Sunday, 28 February 2016

सेक्स में ऐसे लें परमानंद



हमेशा से ही लोगों के मन में सेक्स को लेकर जिज्ञासा रही है। यह एक ऐसा विषय है, जिसके बारे में जितना मालूम हो उतना कम है। हम आपको कुछ ऐसा बताएंगे जो आपके लिए सौ प्रतिशत फायदेमंद होगा और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप मेल हैं या फीमेल। सेक्स के दौरान आपके लिए सबसे बड़ा चैलेंज होता है कि अपने पार्टनर से कैसे वह सबकुछ पाया जाए जो आप चाहते हैं। विश्वास मानिए इसके लिए आपको कोई जंग लड़ने की जरूरत नहीं है, बस कुछ छोटी-छोटी बातें ध्यान रखिए और काम बन जाएगा। आप सिर्फ इन पांच बातों को ध्यान रखिए और सेक्स का भरपूर मजा लीजिए।  


ना करें जल्दबाजी


सेक्स में कभी जल्दबाजी ना करें, धैर्य रखें और परमानंद के लिए पूरा समय दें। सबसे पहले अपने पार्टनर से थोड़ी बात जरूर करें, इससे आप क्लोज होंगे। बेहतर होगा कि आप डर्टी टॉक्स करें।


ओपनिंग विद फोरप्ले


उन पलों में एक बात हमेशा ध्यान रखें कि फोर प्ले से दूर ना भागें।  जितना ज्यादा समय आप इसे देंगे आप सेक्स को उतना ज्यादा इंज्वाय कर पाएंगे। इसकी शुरूआत आप एक पैशनेट किस से भी कर सकते हैं।


टच से होगा कमाल


एक अच्छे स्टार्ट के लिए अच्छा टच जरूरी है, जो आप दोनों को मदहोश कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। शुरूआत से ही समझ लीजिए कि आपके पार्टनर को किन स्पॉट्स पर टच करने से खुशी मिलती है । उन्हें धीरे से अपनी आगोश में लें और फिर हो जाइए शुरू।


ना बनें बोझ


सेक्स के दौरान आप दोनों को ही अपनी पोजीशन का विशेष ख्याल रखना पड़ेगा। ऐसा ना हो कि आप में से कोई भी किसी दूसरे पर भार बन जाए। इस दौरान आप पार्टनर को किस कीजिए और प्यार से सहलाना मत भूलें।


क्लाइमैक्स हो तो ऐसा

क्लाइमैक्स सेक्स का एक जरूरी पार्ट है, यह मेल और फिमेल दोनों के लिए बहुत मायने रखता है। साथ ही आपको इस दौरान यह भी ख्याल रखना होगा कि आपका पार्टनर भी क्लाइमैक्स तक पहुंचे। इसके लिए आखिर तक इंतजार करें और खुद को पार्टनर के हवाले कर दें।

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फलों के राज


फल से तो सभी परिचित होंगे । पर शायद ऐसी अनूठी बातों से नहीं परिचित होंगे । आइये जानते हैं  कुछ फलों के अनूठे राज -

1- केला - केला एक ऐसा अकेला फल जिसकी कोई अन्य प्रजाति नहीं पाई जाती क्योंकि केला साउथ इस्ट एशिया द्वारा क्लोन किया गया फल है और आज तक जितने भी केले हुए है हर एक केला एक ही जैसा होता है । 


2- अनानास - अनानास एक ऐसा फल जिसको खाने से आपकी स्वाद ग्रंथियां नष्ट हो जाती है क्योंकि अनानास का प्रोटीन मुंह में ब्रेकडाउन होने लगता है  और आपको तब तक किसी भी डिश का स्वाद नहीं आएगा जब तक आपकी स्वाद ग्रंथियों की मरम्मत नहीं हो जाती । पर अगर आप थोड़ी सी सावधानी रखे तो ये समस्या हरगिज नहीं होगी बस आप इसके स्लाइस काटकर खाने से पहले इसे थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रख दीजिये । इसके ठन्डे होने पर इसे खाने से आपकी स्वाद ग्रंथिया सुरक्षित रहेंगी ।


3- अमरुद- अमरुद को कभी आप खाली पेट न खाएं वरना आपके पेट में दर्द हो सकता है । आप इसे भरे पेट खाएं तो ये कब्ज और गैस की समस्याओं से आपको निजत दिलाएगा । अगर आपको खांसी है तो ये आपका दुश्मन है पर अगर आप इसे खांसी के समय भूंझ कर खायेगे तो ये आपको खांसी से निजात दिला सकता है ।


4- सेब - अगर आप लेट नाईट स्टडी में काफी का जादा इस्तेमाल करते है तो सावधान ये आपके नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती है । आप  इसका बेहतर विकल्प एक सेब के रूप में कर सकते है यकीं मानिये ये आपको कॉफ़ी  से जादा एनर्जी देगा ।


5 - सभी फलों के बारे में ये एक ऐसा तथ्य है जो आपकी कुछ सोच को मिथ्या साबित कर देगा । अगर आप ये सोचते हैं कि फ्रोजेन फ्रूट की क्वालिटी कम हो जाती और उनकी पोष्टिकता कम हो जाती है तो वाकई ये मिथ्या है । जी हाँ , आप फ्रोजेन या फ्रेश किसी भी तरह के  फ्रूट खाएं सबमे बराबर पोषण ही होता है ।


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Thursday, 25 February 2016

भारत की राह पर चलते खिलाड़ी कुमार

                                     



हाल ही में रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म एयरलिफ्ट खूब पसंद की गई। जिसमें वह एक बिजनसमैन के रोल में नजर आए। फिल्म ईराक-कुवैत युध्द के समय वहां से भारतियों के निकलने की कहानी को बयान करती है।

पिछले काफी समय से अक्षय देशभक्ति की फिल्मों पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में इस थीम पर बेस्ड कुछ अच्छी फिल्में बनाई हैं। वह अब तक पेट्रिऑटिक थीम पर बेस्ड हॉलिडे और बेबी जैसी कामयाब फिल्में कर चुके है। अब वह एयरलिफ्ट फिल्म ले कर आ रहे हैं, जो लोगों के मन में एक बार फिर देशभक्ति की भावना को जगाएगी। 

अक्षय के फिल्म सलेक्शन को देखकर लगता है कि वह एक्टर मनोज कुमार की राह पर चल पड़े हैं। मनोज कुमार ने भी एक समय पर ऐसी ही फिल्मों को खूब बढ़ावा दिया था। उन्होंने अपने करियर में देशभक्ति पर आधारित कुछ बेहतरीन फिल्में बनाईं। इनमें शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम और क्रान्ती जैसी फिल्में हैं, जो लोगों के जहन में आज भी जिंदा हैं। यह तो सभी जानते हैं कि मनोज कुमार की इन्ही फिल्मों को पसंद कर लोगों ने उनका प्यार से भारत रख दिया था। मनोज कुमार ने भी अपने चाहने वालों के इस प्यार को दिल से लगा लिया।

अब देखने वाली बात यह है कि क्या अक्षय को भी दर्शकों का वही प्यार मिलता है और क्या अक्षय के चाहने वाले उन्हे भी कोई प्यार भरा नाम देना चाहते हैं। आने वाले समय में चाहे जो भी हो लेकिन एक बात तो तय है कि लोग अक्षय को ऐसी भूमिकाओं में खूब पसंद कर रह हैं।

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Friday, 5 February 2016

सीनियर ऐक्टर्स समझें अपनी जिम्मेदारी


बदलते समय के साथ हिंदी सिनेमा और इसका ऑडियंस तेजी से बदला है। इसी के चलते अब लोग उन फिल्मों को हाथों हाथ ले रहे है, जिन्हे पहले केवल एक लिमिटेड ऑडियंस के लिए माना जाता था। 

एक समय था जब ओम पुरी अभिनीत अर्धसत्य और नसीरुद्दीन शाह की पार जैसी फिल्मों को लोग ज्यादा अहमियत नहीं देते थे। अब समय तेजी से बदल रहा है। जहां लीक से हटकर बनने वाली फिल्में जैसे मांझी- द माउंटेन मैन और लंचबॉक्स को भी दर्शकों की कोई कमी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ ऐसी फिल्मों की भी कोई भरमार नहीं जो केवल पैसे कमाने के लिए ही बनती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि पैसा कमाने की होड़ में वह एक्टर हैं जो 20 साल से भी ज्यादा समय से इंडस्ट्री में हैं। 

सोचने वाली बात यह है कि क्या अब भी इन सीनियर एक्टर्स को ऐसी फिल्मों की भूख है जो सिर्फ अच्छा व्यापार करें। इन एक्टर्स को अब अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए और समाज को कुछ सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों से जुड़ना चाहिए। इसके साथ ही ऐसी कहानियों को भी सामने लाना चाहिए जिससे हमारे बॉलिवुड के नाम का डंका पूरे विश्व में बज सके।

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पैसे कमाने की होड़ में गिरता हिंदी सिनेमा



सिनेमा समाज को संदेश देने का एक बेहतर तरीका है लेकिन तब क्या हो जब सिनेमा केवल कमाई का जरिया बन कर रह जाए। आज के सिनेमा में अडल्ट फिल्मों की बरसात सी हो गई है। पैसे कमाने की होड़ ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया है कि यह सिनेमा समाज और खास तौर पर बच्चों पर क्या असर डाल रहा है।

कभी कॉमेडी तो कभी सस्पेंस फिल्म्स के नाम पर सेक्स सीन्स दिखाए जा रहे हैं। हालांकि इन पर नाम के लिए रोक लगाई जाती है लेकिन वह कितनी कारगर होती है सब जानते हैं। यह फिल्में छोटे बच्चों तक किसी न किसी तरीके से पहुंच जाती है और उनके ऊपर बुरा असर डालती हैं।

असल में फिल्म में इन सीन्स का होना गलत नहीं मगर ऐसे सीन्स की भरमार पैसे कमाने का जरिया बनाना सही नहीं है। हमे समझना होगा कि ऐसी फिल्में जिनमे सेक्स परोस कर दर्शकों को बटोरा जाता है वह हमारे हिंदी सिनेमा पर काले धब्बे की तरह हैं। ऐसी फिल्मों में मैसेज और स्टोरी के अलावा सब कुछ होता है। जिन्हे 3 घंटे देखना और खाली दीवार को देखना एक बराबर है।

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ऐज फैक्टर केवल हिरोइंस के लिए


बॉलिवुड के कई अजीब ट्रेंड हैं, उनमे से एक हिरोइंस की ऐज पर भी असर डालता है। फिल्मी दुनिया में समय के साथ एक तरफ मेल एक्टर की कीमत बढ़ती जाती है, वहीं फीमेल एक्टर का प्राइस कम होते चले जाते हैं। इसका उदाहरण शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार जैसे मेल एक्टर हैं। जिनके समय बीतने के साथ फीस और वैल्यू आसमान छूने लगी। वहीं फीमेल एक्टर की बात करें तो माधुरी दीक्षित, रवीना टंडन, करिश्मा कपूर जो किसी टाइम हर डॉयरेक्टर की पहली पसंद हुआ करती थी आज गुमनाम सी हो चुकी हैं।

असल में फीमेल एक्टर्स को नकारने का सिलसिला उनकी शादी के बाद ही शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे वह पूरी तरह फिल्मी परदे से गायब हो जाती हैं। यह बात समझ से परे है कि दर्शक मेल एक्टर्स को तो शादी के बाद भी अपना लेते हैं तो फिर फीमेल एक्टर्स के साथ ही ये नाइंसाफी क्यों होती है। ऐसा नहीं है कि समय बीतने के साथ इन फीमेल एक्टर्स की एक्टिंग में कोई कमी आ जाती है। इसके बावजूद दर्शक इन्हे सिरे से नकार देते हैं। इस पूरे माजरे में किसकी कमी है यह तो पता नहीं लेकिन हमेशा से यही होता है।

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