Saturday, 31 August 2013

वक्त अभी बाकी हैं


चाँद को चाँदनी से मिलने मेँ 
वक्त अभी बाकी हैं..
तपती ज़मी पर बारिश की बुंद पङने मेँ
वक्त अभी बाकी हैं..

मुसाफ़िर को म़जिल का दीदार होने में
वक्त अभी बाकी है...
सदॅ मौसम में चाय की चुस्की लेने में
वक्त अभी  बाकी है...

बहोत काँल आती है 
पर एक खास़ की आने में
वक्त अभी बाकी है
इनबाक्स की भीड़ में कुछ खास़ मेसेजो में
वक्त अभी बाकी है

जिन्दगी की ङगर पे कसौटियाँ अभी बहुत है
मुश्किलों के बाद भी म़जिल की चाह बहोत हे।

वक्त की कमी अब किसके पास है
पर क्या करें
सही वक्त आने में 
वक्त अभी बाकी है।। 

कवि- संदीप रावत 

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Friday, 30 August 2013

Sucessful Satyagrah

                               


Director Prakash Jha hits the bull's eye in terms of showcasing the political cesspool and the strong need and the  current situation of eradicating the venom of Corruption. After a spate of flops like "Aarakshan" and "Chakravyuh" (the latter being a well crafted film), Jha comes up with the film that showcases the worse C's of the Contemporary India: Corruption, Capitalism and Consumerism, having shades of few real life events such as the Chauri Chaura case, Tiannemen Square Massacre, the Self Immolation events and the Anna Hazare movement including films like "Yuva" (Mani Ratnam/2004), "Rang De Basanti" (Rakeysh Mehra/2006) and "Raajneeti"(Jha/2010) . The film is quite slick, but it's few unnecessary songs and even the over duration of few scenes, that hampers the pace of the film, despite having warm and energetic moments. It has a well layered screenplay (Anjum Rajabali and Jha) which has a brilliant development in terms of an internal anger turning into a mass agitation, with an excellent character establishment and the development of characters played by Ajay Devgn, Kareena Kapoor and Arjun Rampal, loaded with great dialogues. The editing by Santosh Mandal is good and some of the moments are brilliantly edited. The cinematography by Sachin Krishn captures the best of the protests and warm moments in the film. The background music score (Salim Sulaiman) brilliantly graces the film's narration. The Sound Design work by Rakesh Ranjan and the Costume Design work by Priyanka Mundada matches well with the political scenario. In the performances, Indraneil Sengupta, Girish Sahdev , Vipin Sharma and the rest supporting cast are good and they do proper justice to their respective roles. Arjun Rampal and Amrita Rao are great and bring the best of their political rage through their performances. Kareena Kapoor Khan is good, but somewhere she continues her same melodramatic tone in her performance. Manoj Bajpayee is chilling and killing in his performance. Ajay Devgn returns with his deep intense performance and leaves a great impact with his awesome performance and "Bhaashanbaazi" too. Amitabh Bachchan is simply great and his act will make sure of making you sympathize with every moment having his presence on screen, making you smile and cry with every expression that he gives. Overall, the narration by Jha, despite the song and the over duration track in between, makes the film a must watch for every Indian and to make aware about the need and the cause depicted in the film. 
My rating would be: 4/ 5.

Review By - Yash Mishra

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Wednesday, 28 August 2013

क्यूंकि हर एक वोट जरुरी होता है |


भारत की 1,22,02,00,000 जनसंख्या मे से अधिकांश जनता को मतदान की बहुमूल्यता का आभास ही नहीं और इसी कमी की मार हम पिछ्ले कुछ वर्षों से ग़रीबी, भुखमरी और महगाई के रूप मे झेल रहे हैं। आज ज़रूरत है जनता मतदान के मोल को समझे। बचपन मे बच्चों को परीक्षा के एक एक अंक के महत्व के बारे मे बताया जाता है कि एक अंक से हम फेल भी हो सकते हैं और हम एक साल पिछड़ सकते हैं। हमारा भविष्य अंधकारमय हो सकता है। उसी तरह हमे एक एक मत की ताक़त को भी समझना होगा। हमारा एक एक मतदान हमारा भविष्य तय करेगा। याद रखिए अगर इस बार देर या लापरवाही की तो देश असुरक्षित हाथो मे होगा और इस बार हम ग़रीबी, भुखमरी और महगाई जैसी समस्याओं से नहीं लड़ेंगे या तो हम गुलाम बन जाएँगे या फिराक मे बैठा पड़ोसी दुश्मन हमे समूल नष्ट कर देगा। केवल घर मे बैठकर कराहने से कुछ नही होगा। उठिए, बाहर निकलिए, इस दर्द के मरहम की तलाश करिए। ज़िम्मेदार होकर प्रत्येक नागरिक चुनाव करे और सही चुनाव करे। वक्त आ गया है खुद का और देश का बचाव करने का। 

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Tuesday, 27 August 2013

दया नहीं इन्हें इनका हक चाहिये


हिजड़े, किन्नर, तीसरा लिंग आदि नाम तो कई मिले मगर बराबरी का मौका और अवसर अभी तक नहीं मिला | इन्हें आज भी समाज में हीन द्रिस्ती से देखा जाता है, हम आज भी इन्हें अपनाने को तैयार नहीं हैं या फिर इनकी शारीरिक कमी को हमने इनसे इनके अवसरों को छिनने का बहाना बना लिया है, इनकी पीड़ा और संवेदना कौन समझेगा क्यूंकि सरकारी कागजातों में इनकी गिनती तो होती है मगर इन्हें सिर्फ एक गिनती समझ कर ही भुला दिया जाता है |

हम इनकी बात करने से कतराते हैं आज भी हम इनको देखकर मुह फेर लेते है हम इनको अपनी खुशी में अपनी खुशी से नहीं बुलाते मगर इनकी खुशी के लिये ऊँचे से ऊँचा दाम देकर अपनी जान छुडाते हैं | महाभारत के समय से आज तक दुनिया बदली, ज़माना बदला, लोग बदले मगर नहीं बदली तो इनकी दशा और समाज में इनकी जगह, अगर आज के समय की बात करे तो हामारे देश को आजादी मिले ६६ साल हो चुके हैं पर इनके लिये समाज ६६ सालों में सिर्फ हेय, नफरत और अमानसाथ हमे जरुरत है अपनी सोंच को वीयता का साक्षी रहा है | यह हमें आशीर्वाद देकर हमारी सारी बलाएँ ले लेते है और दूसरी तरफ हम इनको बाला मान कर इनसे पीछा छुड़ाने की कोशिश करते है |


कभी नाचना गाना इनकी खुशी होती थी मगर हमने इस अब इनकी मज़बूरी बना दिया है, आज अगर हम इन्हें भीख मांगते देखते हैं तो हमे एक बार इंसान होने पर शर्मिंदगी होनी चाहिये और सच सिर्फ इतना ही नहीं मज़बूरी के चलते आज भी कई हिज्र जिस्मफरोशी के दलदल में फसने को मजबूर हैं, भूंख से लड़ते-लड़ते अब इन्होने भी मज़बूरी में अच्छे और बुराई के रास्ते में फर्क करने छोड़ दिया है और अपराधी भी बनते जा रहे है | मगर सोंचिये क्या यह जिम्मेदारी सिर्फ समाज की है या उन कुछ गैर-सरकारी संगठनों की जो इन्हें इनका हक दिलाने का काम कर रहे हैं, जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ हमे जरुरत है अपनी सोंच बदलने की जो इन्हें यह एहसास कराये की ये भी इसी समाज का  हिस्सा हैं |

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फ़िल्मी जगत में धमाल मचाने को तैयार नरेन्द्र मोदी ।


एथलीट मिल्खा सिंह के संघर्ष पर आधारित भाग मिल्खा भाग और बिजनेसमैन धीरुभाई अम्बानी के जीवन पर आधारित गुरु जैसी सफल फिल्मों के बाद अब बारी है नरेन्द्र मोदी के जीवन पर फिल्म बनने का । जी हाँ राजनीति में अपने नाम का डंका बजने के बाद अब मोदी फ़िल्मी जगत में भी धमाल मचने जा रहे है 


बॉलीवुड में चल रहे जीवनी के दौर में अब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल होने जा रहा है। फिल्मकार मितेश पटेल, मोदी से काफी प्रभावित हैं और उनपर फिल्म बनाना चाहते हैं।

मितेश पटेल ने कहा कि कॉमन मैन से मुख्यमंत्री तक पहुंचने की कहानी मेरी फिल्म में दिखाई जाएगी ये एक वृतचित्र नहीं होगा और इसमें उनके बचपन से लेकर अबतक की महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया जाएगा पटेल ने कहा, 'मोदी के संघर्ष से मैं काफी प्रभावित हूं और उनकी यात्रा को फिल्मी पर्दे पर उतारकर एक सकारात्मक संदेश देना चाहता हूं मैं उनसे मिला और फिल्म का आइडिया बताया उन्होंने ओके कह दिया इस फिल्म की शूटिंग सितंबर में शुरू होने की संभावना है इस बात की काफी संभावना है कि जाने-माने फिल्म अभिनेता परेश रावल को लीड रोल मिले। निर्माता की नजरें उन्हीं पर हैं।

नरेन्द्र मोदी के अलावा ओलंपिक कांस्य विजेता मेरीकॉम पर फिल्म बनाई जा रही है वहीं अमिताभ बच्चन, गुरूदत्त, किशोर कुमार, दारा सिंह, अजहरउद्दीन, धर्मेंद्र पर भी फिल्म बनाए जाने की चर्चा है

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Monday, 26 August 2013

विदाई





वक्त कभी ठहरता नहीं वो चलता है नदी की तरह
आज वक़्त अपना एक पड़ाव पुरा कर चुका है ... 
पुरा कर चुका है तुम्हारा बाबुल के आँगन तक का सफर
वक्त ने इस सफर में तुम्हे पिता की ऊँगलिया पकड़े देखा है
जब......
तुम पापा की 'शेहजादी' थी
ड़र से माँ के आँचल में छुपते देखा है
जब.....
तुम माँ की 'गुड़िया' थी 
आज तुम वो शेहजादी नही हो
ना ही  वो गुड़िया हो
शायद.....
बच्चे सच में बहोत जल्दी बड़े हो जाते हैं .. ..
उनकी आँखो में इक सैलाब है जो तुम्हें देख फुट रहा है
और
तुम्हें ही देख थम भी रहा है
उन आँसूऔ के आगे
तुम....
अब भी वही शेहजादी हो
तुम.....
अब भी वही गुड़िया हो ...... 

वक्त अब भी बित रहा है जैसा हर बार बितता है 
कुछ लम्हों बाद तुम अपने को बाबुल को छोड़ जाओगी 
तब.....
तुम्हारी आँखो में वो आँसू होंगे जो थे हमेशा पर बहे नही थे 

अब इक नया परिवार है तुम्हारे पास
जिसकी जिम्मेदारी मिली है तुम्हे कुछ खास.

अब तुम्हे इक गुलदस्ता बनाना है जिसके फूल तुम्हारे सामने है
इक माला बनानी है जिसके मोती तुम्हारे सामने है ... 

अब सफर बहोत लम्बा है....

आयेंगे तुफान कई इस सफर में
वो आते हे 
अक्सर आते रहेंगे...

घबराना नहीं ना कभी हार मानना
अपने बनाएँ गुलदस्ता की महक बचाएँ रखना
अपनी बनाई माला के मोतियों को अपने अड़िग विश्वास से पीरो के रखना ....


कवि- संदीप रावत 

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Sunday, 25 August 2013

पुत्र की शिकायत लेकर एसपी के पास पहुंचा किन्नर


अपने पुत्र को पीटने वालो के खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाई न होने से चुब्ध किन्नर बीरबल अपनी शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुच गया मुबारकपुर क्षेत्र के लंगड़पुर गांव निवासी धर्मी देवी पत्नी बीरबल ने आरोप लगाया है कि गुरुवार की दोपहर उसके 10 वर्षीय पुत्र परविंद को गांव के कतिपय लोगों ने बहाने से बुलाकर उसे मारापीटा। घटना की शिकायत लेकर पीड़ित पक्ष चौकी व थाने पहुंचा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

किन्नर बनने से पहले बीरबल बैंड में नाचने का काम करता था। पत्नी धर्मी के परविंद(पुत्र) को जन्म देने के बाद बीरबल का संबंध किन्नरों से हो गया। उनके साथ रहते रहते बीरबल भी किन्नर बन गया और बधाई गाकर नेग न्यौछावर मांगने का काम करने लगा। वह परिवार छोड़कर बिलरियागंज क्षेत्र में रहने लगा। उधर उसकी संपत्ति पर गांव के लोगों की नजर गड़ गई। पुत्र के साथ घर पर अकेली रह रही धर्मी को विपक्षियों द्वारा परेशान किया जाने लगा। धर्मी का आरोप है कि बुधवार को दिन में विपक्षी परविंद को बहाने से बुलाकर कमरे में बंद कर मारने-पीटने लगे। घटना की जानकारी होने पर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीरबल के पुत्र की जान बचायी गयी। सूचना पाकर घर पहुंचा बीरबल परिजनों के साथ थाने पहुंचा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गुरुवार को वह परिजनों के साथ पुलिस अधीक्षक नगर विनोद कुमार से मिलकर न्याय की गुहार लगाई।

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Saturday, 24 August 2013

बॉलीवुड का सुपरहीरो “क्रिश” पड़ा “अवेंजर्स” पर भारी



"कोई मिल गया" फिल्म की तीसरी सीरीज "क्रिश-३" दिवाली में दर्शकों के सामे सिनेमा घरों में आने वाली है मगर फिल्म से पहले फिल्म के ट्रेलर ने ही दर्शकों को खूब लुभा लिया है | "क्रिश-३" के ट्रेलर को अब तक हालीवुड की फिल्म "अवेंजर्स" से ज्यादा देखा जा चुका है जबकि फिल्म अवेंजर्स में पाँच सुपरहीरोज थे | फिल्म के ग्राफिक्स और एक्शन सीन लोगों को खासा लुभा रहे हैं, फिल्म में "हृतिक" एक सुपरहीरो के किरदार में नज़र आ रहे हैं और वही सुपरविलन के रूप में "विवेक ओबेरॉय" नज़र आयेंगे |

फिल्म की कहानी पिछली ही फिल्म के आगे की कहानी है जहाँ रोहित को कुछ विशेष शक्तियों के बारे में पाता चलता है और वो इसे दुनिया की भलाई के लिये इस्तेमाल करना चाहता है | फिल्म से कंगना रनाउत भी एक्शन करती हुई नज़र आयेंगी |


इससे पहले "शाहरुख खान" की सुपरहीरो वाली फिल्म "रा-वन" दर्शकों के सामने आयी थी जिसका प्रचार शाहरुख खान ने बहुत जोर-शोर से किया था पर ये फिल्म दर्शकों को खासा पसंद नहीं आयी थी | क्रिश बड़े परदे का अभी तक का सबसे पसंदीदा सुपरहीरो रहा है, और इसके नए ट्रेलर ने भी खूब धमाल मचाया हुआ है ऐसे में अब देखने वाली बात ये होगी कि क्रिश-३ दर्शकों को कितनी पसंद आती है |

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Friday, 23 August 2013

मिला एक भुखा इंसान



राजनीतिक हल-चल में
सत्ता का संग्राम।
वादों की बोछार।
बोझिल आशा के साथ
'मिला एक भुखा इंसान'

एक पहचान का बोझा था उसके साथ।
बेरंग सी उस जिन्दगी को होने वाला था
नीली स्याही का एहसास।
उम्मीद की उस कतार में
'मिला एक भुखा इंसान'

बुद्धिजीवियों की पअरा शासन पर अपनी बहस थी।
भष्टाचार जैसे शब्दों के परयोग की जैसे कोई कमी ना थी।
उन खामियों में उलझा
'मिला एक भुखा इंसान'

व्यस्त महिलाओं का भी तंता लगा था।
खचॉ बड़ गया ना
मँहगाई का राग आलापे समय कट रहा था।
उन खचॉ में एक रोटी का हिसाब लगाता
'मिला एक भुखा इंसान'

खादी से सामाना कुछ दिनों से बड़ गया था।
सपने वादे लिये हर कोई दृार पर खड़ा था।
कुछ अपनी भी अधूरी चाह लिये
'मिला एक भुखा इंसान'

उम्मीद,इंतजार का अनौखा मिलन था।
लोकतंत्र की उस पगडंडी पर आशा का दिपक लिए वो भी चला था।
अन्धकार में उजाले की ख्वाहिश लिये
'मिला एक भुखा इंसान'

लोकतंत्र की उस पगडंडी
पर
भीड़ बहुत थी
किरदार बहुत थे।
हर किसी में था
एक भुखा इंसान।
फकॅ सिफॅ भुख का था
'मिला एक भुखा इंसान'-2


कवि- संदीप रावत 

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Madras Cafe: A Sensible Striking and Slick Stuff


The Award winning team of the film "Vicky Donor" comes with a Big Bang with its director Shoojit Sircar coming into the same territory of terrorism in which he reveled in his 2005 debut venture "Yahaan", this time with a issue of Lankan terrorism which has been hardly touched earlier (Mani Ratnam / Kannathil Mutthamittal/ Tamil (2001) and Santosh Sivan/ The Terrorist/ Tamil (1997)), having shades of films like "Saving Private Ryan", "Kuruthipunal" (Tamil), "The Terrorist" and "Kannathil Mutthamittal". The striking feature of this film is that it doesnt leaves room for melodrama and grips you well with it's killer suspense. The film sympathizes with the Military, the Militants and even the innocent people who are caught between this strife of the establishment(s). The film's bonus points lies in its well layered screenplay (Somnath Dey and Shubendu Bhattacharya) which brilliantly shows the events , the conspiracy and corruption behind the growth of the LTTE and assassination of Rajeev Gandhi and it's editing (Chandrashekhar Prajapati) which is very slick and makes the film gripping in it's crucial moments. The cinematography by Kamaljeet Negi is simply brilliant and some of his shots like the battle scenes , the warfare and investigation scenes are indeed great. Sound Design work by Bishwadeep Chatterjee well intensifies the situations in the film and the production design work by Vinod Kumar and team deserves applause for recreating the mood of the terrorism and politics, which brings back the Mani Ratnam charm on screen and Music Score is great indeed. Siddhartha Basu as the RAW chief is riveting and great, Ajay Ratnam as the LTTE chief is chilly and brilliant, Nargis Fakhiri doesnt disappoints this time with her sensitive portrayal of a War Journalist. The supporting cast, including the LTTE terrorists are brilliant. John Abraham, carries the film brilliantly on his shoulders and this time he strikes hard as an actor with his spellbound performance and as a producer for producing this hardly touched issue based film. Overall, a Sensible Striking and Slick Stuff meant for a must watch. 
My rating would be 4/ 5 .


Review By - Yash Mishara

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Shocking yet not stopping

It seems that after the “Damini rape case”, people have more likely started gang rapes despite of the more attention provided to the security of women all over the country. But the rapists have become more stubborn and casual towards the gang rapes. Recent Mumbai gang rape case clearly shows the dare and guts of the culprits who seems to have never heard of Delhi gang rape case.

An endeavoring 23 years old photojournalist of an English magazine, covering a story on chawls, was raped by five men around 8 pmnear Shakti Mills in Lower Parel area of metropolis as if the rapists were intended to give a chilling reminder of The Delhi Gang rape held in December.

While she was shooting, the culprits were continuously asserting desperate comments and were harassing her. Apparently her male friend poked in between and two of those five ravagers tied him up before the sexual assault to the lady. Police/crime branch is working on the case on the basis of the information provided by the victim and her friend after she has been admitted to the hospital. Severe internal injuries have already crashed her body.

This was not enough when a married woman in Delhi was again raped in Uttam Nagar by three goons. The couple went to Masoorie for honeymoon where they met three betrayers who trapped them against the conspiracy of providing employment to them. All were in contact after returning back to Delhi and on one unfortunate day they called both of them to Dwarika Mod tangling the husband for a job opportunity. They dropped the husband to the office lying to him that his interview has been lined up after which they raped the wife and thrown both of them to the Nawada are.

The couple reported to police and so the two of the three has been arrested while the third one is still not found. No matter the rapists will be arrested and punished, the fresh injuries they have given to the woman will remind her off the rape all over her life. The ratio has never come down after such big Delhi Rape case, infact it seems that gangsters have got more guts to spoil somebody’s life so effortlessly.

Rapes are increasing at an alarming rate and nobody can deny the fact that this democratic country, will touch the high sky of unspeakable violence, ignoring the other issues like population and corruption.. ONE DAY.

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Thursday, 22 August 2013

फिर विवादों में “आसाराम”

आसाराम बापू और विवादों का तो चोली दामन का साथ रहा है पर इस बार आसाराम पर जो आरोप लगे हैं वो काफी संगीन है | आसाराम पर इस बार एक नाबालिग लड़की के साथ रेप करने का आरोप लगा है, बालिका ने आसाराम पर ये इल्जाम लगाया है की उसे रोग से मुक्ति दिलाने के बहाने आसाराम उसे एक खाली कमरे में ले गया और उसके साथ बलात्कार जैसी घिनौनी हरकत को अंज़ाम दिया | जांच में इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि बालिका के साथ बलात्कार हुआ है, अब आसाराम को शक के बिनाह पर गिरफ्तार किया जा सकता है |

इससे कुछ साल पहले भी आसाराम के आश्रम में बली देने का मामला सामने आया था जिस पर खूब जमकर बवाल हुआ था | उसके बाद दिल्ली के दामिनी रेप केस पर भी आसाराम ने आपत्तिजनक बयान दिया था उन्होंने कहा था अगर “दामिनी ने दीक्षा ली होती और रेप होने के समय अपराधियों के सामने गिडगिडाकर उनमे से किसी को भाई बनाकर सौगंध दी होती तो उसके साथ ये हादसा न हुआ होता और हाल ही में कुछ महीनो पहले जब महाराष्ट्र सूखे कि समस्या से जूझ रहा था तब आसाराम ने भक्तों के साथ आस्था के नाम पर होली खेली थी जिसमे उन्होंने कई लीटर पानी बर्बाद किया था जिसका विरोध होने पर उन्होंने सार्वजनिक प्रवचन न करने कि धमकी भी दी थी |


 बहराल बलात्कार के इस आरोप का सच कुछ भी हो पर इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता की समय-समय पर आसाराम ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया वो संत की भाषा तो अवश्य हो ही नहीं सकती, दूसरी तरफ भारत में जहाँ संतो को भगवान के समतुल्य आदर दिया जाता है वहाँ इस तरह की घटनायें भक्तों को अवश्य ही आहात करती है |

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Tuesday, 20 August 2013

एक मौत ही साम्यवादी है



सुनता था कहीं कोई चटकन सुनायी तो नहीं देती
कलियों के फूल बनने की प्रक्रिया में
इन्द्रधनुष की खबर
गाँव भर में देता फिरता सबसे पहले
पैरों के तलवे को छूने वाली
एक-एक ओस की बूंद को वह पहचानता था
बसंत में वह ऐसे झूमता जैसे
गुलमोहर और पलास उसी के लिये रंग बिखेरने आये हों

अगर अपनी धुन में जीता
तो वह कवि होता
लेकिन फांकाकशी में
चाँद भी रोटी दिखता है

कब तक सौन्दर्यबोध में जीता
और दवाईयों के लिए
लोगों के सामने हाथ फैलाता

भूख की लड़ाई में
एक के बाद एक
सबने अलविदा कहा  
पिता, बड़ा भाई, माँ और चाचा
और वह जान पाया कि
हर काली रात एक
सुर्ख सुबह पर जा कर ख़त्म होती है
जहाँ सब के हिस्से में एक बराबर आती है मौत
इस क्रूर व्यवस्था में
एक मौत ही साम्यवादी है

उसने जो पहली कविता लिखी
वह कविता नहीं, सुलगते कुछ सवाल थे
या कहें चंद सवालात की पूरी कविता

कि आखिर वह कौन है जो
समाजवादी तरीकों से मौत तय करता है
और जिंदगी बाँटते समय पूंजीवादी हो जाता है ?

वह कौन सा फार्मूला है कि
जिन मुश्किल दिनों में बामुश्किल
मेरे घर में कफ़न खरीद कर लाये जाते हैं
उसी दौर में पडोसी के घर
चर्बी घटाने की मशीनें आती है ?

कवि - सुशील कुमार 

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Transformation- Journey from cell phone to smartphone

You must be aware of a word called cell phone well there is no such thing exist in this world right now .As we all know smart phones are ruling the market. It may be of any shape and size the company may be different but the product is almost same . Smartphones are not part of life rather they are a world in itself. Technology is updating day by day and smartphonesare gift of present day technology. In old days there were only few platforms like java,  bada,  siemens but now updation has moved to next level android,  BlackBerry,  ios lion are capturing the world market. 


"Change is the rule of nature " and positive changes are occuring in the field of smartphones every day . In old days there was a single digital camera with no flash but now companies are offering dual camer with dual led flash and tremendous lens and zoom quality. Grambell was the inventor of the phone but companies have moulded it into a useful gadget which is not only limited to calls . Well if there are roses there must be some thornes . Smartphoneshave made us dependent and slave of technology. We are active on social networking but not active socially. We have seen its journey from cellphone to smartphone and now we will witness its progress.

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Sunday, 18 August 2013

कंवल भारती पर अब धारा 66 A


साहित्यकार कंवल भारती पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने धारा 66 A के तहत आईटी एक्ट भी लगा दी है, आपको बताते चले की आईएएस दुर्गाशक्ति निलंबन मामले में फेसबुक पर पर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ कमेंट करने पर प्रदेश के मंत्री आज़म खान के मीडिया प्रभारी की शिकायत पर कंवल के खिलाफ पुलिस ने 5 अगस्त को धारा 153A और धारा 295A के तहत मुकदमा दर्ज करा था , मामले की जाँच कर रही क्राइम ब्रांच की इन्वेस्टीगेशन सेल के इंस्पेक्टर ने बताया की जाँच के दौरान भारती को धारा 66A का भी दोषी पाया गया है और उन पर यह धारा बढ़ा दी गयी है |    

उधर सुप्रीम कोर्ट ने भारती की गिरफ्तारी पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है| श्रेया सिंघल ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर राज्य सरकार से भारती की गिरफ्तारी की परिस्थिति पूछने की मांग की है | न्यायमूर्ति एचएल गोखले की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी कर यूपी सरकार से जवाब माँगा है | इसके अलावा श्रेया ने मांग की है जब तक कोर्ट धारा 66A की वैधानिकता को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर फैसला नहीं आ जाता तब तक इस धारा के तहत किसी पर दंडात्मक कार्यवाई न हो | 

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Saturday, 17 August 2013

“असीम त्रिवेदी” का मिशन “आक्युपाई पोलिंग बूथ्स”


“बिग बॉस-६” के प्रतिभागी और एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में आपसे परिचित “असीम त्रिवेदी” लंबे समय बाद एक नयी सोंच,उम्मीद और मुद्दे के साथ आपके सामने आये हैं | वोट देने के महत्व से तो हम सभी वाकिफ हैं पर क्या कुछ मुट्ठी भर लोग ही अगर वोट देने के अधिकार के महत्व को समझें तो ये काफी होगा, बिल्कुल नहीं | इसी लिये ये आवश्यक है की जो लोग इस अधिकार का सही इस्तेमाल नहीं कर रहे या फिर जो इसका महत्व नहीं समझ रहे उन्हें हम इसके प्रति जागरूक करें |

असीम त्रिवेदी  आक्युपाई पोलिंग बूथ्स” नाम से एक नया अभियान शुरू कर रहे हैं. जिसमें वो  विभिन्न शहरों में पहुचकर चुनावी जागरूकता के लिए अवेयरनेस कैम्प आयोजित करेंगे और कला को हथियार बनाकर चुनावी जागरूकता की ये लड़ाई आगे बढायेंगे, जिसमे वो वोटिंग परसेंटेज बढाने से लेकर चुनावों में धर्म, जाति की भूमिका को निरुत्साहित करने तक चुनावी जागरूकता से जुड़े सारे बिंदुओं पर काम  करेंगे | असीम का मानना हैं कि आज़ादी अधूरी है एक मजबूत लोकतंत्र के बिना, और लोकतंत्र अधूरा है जनता की भागीदारी के बिना. इसलिए, वो आने वाले चुनाव में जन भागीदारी बढाने के लिए एक नया कैम्पेन शुरू करने जा रहे हैं |

बेशक असीम की ये पहेल बेहद सराहनीय है पर असीम बिना आप के और जनता के समर्थन के इस काम को बखूबी अंजाम नहीं दे सकते है इसलिए असीम की सहायता के लिये बढ़ चढ़ कर आगे आये और देश को एक नयी और सकारात्मक दिशा देने में असीम का सहयोग करें | 

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अफगानिस्तान में मिला महाभारतकालीन विमान ।


अफगानिस्तान में एक 5000 साल पुराना विमान मिला है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह महाभारतकालीन हो सकता है।यह विमान अफ‍गानिस्तान की एक गुफा में पाया गया है। यह विमान महाभारत काल का है और इसके आकार-प्रकार का विवरण महाभारत और अन्य प्राचीन ग्रंथों में‍ किया गया है।वायर्ड डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि यह महाभारतकालीन प्राचीन उड़न खटोले है। कहा जाता है कि यह विमान एक टाइम वेल में फंसा हुआ है ।टाइम वेल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक शॉकवेव्‍स से सुरक्षित क्षेत्र होता है और इस कारण से इस विमान के पास जाने की चेष्टा करने वाला कोई भी व्यक्ति इसके प्रभाव के कारण गायब या अदृश्य हो जाता है। इस कारण से इसे गुफा से निकालने की कोशिश करने वाले कई सील कमांडो गायब हो गए हैं या फिर मारे गए हैं।

रूसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस विमान में चार मजबूत पहिए लगे हुए हैं और यह प्रज्जवलन हथियारों से सुसज्जित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टाइम वेल सर्पिलाकार में आकाशगंगा की तरह होता है और इसके सम्पर्क में आते ही सभी जीवित प्राणियों का अस्तित्व इस तरह समाप्त हो जाता है मानो कि वे मौके पर मौजूद ही नहीं रहे हों। अमेरिकी सेना के वैज्ञानिकों का भी कहना है कि जब सेना के कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तभी इसका टाइम वेल सक्रिय हो गया और इसके सक्रिय होते ही आठ सील कमांडो गायब हैं।

एसवीआर रिपोर्ट का कहना है कि यह क्षेत्र 5 अगस्त को यह क्षेत्र पुनः सक्रिय हो गया था जिसके परिणामस्वरूप 40 सिपाही और प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड डॉग्स इसकी चपेट में आ गए थे। संस्कृत भाषा में विमान केवल उड़ने वाला वाहन ही नहीं होता है वरन इसके कई अर्थ हो सकते हैं, यह किसी मंदिर या महल के आकार में भी हो सकता है।


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Thursday, 15 August 2013

सौ करोड़ का क्लब फ़ालतू फिल्मों का फ्लड



पैसे कमाने की होड़ में यथार्थ और सामाजिक के कई परिपेक्षों को दिखाने का काम करने वाला सिनेमा आज एक व्यवसाय की तरह हमसे रूबरू हो रहा है जिसका पहला मकसद आज कि तारीख में सौ करोड़ का आकड़ा पार करना हो गया है, जिसके लिये वो किसी भी तरह का बेहूदा मसाला परोसने से भी नहीं कतरा रहा है |

फ़िल्में हमेशा से ही समाज का आईना या प्रेरक श्रोत रही हैं पर बीते कुछ समय से कुछ कलाकार अपने नाम और छवि का सहारा लेकर समाज के समक्ष मनोरंजन के नाम पर केवल बेहूदा सिनेमा परोस रहे हैं | हालिया दिनों में कुछ फिल्मे आयीं जिन्होंने दर्शकों कि जेबें तो खूब खाली करायीं पर क्रिटिक्स ने उनके खिलाफ खूब ज़हर भी उगला और बताया की किस तरह ऐसी फिल्मे भारतीय सिनेमा का स्तर गिराने में लगी हुई हैं |


भारतीय सिनेमा के निर्माताओं और ऐसे कलाकारों जो कि बिना यथार्थ की फिल्मों से जुड़ते हैं उन्हें सोचना होगा की हम सिनेमा को किस रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं वरना आने वाले समय में एक ऐसा दौर आएगा कि लोग पैसे को प्राथमिकता देने की होड़ में यथार्थपरक सिनेमा से जुडना ही छोड़ देंगे |

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काहे की ये आजादी जब पैंरो मेँ पड़ी जंजीरेँ ||


    भारत माँ की शान मिट गयी, मिट गयी अमर कहानी लुटी खड़ी है भारत माता आँख से बहता पानी, वेद गीता का ग्यान मिट गया रामायण है रूठी, हिन्दुस्तान मेँ हिन्दु बोले हिन्दी टूटी-फूटी,
    कोई धनुर्धर नहीँ यहाँ अब कोई नहीँ चक्रधारी लूटपाट की महामारी है, हैँ सब भ्रष्टाचारी, रिश्ते हैँ सब मरणासन से भाई-भाई को मारे राम लखन अब कोई नहीँ है दुःशाशन भए सारे, मेरे स्वपन के भारत का ये कैसा निर्माण हुआ, भगत सिँह की कुर्बानी का ना सपना साकार हुआ,
    संस्कार कब्रोँ मेँ गड़ गए, दिलोँ मेँ नफरत बोले, मैँ हिन्दु तू मुस्लिम है दिल-दिल मेँ नफरत घोले, यहाँ का राजा कठपुतली सा देखो नाच दिखाए, और सब संसद मेँ खुशी के मारे ताली ठोक के आए,
    जी चाहे भारत मेँ अब फिर त्रेता युग आ जाए, राजा हो फिर कोई पुरुषोत्तम जन-जन मेँ राम समा जाए
    काहे की ये आजादी जब पैंरो मेँ पड़ी जंजीरेँ आज के दिन ही क्योँ फोड़े हम आजादी के मंजीरे नहीँ पलटी जो कब्र यहाँ फिर, उदय न फिर संस्कार होगा देख लेना सिर्फ शैया होँगी, लहू-लहू संसार होगा ||

    कवयित्री - स्वाती गुप्ता

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Tuesday, 13 August 2013

और कितना इन्तजार किया जाए सुधरने का

भारत एक लंबे अर्से से रिश्ते सुधारने के नाम पर पाकिस्तान से नरमी बरत रहा है, पर पाकिस्तान ने फिर वही किया जो वह हमेशा से करता आया है। जम्मू के पुंछ सेक्टर में पांच भारतीय सैनिकों की हत्या ने भारत का भरोसा तोड़ने के साथ ही पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने के प्रयासों को तगड़ा झटका दिया है। इसके पहले इसी वर्ष जनवरी में नियंत्रण रेखा पर दो भारतीय सैनिकों के साथ पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का मामला सामने आया था। तब पाकिस्तानी सैनिक एक भारतीय सैनिक का सिर काटकर विजय प्रतीक के रूप में अपने साथ ले गए थे। लेकिन न तो इस नरमी का कोई नतीजा निकला और न ही बातचीत का, इसका एक कारण पाकिस्तान में निर्वाचित सरकार पर सेना का हावी होना है। पूरा विश्व इससे परिचित है कि पाकिस्तान की निर्वाचित सरकार किस तरह सेना के साये में काम करती है। 

भारत हमेशा से ही अथक प्रयास करता रहा है की उसके और पकिस्तान के बिच मैत्री संबंध बने और उन्हें प्रबलता भी मिले, कुछ लोग इसे भारत का बड़प्पन कह सकते हैं, लेकिन सच यह है कि यह कूटनीति के सामान्य सिद्धांतों के भी खिलाफ है। नि:संदेह युद्ध कोई विकल्प नहीं है और उसके बारे में सोचा भी नहीं जाना चाहिए, लेकिन इसका कोई अर्थ नहीं कि भारत पाकिस्तान को कोई सख्त संदेश देने से भी परहेज करे और किसी भी कार्यवाही से किनारा करे |

मनमोहन सिंह हमेशा से कहते आये हैं कि उनकी प्राथमिकता अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत का महत्व बढ़ाना है पर क्या वो इस कार्य में कामयाब होते नज़र आ रहे हैं क्यूंकि पाकिस्तान के साथ-साथ चीन भी भारत को लगातार आंखें दिखाता रहता है और अब तो ऐसा लगता है कि पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत को घेरना चाहते हैं और इन सब के चलते तो भारत कि छवि एक कमजोर राष्ट्र के रूप में सबके सामने आ रही है |


 इस तरह भारत कि कूटनीति पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगता नज़र आ रहा है और भारत के पास अब और समय नहीं है कि वो अपने पडोसी राष्ट्रों से मैत्री संबंधो को प्रगाड़ करने कि आस में अपने जवानो कि बलि चढ़ाता रहे |

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Sunday, 11 August 2013

जीवन के कठिन पथ पर


जीवन के कठिन पथ पर, हर उम्मीद एक मोड़ है

उम्मीद जीने का सहारा है, जिंदगी का निचोड़ है

उम्मीद आसमान को छूने की, उम्मीद असंभव को संभव करने की

उम्मीद का इंसान से रिश्ता बेजोड़ है

उम्मीद एक एहसास हर जिंदगी का तोड़ है

जीवन के कठिन पथ पर हर उम्मीद एक मोड़ है


कवियत्री- जाग्रति पांडे 

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