Monday, 29 April 2013

कमजोर विदेश नीति की परिचायक यूपीए सरकार

   अभी हाल ही में कुछ दिनों पहले भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इटली के मरीन को जब सरकार की तरफ से वोट देने के लिये वहाँ जाने की इजाज़त दी थी तभी से ये बात तो सिद्ध हो गयी थी की हमारी सरकार की विदेश नीतियाँ कितनी परिपक्व हैं उसके बाद जब चीन के भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की खबरे आयीं तो हमारे विदेश मंत्री ने बड़ी ही विनम्रता से चीन दौरे पे जाकर इस मुद्दे पे बात करने का मन बना लिया | इस सब के बाद जब सरबजीत का बेहद संजीदा मुद्दा सामने आया तो फिर से हमारी सरकार की कोशिशें बेअसर दिखायीं दीं |

  वहीँ अजमेर: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के वंशज और अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबिदीन अली खान ने सरबजीत सिंह पर जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इसमें पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईअसआई की साज़िश से इन्कार नहीं किया जा सकता है |

  अब सोचने वाली बात ये है कि अफजाल गुरु और कसाब कि फांसी के बाद हुए विरोध के बाद भी क्या सरकार को इस बात की ज़रा सी भी समझ न थी की पाकिस्तानी जेल में बंद सरबजीत पर इस घटना का असर पड़  सकता है और उसे विशेष सुरक्षा दिए जाने के लिये पाकिस्तानी सरकार को आगाह किया जाये, अगर हमारी सरकार दिन पर दिन इस तरह के संजीदा मुद्दों पर ढीली पड़ती जायेगी तो वो दिन दूर नहीं जब हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी सुरक्षा और सुविधा पाने के लिये भारत में ही अपराध करेगा |

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