Wednesday, 31 October 2012

पचास साल का हुआ जेम्स बांड


 लन्दन के उपन्यासकार इआन फ्लेमिंग के उपन्यास और फ़िल्मी दुनिया का सबसे बड़ा जासूस पचास साल का पूरा हो गया , 5 अक्टूबर 1962 को "डॉक्टर नो" जेम्स बांड की पहली फिल्म रिलीज़ हुई थी ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एम आइ-6 का एजेंट है जिसका कोड 007 है । जेम्स बांड दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दूसरी सिरीज़ फिल्म है इस बात से इसकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है इस क्रम में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म "हैरी पॉटर है"।
                                जेम्स बांड की फिल्म "ओक्टोपसी" की शूटिंग भारत में हुई थी जिसमे दो भारतीय अभी अभिनेताओं "कबीर बेदी" और "विजय अमृतराज"  ने काम किया था इस फिल्म की शूटिंग उदयपुर के जग्महल पैलेस में हुई थी, अब तक सीन कोंनेरी, जॉर्ज लेज़ेन्बी, रॉजर मूरे, टिमोथी देल्थों, पियर्स ब्रोसनन, डेनियल क्रैग (मौजूदा जेम्स बांड) ने बांड का किरदार निभाया है ।
                                2 नवम्बर को बांड की 23वी  फिल्म "स्काईफॉल" रिलीज़ हो रही है जिसका क्रेज खास तौर पर युवाओं में ज्यादा है अब देखने वाली बात ये होगी की क्या जेम्स बांड की लोकप्रियता को ये फिल्म कौन से नए आयाम देती है ।  

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Monday, 29 October 2012

यूपीए-2 और कांग्रेस की घटती साख को बदलाव कर बचाने की कवाय़द तेज

एक के बाद एक घोटालों का खुलासा उसके बाद सवैंधानिक संस्था सीएजी से कैबिनेट के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का दो टुक चुनौती भरा रवैयां.आएं दिन केजरीवाल का समस्त राजनीतिक जमात को एक तराजू में तोलना जिसमें अभी तक कांग्रेस का भ्रष्टाचार रूपी हैवान वजन दर वजन अधिक मोटा रहना.लोगों में एक स्पष्ट संदेश जाने लगा कि यह सब बातें झुठी हैं जो चुनावों के समय सुनाई जाती थी- "कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ" .. इसी के परिणम स्वरूप पहले मुख्यमंत्री के बेटे साकेत की उत्तराखंड की टीहरी लोकसभा उपचुनाव में हार और राष्ट्रपति प्रणब मु्खर्जी के बेटे अभिजित का 2500 वोटों से एक मामूली सी जीत दर्ज करना.जबकि,बंगाल में इस समय सबसे ताकतवर दल टीएमसी ने जंगीपुर से कोई प्रत्याशी नही खड़ा किया था.इसी सीट से प्रणब 2009 लोकसभा चुनाव में डेढ़ लाख वोटों से जीते थे.मतलब साफ़ हैं कि यदि,इस समय लोकसभा चुनाव हो जाते हैं तो मोजूदा राजनीतिक घटनाक्रम कांग्रेस का हाथ मरोड़ देगा.गौर करने वाली बात हैं कि इन सब पतन की ओर जाती राजनीति के बावाजूद भी केंद्र में बैठे श्रद्धास्पद मंत्री महोदय जिस 'तल्खी' और 'अहंकार' से अपना बचाव करते हैं वो कैमरों पर एक ही स्पष्ट संदेश देती हैं की इस सरकार को अपने किये पर कोई अफ़सोस नही हैं,ना ही तमाम आरोपों पर अपना पक्ष रखना ये उचित समझती हैं.लंबे समय से चली आ रही सूत्र ख़बरे अब सत्यापित होने लगी हैं.केंद्रिय मंत्रिमंडल में 'सूरते' बदलने को तैयार हैं.स्वाभाविक सी बात हैं यह बदलाव आम फेरबदल से नही हैं,इन में कुछ खास़ हैं."एस.एम कृष्णा" का अपने पद से इस्तीफा उस समय हुआ जब हाल ही में कर्नाटक लोकायुक्त ने मैसूर-बैंगलोर एक्सप्रेस हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में कृष्णा के खिलाफ़ जांच के आदेश दिए,वही सुबोधकांत सहाय का नाम पहले ही कोयला घोटाले में आ चुका हैं,दूसरी तरफ़ संगठन का लचर होना समय,समय पर कांग्रेस को सताता रहा हैं..जिसके लिए अंबिका सोनी,मुकुल वास्निक,गुलाम नबी आज़ाद को मैदान में उतारा जा रहा हैं. देखना होगा क्या सूरत बदलने से सीरत में कुछ बदलाव आएगा..


लेखक-अंकित

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Saturday, 27 October 2012

वाह रे ! मंत्री साहब

मैंने सुना है पढ़ लिखकर हम देश के अच्छे नागरिक बनते है और उससे देश की तरक्की होती है ।
पर हमारे केंद्रीय विकास मंत्री जयराम नरेश जी का अनोखा वादा तो सुनिए जरा- "2013 तक सभी स्कूलों ने होंगे शौचालय "
वाह रे वाह ! पूरा उत्तरप्रदेश 2 लाख से अधिक शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है और मंत्री साहब शौचालय का वादा कर रहे है । अब भई मंत्री जी को कौन समझाए? कि बच्चे शौच करने नहीं स्कूल पढने जाते है । मंत्री जी अगर आपको याद न हो तो हम याद दिला दें कि UP में पिछले एक वर्ष से लगभग 78,000 शिक्षकों की भारती रुकी पड़ी हुई है । बेहतर होगा अगर आप थोड़ा सा ध्यान उस ओर भी दे दें । वरना सरकार तो बेरोजगारी भत्ता बाँट बाँट कर तारीफें पा लेती है पर वास्तव में जनता को बार बेरोजगारी भत्ता नहीं सिर्फ एक बार रोजगार चाहिए । इसलिए मंत्री साहब सिर्फ शौचालय मत खुलवाइये, थोडा ध्यान बेरोजगारों को रोजगार दिलवाने में भी लगाइए ।
स्वाती गुप्ता
जय हिन्द
जय भारत

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बस कोई एक हो ऐसा, दिल पे हाथ जो रख दे

                                      बस कोई एक हो ऐसा, दिल पे हाथ जो रख दे ।
                                      और पूछ ले हमसे- "धडकने इतनी तेज़ क्यों है?
                                         हो कोई परेशानी , या कुछ भी उलझने ।
                                       तुम राह पर चलना , बस थोड़ी दूर हूँ मैं ।।
                                               मैं साथ हूँ  तेरे , हर राह पर तेरी ।
                                         तेरा हाथ थामूंगा ,  नहीं मजबूर हूँ मैं ।।
                                            तेरे साथ है मेरे , ये जिंदगी के पल ।
                                         ता उम्र गुज़ारूंगा , तेरी तकदीर हूँ  मैं ।।"
                        
                                                                                                                          स्वाति गुप्ता

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Friday, 26 October 2012

कार्टूनिस्ट असीम 24 कैरेट खरा सोना

देशद्रोह के गलत आरोपों पर जेल जा चुके कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को एक राजनैतिक दल को ओर से बिग-बास के घर से बाहर निकालने की धमकी दी जा रही है. आरपीआई के नेता रामदास अठावले ने धमकी दी है कि "त्रिवेदी को उस घर से 28 अक्तूबर तक निकाल दिया जाए वर्ना हम ‘‘बिग बॉस’’ के घर में घुस जाएंगे और उसे वहां से निकाल देंगे". असीम एक समाजसेवी कार्टूनिस्ट हैं जो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए सारी दुनिया में जाने जाते हैं. हम सेव योर वॉयस के को-फाउंडर और कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की अभिव्यक्ति की आजादी पर किये जा रहे इस हमले का विरोध करते हैं. साथ ही हमारी महाराष्ट्र सरकार से भी अपील करते हैं कि वह लोनावला स्थित बिग-बास के घर पर असीम की सुरक्षा सुनिश्चित करे.

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को इससे पहले भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिये परेशान किया जा चुका है. महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा असीम पर देश-द्रोह का मुकदमा लगाए जाने और उन्हे गिरफ्तार करने के लिये सरकार को लताड़ भी लगाई थी. इससे पहले कुछ आपराधिक तत्वों द्वारा असीम को धमकी भरे फोन भी किये गये थे और कहा गया था कि असीम को महाराष्ट्र आने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. दुनिया के सबसे बड़े डेमोक्रेटिक देश में इस तरह की धमकियों को न सिर्फ देश और उसके संवैधानिक मूल्यों का अपमान माना जाना चाहिये बल्कि किसी कलाकार की कला को दबाने की अनुचित और शर्मनाक सेंसरशिप के तौर पर भी देखा जाना चाहिये. 


असीम का व्यवहार बिग-बास के घर में भी बेहद सराहनीय रहा है और वहां रह रहे सभी कंटेस्टेंट असीम का सम्मान करते हैं. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कमेंट्रेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने तो असीम को 24 कैरेट खरा सोना तक कह दिया. पिछले 18 दिनों में असीम ने रियलिटी शो में कोई ऐसा कार्य नहीं किया है जिससे राष्ट्र या किसी विशेष बिरादरी का अपमान होता हो. असीम ने बिग-बास के मंच को अपने आन्दोलन को जनता तक पहुचाने के लिये ही इस्तेमाल किया है. बिग-बास के घर में जाने से पहले ही असीम ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे मनोरंजन करने के इरादे से नहीं बल्कि लोगों के बीच भष्टाचार के खिलाफ एक अलख जगाने के लिये बिग-बास हाउस जा रहे हैं.

असीम त्रिवेदी सेंसरशिप के खिलाफ लड़ाई लड़ रही 
सेव योर वाइस के को-फाउंडर और सक्रिय सदस्य भी हैं और इसलिये महाराष्ट्र के राजनैतिक दल रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया द्वारा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की अभिव्यक्ति पर किये गए इस हमले की भरसक निन्दा करती है. साथ ही हम गृह मंत्रालय से इस दल के खिलाफ कार्यवाही करने की भी अपील करते हैं.


आलोक दीक्षित
को-फाउंडर
सेव योर वॉयस  सम्पर्क करने के लिए क्लिक करें (
http://www.facebook.com/writeralok?fref=ts)

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विवादों में फंसता कार्टूनिस्ट

              विवादित कार्टूनिस्ट और बिग बॉस के प्रतिभागी  असीम त्रिवेदी एक बार फिर से विवादों में घिर गये हैं | महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से आये रोष से भरे दलितों ने रियलटी टेलीविजन कार्यक्रम 'बिग बॉस' के प्रतियोगी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को शो से बाहर निकाले जाने की मांग को लेकर गुरुवार सुबह लोनावला स्थित इस बिग बॉस के घर के बाहर प्रदर्शन किया। यह जानकारी 'रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया'(आरपीआई) के एक सदस्य ने दी। 'आरपीआई' के प्रवक्ता मयूर बोर्कर ने बताया कि मुम्बई, ठाणे, पुणे, नासिक एवं अन्य हिस्से से आए 5,000 लोगों ने पार्टी प्रमुख रामदास अठावले के नेतृत्व में प्रदर्शन किया।उन्होंने से कहा कि असीम द्वारा भारत के विभिन्न प्रतीक चिन्हों के अपमान और संविधान की अवमानना किए जाने पर गत सप्ताह अठावले ने उनका व 'बिग बॉस' का और इसके प्रसारणकर्ता कलर्स चैनल का विरोध किया था। 
          एक अधिकारी ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार ने शायद उन्हें माफ कर दिया है लेकिन वह बाबा साहब अम्बेडकर द्वारा लिखे गए भारतीय संविधान की अवमानना करने की वजह से अभी भी हमारे प्रति जवाबदेह हैं।"दो महीने पहले महाराष्ट्र सरकार ने भारतीय संविधान और विभिन्न चिह्नों को अपमानित करने वाला स्केच बनाने पर असीम पर राजद्रोह का मुकदमा किया था। इस मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था, लेकिन लोगों के विरोध के बाद उन्हें रिहा कर उन पर से यह मुकदमा वापल ले लिया गया था।
          आखिर असीम को और कितना विरोध झेलना पड़ेगा और क्या  बिग -बॉस में  असीम का पत्ता जल्द ही इस विरोध के चलते जल्द ही साफ़ हो जायेगा ये तो  आने वाले एपिसोड में ही पता चलेगा |

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Thursday, 25 October 2012

जो दिखाया वो सचमुच में चक्रव्यू

गोविंद सुर्यवंशी और ना जाने कितने नाम हैं तुम लोगों के.. लेकिन बहुत समय से मैं तुम्हें खोज रहा था. अब चले.. इसी डायलॉग के साथ फिल्म चक्रव्यू का चक्र शुरू होता हैं.नक्सली कमांडर गोविंद पूलिस के हथ्ते लगने के बाद से "लाल सलाम" के हर नारे के साथ जल,जंगल,जमीन, की बात करने वाले काँमरेड आदिवासियों की जमीन के लिए लड़ने लगते हैं.फिल्म दो दोस्तों की विपरीत सोच से शुरू होती हुई एक राह पर दोस्ती के नाम पर दोनों को ला खड़ा कर देती हैं.अभय देवल जिन्होंने फिल्म में कबीर का किरदार अदा किया हैं वो नंदीघाट के नक्सलियों से ख़बरी के तौर पर अपने डीजीपी पूलिस अधिकारी अर्जून रामपाल यानी आदिल के लिए जुड़ते हैं.काफ़ी हद तक कमांडर राजन और उनके साथियों की कमर तोड़ भी देते हैं.भीतर ही उन्हीं के साथ रह कर घर का भेदी लंका ढाएं जैसा कुछ कर दिया जाता हैं.वही,महांता ग्रुप जिसके प्रमुख लंदन में एक आलिशान बंगले में रहते हैं और 15,000 करोड़ का निवेश अपनी कंपनी के माध्यम से नंदीघाट में करने का प्राँजेक्ट बनाते हैं तब तमाम पूंजीवादी सब गांव में रह रहें आदिवासियों को विकास के नाम पर उन्हें उनकी जमीन से बेदखल करने की जी तोड़ कोशिश में लग जाते हैं.आदिल खान इसे ग़लत ठेहराते हुये तमाम ठेकेदारों को हवालात में डाल देते हैं.जो कुछ समय में गृह मंत्री के फोन से इस साहस के लिए फटकारें भी जाते हैं.इसी दौरान आदिल का गांव वालों में विस्वास पैदा करने का संकल्प ढीला होने लगता हैं.आदिल का मानना होता हैं कि बिना आदिवासियों के सहयोग के नकस्ली कुछ समय में ही विफल हो जाएंगे.वही,धीमे धीमे कबीर आदिल के साथ मिल कर पूलिस की हर मूवमेंट की जानकारी नक्सली कमांडरो तक पहुंचा कर उन पर भरोसा हासिल करने लगता हैं ..

लेकिन धीरे धीरे प्रकाश बंदूक,गोली से अपना हक़ लेकर रहेंगे कहने वाले नक्सलियों को ऐसे दर्दनाक ढंग से फिल्माते हैं कि दिल्ली की मेट्रो में घुमने वाला युवा भी सोचने पर मजबूर हो जाएं-क्या इन लोगों के साथ जो हुआ या हो रहा हैं वो सही हैं.?महिला काँमरेड(जूही)जो अपने घर की जमीन छीन जाने के कारण और उसी के चलते पिता की हत्या की रपट लिखवाने थाने जा कर एक रात के बदले रिपोर्ट लिखूंगा की घटियां और शर्मनाक बात सुन कर छत्तीसगढ़ से भाग मध्य प्रदेश जा कर नक्सल मूवमेंट से जुड़ती हैं तब तमाम संघर्ष के बाद दस साल जिंदा रहने पर 100 को खत्म कर डालने का दम भरती हैं.. दूसरी ओर इन बातों के प्रभाव से कबीर खूद से लड़ने लगता हैं.. उसकी लड़ाई किस चीज को लेकर हैं.?नक्सलियों से,पूलिस से,वो देश के खिलाफ़ हैं या देश के साथ,आखिर ये लोग ऐसा क्यूं कर रहें हैं इन चीजो से उसकी मुठभेड़ इतनी भयावह होने लगती हैं जब वो देखता हैं कि बिना किसी बातचीत के मेरी जानकारी पर नक्सली और तमाम गांव वालों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई उसका दिल उसे खूद कबीर को दोषी बताने लगता हैं.

यही से आदिल का दोस्त जो शुरूआत से ही भावुक रहा हैं वो आदिल से इन चीजो को लेकर अपना विरोध दर्ज करने लगता हैं.दोस्त आदिल से एक दोस्त की हैसियत से आखरी मुलाक़ात करते वक्त़ दो टूक कबीर कह देता हैं-गरीब को गरीब रखना,उसके अधिकारों से उसे वंछित रखना सबसे बड़ा आतंकवाद हैं.इसी सिलसिलेवार बदलाव के दौरान महिला काँमरेड जूही से भावुक रिश्ता जुड़ने के बाद जब एक दफ़ा पूलिस रेड के दौरान कबीर यह पाता हैं की जूही ने गांव के बच्चो और निर्दोष लोगों के लिए अपनी गिरफ्तारी दें दी.तब उसी समय भागते हुये अपने दो साथियों संग कबीर एक ऐसी दौड़ लगाता हैं जो शायद उसके रास्ते को बदल कर रख देने की शुरूआत होती हैं,उसके मकसद को बदलने की शुरूआत.जंगल चौकी में पेट्रोलिंग पूलिय इंस्पेकटर जूही के साथ जबर्दस्ती करता हैं और फटे कपड़ो में उसके मूंह से निकलती हर हवा के साथ यही अलफ़ाज निकलते हैं -"अपना हक़ लें कर रहेंगे" .. बाहर कबीर इंस्पेक्टर के आगे हो कर साथी जो इंस्पेक्टर पर बंदूक की नोक लगाते हैं पांच पूलिस अधिकारियों को मौत के घाट उतार कर भीतर घुस कर जूही को साथ लें जाता हैं.अगले दिन चौराहें पर पूलिस इंस्पेक्टर की लाश समेत खून से लिखा होता हैं-"तुम्हारें हर बर्बर अत्याचार का बदला इसी तरह देंगे" और कैमरा में प्रशासन व्यवस्था को लेकर फिर से सवालों का सिलसिला उठने लगता हैं.इसी दौरान कैसे राजन गिरफ्तार हुआ और आगे कैसे महांता ग्रुप के मालिक के बेटे को अगवा कर अपनी मांगे नक्सली मनवाने में काय़माब हुये..बेहद ही रोमांचक और हैरत अंगेज हैं क्योंकि जो प्रकाश झा ने जो दिखाया वो सचमुच में चक्रव्यू की भांति भीतर के अंतर्विरोधों से दर्शकों के सोचने का चक्र चालू कर चुका होता हैं.

लेखक-अंकित

संपर्क-https://www.facebook.com/ankit.mutreja.5

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Wednesday, 24 October 2012

गिर रहा पत्रकारिता का स्तर जिम्मेदार कौन

 लगता है सैफ-करीना की शादी भारत देश के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है वरना सारा मीडिया क्यों उनकी हर एक गतिविधि को पल पल दिखता, आज मीडिया पर एक बड़ा इल्जाम लगातार लगता नजारा आता है की अब वह सच्चाई और उम्दा खबरों को छोड़कर फिजूल की खबरे देखने में जुट गया है मगर जो लोग इस पत्रकारिता पर इल्जाम लगाते है पहले उन्हें खुद अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए ।
            आज का एक बड़ा दर्शक वर्ग बेहूदा कही जा सकने वाली खबरों में अपनी रूचि इस कदर दिखा रहा है की ऐसे लोगो को आसानी से मौका मिल गया है जो सनसनी के नाम पर कभी मसाले के नाम पर ऐसी खबरे छाप रहे है जिन्हें कभी पाठक देखना पसंद भी नहीं करता था 
             आज अगर भगत सिंह जैसे किसी वीर की पुण्यतिथि होती है तो लोग बमुश्किल ही जान पाते है मगर अमिताभ बच्चन के जन्मदिन के मौके पर सारा अखबार उनकी जीवनी से रंग जाता है, मगर इस सब में जितनी गलती उन लोगो की है जो ऐसी बे सर पैर की खबर छापते है उससे जादा गलती उनकी है जो ऐसी खबरे पढना चाहते है । निसंदेह ऐसी खबरे पत्रकारिता को तो कलंकित करती है बल्कि सामाज के मष्तिस्क और आत्मा पर बुरा प्रभाव डालती है ।

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Tuesday, 23 October 2012

अब फंसी कसाब से दूर नहीं

     कसाब को छुड़ाने के लिए जहाँ उसके साथी कोई भी बेशर्म कोशिश करने से बाज ना आये वही दूसरी तरह कसाब की जमानत अर्जी को होम मिनिस्ट्री ने नकार दिया है होम मिनिस्ट्री ने कसाब की जमानत अर्जी को ठुकराते हुए उसे अब राष्ट्रपती कोम रेफ़र कर दिया है जानकारो की माने तो ऐसी स्तिथि में राष्ट्रपति होम मिनिस्ट्री की ही राय पर मोहर लगा देते है और अगर ऐसा हुआ तो कसाब का ये एक और कदम फांसी की ओर बढ़ जाएगा
                                         दूसरी तरफ सोमवार शाम को मुंबई से बैंगलोर जाने वाली फ्लाइट में उस वक़्त हड़बड़ी मच गयी जब एक काल से ये सन्देश मिला की उस फ्लाइट में बम है और ये काल इस मांग के साथ आया था की कसाब को छोड़ दो अब देखने वाली बात ये होगी की भारत सरकार लम्बे समय से चले रहे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है अगर वो कसाब की दया याचिका को स्वीकार कर लेती है तो कई आसों  पर पानी फिर जाएगा और अगर साकार फंसी की सजा को बरकरार रखती है तो कई आन्खून से खुसी के आंसूं निकल जायेंगे

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Monday, 22 October 2012

छोटी सी मुलाकात यश जी के साथ

हमारे रफ़्तार लाइव के संपादक की यश जी के साथ एक छोटी सी मुलाकात 

 जब मै  यश जी से मिला तो ऐसा था उनका अंदाज़  
"जिसने खुद को पहचान लिया समझ लो वो स्टार बन गया "
दुनिया के मशहूर निर्देशक Yash Chopra  की बड़ी मशक्कत के बाद मुलाकात हुई .Yash Chopra's जी से साथ में मौजूद थे Madhur Bhandarkarऔर Dainik Jagran के सम्पादक संजय गुप्ता जी स्वास्थ उन दिनों भी कुछ ठीक नहीं था पर बोले वादा किया था इस लिए आया हु मै. मेरे लिए दो तीन मिनट के ये बहुत यादगार पल थे.

रफ़्तार लाइव की तरफ से यश जी को श्रधांजलि  .

Manish Shukla 





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अब कौन सिखाएगा सच्ची मोहब्बत : अलविदा यश जी

  फिल्मो का एक जन्मदाता"यश चोपड़ारविवार को मौत की आघोष में चला गया, साँस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें 13 तारीख को लीलावती अस्पताल में भारती कराया गया था   हमेशा अपनी फिल्मो से एक नया आयाम प्रस्तुत करने वाले और अपनी उच्च कला का प्रदर्शन करने वाले यश जी सदा ही फिल्म जगत में एक आदर्श के रूप में याद किये जायेंगे उनकी दीवार, दाग, त्रिशूल, चांदनी और वीर-जारा जैसी फिल्मे आज भी लोगो के दिलों में बसी हुई हैं 
                                         यश जी का यूँ तो फिल्मो से जुड़ना एक संयोग था क्यूंकि वे लाहौर से मुंबई इनजीनियर बनने आये थे, 1956 में बी.आर. चोपड़ा (यश जी के बड़े भाई ) एक ही रास्ता फिल्म बना रहे थे तो उन्होंने यश जी को अपना असिस्टंट बनने को कहा और वहीँ से यश जी के फ़िल्मी सफ़र की शुरुवात हो गयी।  यश जी ने जैसी फिल्मे समाज में प्रस्तुत की वे सभी एक ऐसी आदर्श के रूप में है जिन्हें आने वाली पीढ़ी देखकर ये जान सकती है की हिंदी फिल्म उद्योग के निर्माण में "यश चोपड़ा" का एक ऐसा योगदान रहा है, जैसे योगदान की कल्पना भी आने वाले समय में किसी से नही की जा सकती है
                                        हाल ही में उन्होंने अपने रिटायरमेंट की घोषणा अपनी अगली आने वाली फिल्म "जब तक है जान" के बाद की सुनिश्चित कर ही दी थी, इस फिल्म के निर्माण का काम अभी कुछ बाकि ही था मगर उससे पहले ये महान निर्देशक इस संसार को छोड़ कर चला गया  

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