तीखे शब्दों में इसकी आलोचना  कि उन्होंने अपने अनुभव को बाटते कहा कि -वह शादीपुर मेट्रो स्टेशन पर नोएडा सिटी सेंटर वाली मेट्रो चढ़े  क्यूंकि डिस्प्ले बोर्ड पर नोएडा सिटी सेंटर दिखा रहा था ,क्यूंकि उन्हें सेक्टर १८ जाना था इसलिए पर जब वह यमुना बैंक पहुचे तो उन्हें पता लगा कि यह मेट्रो तो वैशाली तक जायेगी फिर उन्हें यमुना बैंक से मेट्रो बदलनी पड़ी और उन्होंने यह भी कहा कई देशों का सफ़र किया जिस प्रकार यहाँ पर मेट्रो में काफी भीड़ होती और मेट्रो स्टेशन से पहले खड़ी हो जाती है ,और उस असुविधा के लिए केवल खेद जताना ,उचित नही है ,इसलिए मै यही कहूँगा कि दिल्ली मेट्रो का सफर मेरे लिए काफी खट्टा रहा | 
जिस प्रकार डीमआरसी अव्यवस्थाओं  का शिकार हो रही है  और यदि इसमें जल्द सुधार ना किया गया तो इसका हाल भी भारतीय रेलवे की तरह हो जायेगा |

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आस्था के नाम पर होता जनता की भावनाओ से खिलवाड़

भारत हमेशा से ही संत, महात्माओ का देश रहा है और इतिहास में कई ऐसे ज्ञानी और संपूर्ण लोग हुए है जिन्हें संत, महात्माओ की पदवी से नवाजने में कोई कठिनाई न हुई ,  परन्तु आज के समय में कुछ लोगो ने संतो के नाम को भी दागदार कर दिया है ,आज के समय में  ये आम बात होती नज़र आ रहीहै की  जब की किसी भी बाबा और संत कहे जाने वाले पर ठगी,अभद्रता और कुप्रचार के आरोप लगते हों |
 जहाँ एक ओर राजकोट में स्वामीनारायण सम्प्रदाय के एक बाबा उसी संप्रदाय की महिला के साथ पकडे गए, वहीँ आंध्र प्रदेश के ईसाई धर्म के प्रचारक क. ए. पॉल को पोलिसे ने उनके ही भाई के क़त्ल के जुर्म में पोलिसे ने हिरासत में ले लिया है | वही दूसरी ओर भक्तो से धोका धडी के आरोप के मामले में घिरे निर्मल बाबा को फिलहाल पटना हाई कोर्ट से कुछ दिनों की राहत मिली है |
तोह आखिर कब तक ऐसे ढोंगी बाबा हमारे देश की जनता को बेवकूफ बनाते रहेंगे और कब तक इस देश की जनता आंख बंद करके ऐसे बाबाओ पर विश्वास करती रहेगी |क्या ऐसे मामलो में सरकार को हस्तक्षेप करके ऐसे ढोंगी बाबाओ के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं करनी चाहिए |

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Wednesday, 23 May 2012

न बोले अन्ना न अरविन्द ने कुछ सुना

शायद किसी ने सच ही कहा है की किसी अच्छे काम को बढ़ावा देने वाले दुनिया में जितने है उससे  कहीं ज्यादा उसके विरोधी, तभी तोह अन्ना हजारे के खिलाफ  साजिशे करने वाले लगातार उनके संगठन को तोड़ने में लगे हुए है और इस उम्मीद में है की किसी तरह संगठन को तोड़ दिया जाये |
हाल ही में पार्टी के कार्यकर्ता अरविन्द केजरीवाल को अन्ना की तरफ से लिखी हुए एक फर्जी चिट्ठी मिली है जिसमे ये लिखा है की अन्ना अपने संगठन की कार्यप्रणाली से खुस नहीं है और इस चिट्ठी के मुताबिक़ अन्ना ने इंडिया अंगेस्ट करप्शन के लिए एकत्रित हुए धन का हिसाब मांगते हुए उसके इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है |
इस पात्र के फर्जीवाड़े का खुलासा स्वयं अन्ना हजारे ने किया , और स्पष्ट किया की यह चिट्ठी संगठन में फूट डालने के उद्देश्य से लिखी गयी है  जबकि मैंने अरविन्द कजरीवाल को कोई ऐसी चिट्ठी नहीं लिखी है |

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मीडिया का बदलता स्वरुप

गणेश शंकर विधार्थी को पत्रकारिता  का जनक माना जाता है .उन्होंने पत्रकारिता  को निष्पक्ष  और जनता की आवाज के रूप में बुलंद किया था पर उनको क्या पता था की आज पत्रकारिता एक बड़े व्यवसाय का रूप ले लेगी | जिस प्रकार से इलेक्ट्रानिक  मीडिया कार्य कर रही है वो तो कहीं से भी पत्रकारिता को अनुसरण नही कर रही वो केवल बिकी न्यूज (टीआरपी  और व्यवसाय के लिए ) और मसाला टाइप ही न्यूजों  को दर्शाती है ,कभी जनता का का इस पर पूर्ण विश्वाश हुआ करता था पर आज के समय में यह पूर्ण विश्वाश,  अविश्वाश में परिवर्तित नजर होता आ रहा  है यदि हम ताजा उदाहरण ही हम उठा ले तो अन्ना का अनशन जब दिल्ली से हुआ तो इलेक्ट्रानिक मीडिया ने बड़ी तेज़ी से कवर किया और सकारात्मक पहलू ही गिनाये पर जब वहीँ अनशन मुम्बई में हुआ तो नकरात्मक पहलू  छोड़कर किसी सकरात्मक  पहलू पर चर्चा करती  नजर नही आयी |

आखिर  हम पत्रकार कर ही क्या सकते है क्योंकि  हम भी संस्थागत किसी प्रोडक्शन और किसी मीडिया हाउस  में कार्य करते है, और अपने द्वारा किये गये कार्य का मेहनताना लेते है इसलिए हमें वही करना होता  है जो हमे ऊपर से निर्देश दिए जाते हैं ,क्योंकि हम उनके आधीन होतें हैं ,पुरानी कहावत में कहा भी गया है जिसकी लाठी उसकी की भैंस | सीमित शब्दों में कहा जा सकता है की पत्रकारिता अब असहज हो गयी है क्योंकि एक धीरे -धीरे व्यवसाय का रूप ले चुकी है और कहा भी जाता है कि व्यापार में सब कुछ जायज है |

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हिंदुस्तान से हिंदी गायब !


हमारे देश मे ऐसे कई मूल निवासी हैं जिनसे अगर ये पूछा जाए कि हमारे देश की राष्ट्रभाषा क्या है तो उनका जवाब तो होगा हिन्दी लेकिन उन्हे गर्व होता है तब जब वो अँग्रेज़ी बोलना सीख लेते हैं भारत मे हिन्दी की कितनी दुर्दशा है इस बात से सभी वाखिफ़ हैं अँग्रेज़ी भाषा मे जकड़े आज हिन्दुस्तान के वासी सीना चौड़ा करके बोलते हैं "मुझे हिन्दी नही आती" हिन्दुस्तान की हिन्दी आज स्वयं ही अपना अस्तित्व खोती नज़र आ रही है अंग्रेज़ो की इतनी लंबी गुलामी हिन्दुस्तान यो आज़ाद हो गया पर भारत के पैर अँग्रेज़ी की जंजीरो से इतनी जोरो से जाकड़ गये कि आज हिन्दुस्तान मे हिन्दी का स्तर गिरता चला जा रहा हैकुछ लोग हिन्दी की वकालत तो करते नज़र आ जाते है पर असर कब ओर खा होता है ये पता कर पाना हमेशा मुश्किल रहा है 
गत वर्ष बाबा रामदेव उच्चशिक्षा का माध्यम भारतीय भाषाओ में कराने की माँग करते नज़र आए पर हुआ क्या और होगा क्या ये हर भारतीय जानता है आवाज़े उठती हैं और बंद हो जाती है और चिंतन का विषय चिंतन तक ही सिमट कर रह जाता है
वही दूसरी ओर मुंबई के उच्चतम न्यायालय ने ये फ़ैसला दिया था की लोक सेवा आयोग की अंतिम परीक्षा यानी साक्क्षात्कार में परीक्षार्थी अपनी मात्र भाषा में उत्तर दे सकता है पर शायद न्यायालय यह भूल गया कि उसका फ़ैसला परीक्षार्थी को सफल नहीं बना सकता क्योकि फ़ैसला केवल भाषा का माध्यम बदल सकता है कुर्सी पर बैठे परीक्षकों के विचार नही बदल सकता
यहाँ आवश्यकता सोच बदलने की है क्योकि कुर्सी पर बैठे परीक्षक अगर अँग्रेज़ी को ही श्रेष्ठ समझते रहे तो कोई भी फ़ैसला कोई बदलाव नही कर पायेगा
विडंबना यह है कि भारतवासी अपनी ही मात्रभाषा को वो सम्मान , वो इज़्ज़त नही दे पाता जो की वह अँग्रेज़ी भाषा को देता है मैने भारत मे शिक्षा के विकास से संबंधित किताब मे पढ़ा था कि भारत मे अँग्रेज़ी भाषा की नींव लॉर्ड मैकाले ने डाली थी उसका केना था कि "अगर मेरी भाषानीति भारत मे लागू हो गई तो हर एक भारतीय अपनी ही मात्रभाषा से घृणा करने लगेगा"
और आज शायद हम उसी दंश को झेल रहें हैं
 हालात यहाँ तक पहुँच चुके है कि निर्धन से निर्धन व्यक्ति आज अपने बच्चों को कुछ भी करके अँग्रेज़ी माध्यम के शानदार विद्यालय में पढ़ना चाहता है चाहे इसके लिए उन्हे कुछ भी झेलना पड़े
ग़लती इन अभिभावको की नही है आज की भड़ती हुई इस गला काट प्रतियोगिता की है जब जीविका के उद्देश्य से व्यक्ति किसी प्रतियोगी परीक्षा मे चयनित किया जाता है तो यह देखा जाता है कि बालक की पढ़ाई का माध्यम क्या है अँग्रेज़ी या हिन्दी  क्यो हर क्षेत्र में हिन्दी को ही इतनी दयनीय नज़रों से देखा जाता है लोग क्यो भूल जाते हैं कि हमारी इन्ही मूल भाषाओं (हिन्दी व संस्कृत) ने ऋषियों, योगियों, मुनियों को जन्म दिया और ना जाने कितने वेद कितने पुराण शास्त्र उपनिषद् ग्रंथ की रचना की
जब हर भारतीय दुनिया के संपूर्ण साहित्य में सबसे ज़्यादा बलवान भारतीय वेद कितने पुराण शास्त्र उपनिषद् ग्रंथ को माना जानता है तो क्यों वह हिन्दी को श्रेष्ठ नहीं मानता
धिक्कार तो इस बात पर है की जिस देश की रास्ट्रभाषा हिन्दी है उस देश के सभी राजकीय तथा राष्ट्रीय कार्य अँग्रेज़ी भाषा मे किए जाते हैं नेता हिन्दी भाषण नही देते सरकारी दफ़्तरों मे जो आवेदन पत्र हिन्दी भाषा मे लिखे जाते हैं उन्हे मेज के ऊपर सजाया जाता है और जो आवेदन पत्र हिन्दी भाषा मे प्रस्तुत किए जाते हैं उन्हे कचरे के डिब्बे मे डाल दिया जाता है
विश्‍व भर के कितने ही देश फ्रांस, इटली, जर्मनी, और ना जाने कितने ही देशों ने कभी भी विकास करने के लिए विदेशी भाशों को अपनी शिक्षा का माध्यम नही बनाया और ना ही किसी भाषा को इतनी एहमियत दी फिर क्यों भारत मे आज़ादी इतने वर्ष बाद भी अँग्रेज़ी की दासता को नही छोड़ा भारत अंग्रेज़ो से तो आज़ाद हो गया परंतु जानबूझकर उनकी भाषा में जकड़ा हुआ है
क्यों भारतवासी ये नही समझते कि-
"निज भाषा उन्नति अहैं, सब उन्नति को मूल,   बिन निज भाषा के मिटे ना हिय को शूल"

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आखिरकार शहनशा ने बता ही दिया अपनी पोती का नाम

बॉलिवुड महानायक अमिताभ बच्चन ने आखिरकार इस बात की पुष्टि कर दी है कि उनकी पोती का नाम आराध्या है।
अमिताभ की बहू ऐश्वर्या राय ने पिछले साल 16 नवंबर को बेटी को जन्म दिया था और इसके साथ ही उसके  नाम को लेकर अटकलें शुरू हो गई
थी। करीब चार महीने तक बेटी नाम से बुलाए जाने के बाद , ऐसी खबरें आई थी कि बच्चन परिवार की नई सदस्य का नाम आराध्या खा गया है। 
अब 69 वर्षीय ऐक्टर ने अपनी पोती के नाम की पुष्टि कर दीहै। ट्विट्टर  पर बिग बी के एक फैन ने ब उनसे जाननाचाहा कि उनकी पोती का क्या नाम है तो जवाब में िग नेट्वीट किया कि उसका नाम आराध्या है।

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मनमानी रहेगी बरकार या फिर ऑटो बढ़ने से होगा किराये में सुधार

नई दिल्ली -देश की राजधानी दिल्ली में ऑटो वालों की मनमानी के चलते यहाँ जायज रुपये से अधिक रुपये यात्री से वसूलते है और यात्रियों को मजबूरी से समझौता करना जायज समझते हैं | वहीँ सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद लोगों की आस है की एक लाख ५५ हजार ऑटो बढ़ने से प्रतिस्पर्धा तेज़ होगी तो ऑटो किराए में कमी आएगी 
दिल्ली में ऑटो चालक मीटर से चलने पर एतराज जतातें है और कहते है की इतना मीटर से भी पड़ेगा या उससे भी ज्यादा मीटर से पडेगा जिससे यात्री ऑटो चालक की बातों के आवेश में आ जाते हैं और यात्री की स्थिति मरता न क्या करता वाली हो जाती है ,और बोले  गये रुपये पर राजी हो यात्रा के लिए तैयार हो जाते हैं |
जब हमने इस बात की पुष्टि करने के लिए ऑटो की यात्रा के लक्ष्मी नगर से निकले तो हमें ऑटो वाले को रोककर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (अजमेरी गेट ) का किराया पूछा तो उसने ८० रुपये कहा मैंने मीटर से चलने के लिए कहा तो उसने बताया की २ किमी . का तो २० रूपए तो फिक्स  उसके बाद ७रु .किमी . है |मैंने मीटर से चलने के लिए तैयार था पर उसकी बात से थोडा मन डगमगाया ,हमें कहा यदि ज्यादा लगेगा तो ज्यादा ही सही पर आज पता लगाना है की बात में सच्चाई कहाँ तक है फिर मैंने मीटर से चलने के लिए कहाँ तक है फिर मैंने मीटर से चलने के लिए कहा और रेलवे स्टेशन पर पहुचने पर मीटर पर किराया ५८ रु. कुछ पैसे दिखा रहा था मैंने सोचा -यदि मै बिना मीटर के आता तो मेरे २० रु. ज्यादा फर्जी ही चले जाते मैंने ऑटो वाले से कहा -ये  क्या भईया है तो उसने कहा ये सब चलता है भाई साहब ! 
प्रश्न यही उठता है जब तक सरकार इस पर लगाम नही लगाती तब तक ऑटो चालक अपनी मनमानी करते रहेंगे चाहे एक लाख या दो लाख ऑटो बढा दिए जाए |

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"पर मेरा भारत महान है"

मेरे देश की जनता मौन है,
पर वो जानती है ये कौन है,
ये देश को टुकड़ो मे हैं बाट रहे,
दीमक बनकर हैं चाट रहे

ये मेरे देश के नेता है
देश को इसने लूटा है
नेताओं का नारा है
"देश का पैसा हमारा है"

जनता के धन से वो अपना कोष भरता है
देश की गलियों मे हर रोज कोई भूखा मरता है
कुर्सी मिलने से पहले इनके पास हर समस्या का निदान होता है
कुर्सी मिलने के बाद हर एक नेता बेईमान होता है

हज़ारों मुक़दमे मेरे देश के नेता का सम्मान है
किसी के सीने का मेडिल तो किसी के सर का ताज है

कोई घोटालों का मेडल तो कोई अस्मत लूटने का ताज लिए बैठे हैं
हर रोज देश की अस्मत नीलामी के लिए तैयार रहते हैं
नेताओं मे मारा मारी है, लड़ने की इनको बीमारी है

नेताओं मे ईमान नही पर इनसे जाड़ा कोई धनवान नही
आम आदमी खुद्दार है पर पीसने को वो लाचार है

कभी बुजुर्गों से सुनते थे अपने वतन की कहानी
आज देखते हैं उसी के पतन की कहानी

पहले के नेताओं का दौर ही कुछ और था
 पहले के नेता कहते थे "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा"
आज के नेता कहते हैं " तुम मुझे कुर्सी दो मैं तुम्हे बर्बादी दूँगा"

अब जनता को कुछ करना होगा, अब तो आगे बढ़ना होगा
वरना हर घर का चूल्हा शमशान बनेगा,
फिर कोई अंग्रेज मेरे देश का मेहमान बनेगा
फिर से लूट जाएगी मेरे देश की आबरू,
और फिर से मेरा वतन गुलाम बनेगा

इस कहानी का ऐसे कैसे मैं अंत करूँ
                            आख़िर मेरा भी कोई ईमान है
भले ही मेरे देश का नेता बैईमान है
                            "पर मेरा भारत महान है"
 जय हिंद जय भारत

Swati Gupta

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