Wednesday, 30 January 2013

इराक में दरिंदगी की दास्तान


इराक में 2003 से 2008 तक तैनात ब्रिटेन के सैनिकों ने बर्बरता की हदें पार कीं. मनावाधिकारों के लिए लड़ते वकील अब इन मामलों को सामने ला रहे हैं. 1,000 से ज्यादा बयानों के आधार पर कहा जा रहा है कि वहां यातनाएं तयशुदा थीं.
ब्रिटेन की फौज ने इराक युद्ध में जेल में बंद कैदियों से बेहद अमानवीय व्यवहार किया. छह साल तक ब्रिटेन के फौजियों ने कैदियों को जैसी यातनाएं दीं, उनकी वजह से अब ब्रिटेन सरकार को सवालों का सामना करना पड़ रहा है. ब्रिटेन के वकील फिल शिनर लंदन हाई कोर्ट के सामने 180 लोग बयान पेश कर रहे हैं. ये बयान शिनर और जनहित में काम करने वाली वकीलों की टीम ने जुटाए हैं. बयान उन कैदियों के हैं जो 2003 से 2008 तक ब्रिटिश सैनिकों के नियंत्रण में रही इराकी जेलों में बंद थे.
बयानों की संख्या और उनमें दर्ज बातें चौंकाने वाली हैं. शिनर के मुताबिक अभी 827 बयान आने बाकी हैं. खालिद नाम के एक व्यक्ति का बयान है, "एक ब्रिटिश सैनिक ने फिर मेरे लिंग को पकड़ लिया और उसे खींचते हुए मुझे जमीन पर घसीटने लगा. मुझे नंगा रखते हुए उसने मुझसे उठक बैठक कराई और मेर गुप्तांग में अंगुली डाल दी. मैं इसका हिस्सा बनने के बजाए मरना ज्यादा पसंद करता."
हलीम नाम के एक पूर्व कैदी ने कहा, एक जवान ने "मेरी पतलून की बेल्ट उतारी और कहा अब जिग्गी जिग्गी. फिर जवान ने मेरे सीने पर बूट रखा और मेरी पतलून उतार दी."
करीब दो दर्जन ऐसे बयान हैं जिनसे पता चलता है कि कैदियों के साथ अमानवीय और असंवेदनशील व्यवहार किया गया. कई बार तो हिरासत में रखे कैदियों को धमकी दी गई कि उनकी महिला रिश्तेदारों से बलात्कार किया जाएगा. कैदियों को लगातार पीटा जाता रहा. उनके धर्म का अपमान किया जाता रहा.

प्राप्त न्यूज़ UNI के हवाले से 

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Tuesday, 29 January 2013

शाहरुख को निशाना बनाकर प्रमुख मुद्दे से भटकाना चाहता है



न दिनों शाहरुख खान के नाम पर उठे विवाद को लगातार तूल दिया जा रहा है और लोग इस खबर को मज़े से पढ़ और देख रहे हैं क्यूंकि ये खबर उनके लिये शाहरुख और पकिस्तान से सम्बन्ध रखती है जो दोनों ही भारतीयों के लिये महत्व रखते हैं और क्यों न रखे जहाँ एक तरफ उस देश कि बात है जिसने समय-समय पर भारत को धोखा देकर ये साबित किया है कि वो भारत का सबसे बड़ा दुश्मन है और दूसरी तरफ वो सुपरस्टार है जो भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया भर कि जनता के दिलों पर राज़ करता है | मगर हमें हमेशा ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि पकिस्तान ने कुछ ही दिनों पहले सीमा पर एक जघन्य कुकृत्य को अंजाम दिया था जिसकी वजह से दोनों देशो के बीच तनातनी काफी बढ़ गयी थी और हालात तो ऐसे हो गए थे जिनमे पकिस्तान ने हमलों कि जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया था क्यूंकि वो भारतीय जरनल कि बातो से समझ गया था कि अब अगर उसने कोई भी उल्टा-सीधा काम करके दोबारा भारतीयों को आहात करने कि कोशिश कि तो उनके लिये अच्छा नहीं होगा |
पकिस्तान समय-समय पर भारत के अंदरूनी मामलो में दखल देता रहा है मगर इस बार उसने शाहरुख खान को अपना निशाना विशेष मकसद के तहत बनाया था, पकिस्तान ये जानता है कि शाहरुख खान भारतीयों के पसंदीदा कलाकारों में से एक है और उनपर टिप्पड़ी करने पर सभी का ध्यान उनकी ओर आसानी से खीचा जा सकता है जिसकी वजह से लोग सीमा पर हुए विवाद को हाल-फिलहाल दरकिनार कर ही देंगे और सीमा विवाद मुद्दा ठंडा पड़ जायेगा |
गौरतलब है कि सीमा विवाद के बाद फ्लैग मीटिंग में जरनल विक्रम सिंह ने पकिस्तान को सख्त हिदायत दी थी दूसरी तरफ शहीद हेमराज कि पत्नी द्वारा किये गए अनशन कि वजह से भी लोग इस मूद्दे से जुड़ने लगे थे तो कही-न-कही इन सब परिस्थितियों को देखते हुए पकिस्तान ने ये गहरी चाल चल कर देश और देश कि जनता का ध्यान इस मुद्दे से हटाने कि कोशिश की है |

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गणतंत्र का अर्थ संसद और सरकार



जब हम 'युवा कहते हैं तो हमें टीवी पर चमकते कुछ अभिनेता और जबरन युवा घोषित किये जाते हुए नेता ही नही .अपने आसपास के तरह -तरह के छात्रों -नौजवानों के चेहरे भी याद आते हैं मौजूदा गणतंत्र दिवस के संदर्भ में जब हम युवाओं की बात कर रहे है तो इसकी प्रष्ठभूमि में हुए सामूहिक बलात्कार के खिलाफ सडकों पर उतर पड़े युवाओं के सैलाब का द्रश्य है ,जिसने इंडिया गेट से रायसीना की पहाड़ियों तक को अपनी जद में ले लिया था|लाठियों और आसूं गैस के गोलों के बीच अपना नया गणतंत्र रचने की आकांक्षा नयी पीढ़ी के इस उभार में दिखाई पड़ी |
हकीकत में शासकों ने गणतंत्र शब्द के अर्थ को बहुत संकुचित कर दिया है उनके लेखे गणतंत्र का अर्थ सिर्फ संसद और सरकार है |बाकी सब भीड़ तंत्र है संविधान और संसद की दुहाई देकर सरकारें मूलतः कारपोरेट की रक्षा करती है पिछले दो दशकों में कारपोरेट घरानों पर जितने लाख  करोंड़ों का टैक्स माफ़ किया गया है उसी से साफ़  है की सरकार ने संसद और संविधान को कारपोरेट की सेवा में अर्पित कर दिया है  |आर्थिक विकास के नाम पर महंगाई बढाने को और कारपोरेट द्वारा प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ उठे आंदोलनों का दमन करने को सरकार गणतंत्र के लिए जरुरी बताती रही है |गणतंत्र की इस व्याख्या ने बहुत बड़े भ्रष्टाचार को जन्म दिया है |२ जी ,कोयला .केजी बेसिन जैसे न जाने कितने घोटाले हुए हैं जिनके छींटे भ्रष्ट सरकार के ईमानदार प्रधानमंत्री पर भी लगे इसके बरक्स पिछले दिनों युवा आन्दोलन ने गणतंत्र और संविधान का विस्तार किया है |यह किसी भी देश के लिए अच्छा और उसके जनविरोधी शासकों के लिए बुरा संकेत है इन आंदोलनों  ने अलग -अलग मुद्दों पर चलने वाले संघर्षो के बीच के बेहतर संवाद की गुंजाइश भी पैदा की है |परमाणु विरोधी संयंत्र आन्दोलन ,जंगल -जमीन बचाने के आन्दोलन ,इन्टरनेट आज़ादी बचाने के आन्दोलन ,राज्य दमन के विरुद्ध आन्दोलन ,सामाजिक न्याय आन्दोलन इन सबने गणतंत्र में अलग भूचाल लाने की कोशिश की है |
जिस पीढ़ी को पिज्जा -बर्गर जेनरेशन के बतौर जाना जा  रहा था ,उसके ऐसे विद्रोही रुख की कोई व्याख्या राजनितिक पंडितों के पास नही है |साम्प्रदायिक और पारिवारिक रियासत वाद के खिलाफ एक न्यायपूर्ण ,समतावादी समाज बनाने के सूत्र मौजूदा युवा पीढ़ी के बीच बिखरे हुए है बड़े सामाजिक बदलाव की आकांक्षा वाली विचारधाराएँ इन्हें संगठित रूप देने में लगी हैं भगत सिंह के सपनों का गणतंत्र बनाने के काम में हिस्सेदारी के लिए सभी स्वागत है |

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Sunday, 27 January 2013

NAC मेंबर्स ने की थी कसाब को बचाने की कोशिश


सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली नैशनल अडवाइजरी काउंसिल (NAC) के दो मेंबर्स ने मुंबई हमलों के गुनहगार अजमल आमिर कसाब को बचाने की कोशिश की थी। इस बात का खुलासा जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने किया है। आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के हवाले से उन्होंने बताया कि कसाब की फांसी माफ करने के लिए जिन 203 लोगों ने राष्ट्रपति के पास अर्जी भेजी थी, उनमें NAC के दो मेंबर्स भी थे।  इंग्लिश न्यूज पेपर द पायनियर की खबर के मुताबिक आरटीआई से साफ हुआ है कि NAC की मौजूदा मेंबर अरुणा रॉय और पूर्व मेंबर हर्ष मंदर उन काई सारे पत्रकारों और सोशल ऐक्टिविस्टों में शामिल हैं, जिन्होंने कसाब की फांसी की सजा माफ करने की मांग की थी। सोशल ऐक्टिविस्ट निखिल डे भी कसाब की फांसी की सजा माफ करने की अपील करने वालों में से एक थे, मगर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इन सभी अर्जियों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद बीते साल 21 नवंबर को कसाब को फांसी दे दी गई थी।  शुक्रवार को जनता पार्टी प्रेजिडेंट सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया कि उनकी पार्टी के एक मेंबर ने इस बारे में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी। उन्होंने मीडिया को आरटीआई के तहत मिले लेटर की कॉपी देते हुए कहा, 'जिन लोगों ने एक आतंकी की सजा माफ करने की मांग की, वही लोग NAC में बैठकर देश का भविष्य तय कर रहे हैं।'

साभार- नवभारत टाइम्स 

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रियललिस्टिक किरदारों के लिये बेहतरीन हैं “मनोज बाजपाई”



मनोज बाजपाई जो कि हमेशा से ही अपने द्वारा निभाये गए अलग तरह के किरदारों की वजह से जाने जाते हैं उन्होंने खुद को रियल किरदारों के लिये भी खुद को परफेक्ट साबित किया है,                               सत्या, शूल और घात जैसी शुरुवाती फिल्मो से ही मनोज ने ये साबित कर दिया था कि वो एक ऐसे अभिनेता के रूप में जाने जायेंगे जो अपने बेहतरीन अभिनय के जरिये बॉलीवुड को एक अलग मकाम देने का प्रयास करेंगे |
हाल ही आयी उनकी फिल्म चक्रव्यूह, गैंग्स ऑफ वासेपुर से उन्होंने ये साबित कर दिया कि वो रियललिस्टिक किरदारों के लिये एक बेहतरीन विकल्प हैं जो उन किरदारों को निभा ही नहीं सकते बल्कि परदे पर जीवंत भी बना सकते हैं और अपने इसी तरह के किरदारों को निभाते हुए वो लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं और इसी तरह के एक रियल किरदार को निभाते हुए वो अपनी आने वाली फिल्म स्पेशल-26 और शूटऑउट एट वडाला में दिखाई देंगे |
मनोज बाजपेयी उन चुनिंदा अभिनेतओं में से हैं जो अभिनय को बारीकी से समझते और हर किरदार के साथ इन्साफ करना भी जानते हैं जो विशेषता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग करती है 

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Saturday, 26 January 2013

सभी पाठकों को रफ़्तार लाइव की तरफ से गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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आज गणतंत्र दिवस की सुबह के साथ हमें हमारे स्कूल के दिन याद आ गए। मन हुआ कि चलो विध्यार्थी नहीं रहे तो क्या हुआ लेकिन विद्यालय पहुंचकर देश के इस महान पर्व की क्रियाओं में शामिल तो हुआ ही जा सकता है। मै बिना मन मारे अपने विद्यालय पहुँच गई और वहां हमेशा की तरह झंडा रोहण किया गया और तिरंगे के लहरने के साथ ही हर भारतवासी की तरह मेरा सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया, पर अचानक उसी पल देश की वो तमाम तस्वीरें एक-एक करके आँखों के सामने आती चली गई। मैंने उँगली फैलाकर गिनना शुरू किया 2 जी घोटाला, CWG घोटाला, NHRM घोटाला, कोयला घोटाला, नरेगा घोटाला ,आदर्श घोटाला,बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज घोटाला और धीरे धीरे उँगली के अंको की संख्या ख़त्म हो गई पर लिस्ट अभी भी बाकी थी। अन्दर की आत्मा, फैले सीने के साथ ही सिमटने लगी, विचारों के भवर चिल्ला चिल्लाकर ये सवाल करने लगे कि कही नैतिक मूल्यों को सिखाते-सिखाते, हम खुद तो इन्हें नहीं भूल गए। आखिर गर्व किस पर किया जाये और क्यों?
 उस भारत पर गर्व क्यों किया जाए जहाँ इतनी प्रगति के बाद भी हम जात-पात की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। उस भारत पर गर्व क्यों किया जाए जहाँ आज भी जन्म लेने से पहले ही लडकियों का जीवन या तो ख़त्म कर दिया जाता है या ता उम्र वो बोझ के साथ पाली जाती हैं। उस भारत पर गर्व क्यों किया जाए जहाँ आज भी बचपन चौराहों पर भीख माँगता रहता है और मानवता की मिशाल कहे जाने वाले हम जैसे लोग ही उन्हें दुत्कारते नज़र आते हैं। उस भारत पर गर्व क्यों किया जाए जहाँ हजारों महिलाओं की आबरू रोज तार-तार की जाती है। उस भारत पर गर्व क्यों किया जाए जहाँ इन्साफ और आजादी के नाम पर उठने वाले हर एक बड़े आन्दोलन कागज़ के पन्नों पर सिमट कर रह जाते हैं। उस भारत पर गर्व क्यों किया जाए जहाँ अपनी आज़ादी पर उठने वाली हर एक आवाज़ को उठने से पहले ही शांत कर दिया जाता है।
भारत का हर व्यक्ति इस बात से वाखिफ हो जाए कि उसके समाज में जात-पात, छुआ-छूत, भ्रूण-हत्या, बलात्कार जैसी न जाने कितनी जहरीली बीमारियाँ फैली है जो कैन्सर से भी ज्यादा खतरनाक है,जिससे वो लगातार केवल पतन की दुनिया की तरफ बढ़ रहा है। मजबूर कर दिया इन सब बुराइयों ने मुझे आज के दिन भी शर्म से अपना सर झुक लेने को।  और तो और देश के राजनीतिक हालात तो और भी दुर्दश स्थिति में है। जनता अलग भाग रही है सरकार अलग भाग रही किसी में भी किसी प्रकार का समन्वय नहीं दिख रहा । समाज के इस खोखलेपन का फायदा सीमा के लोग लगातार उठाते रहते हैं। देश को जो आजादी इतनी मुश्किलों से मिली थी वो आज़ादी मुठ्ठियों से रेत की तरह निकलती नजर आ रही है, सच तो ये है कि गणतंत्र की जो ख़ुशी हर भारतवासी को महसूस करनी चाहिए वो आज नजर नहीं आई। मै देश सुधारने का ठेका नहीं लूंगी क्योंकि मेरा मानना है कि अगर हर व्यक्ति अपने को सुधारने का ठेका ले ले, तो अपने आप हालात सुधर जायेंगे और इसीलिए आज केवल मै अपने बदलाव का ठेका लूंगी।
जय हिन्द 
जय भारत 
                                                                                                                 
                                                                      लेखक-स्वाती गुप्ता 

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Friday, 25 January 2013

सहमी-सहमी जिंदगियां जीने को मजबूर महिलाये



दिल्ली में १६ दिसम्बर को हुए कुकृत्य के बाद बहुत से मामले आये, एक तरफ तो ये एक अच्छा संकेत कि जो मामले किसी दबाव या संकोच कि वजह से सामने नहीं आ पाते थे वो अब खुल कर लोगो के सामने आने कि हिम्मत तो कर पाते हैं, मगर दूसरी ही तरफ ये बात भी जगजाहिर करता है कि सामाज में कितने वैह्शी दरिंदे हैं जिनकी वजह से महिलाए आज असुरक्षित हैं | वही सरकार कि कोई भी कोशिश इस लायक नहीं कि वो महिलाओ को इस बात का आश्वाशन दे सके कि वो सुरक्षित है, इसके विपरीत दिल्ली में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जिनमे लड़कियों के साथ गैंग हो रहा है |
माहौल तो ऐसा बनता जा रहा है कि ऑफिस में काम करने वाली महिलाये डर कि वजह से अँधेरा होने से पहले ही घर आ जाने का हर प्रयास कर रही हैं, ऐसे में महिलाये मजबूर हैं सिर्फ एक डरी और सहमी हुई जिन्दगी जीने को जिसमे वो खुद ही ऐसी परिस्थितियों से लड़ते हुए जीती हैं, उन्हें भले ही सरकार कि तरफ से कोई आश्वासन न मिला हो पर उन्हें इस बात का भरोसा जरुर हो चूका है कि उन्हें अपनी सुरक्षा खुद ही करनी होगी जिसमे उनकी सहायता और कोई करने वाला नहीं है और अब उनके पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं या तो वो खुद ही इसके खिलाफ खड़ी हों या फिर वो सहमी जिंदगियां जीने को तैयार हो जाएँ |

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Thursday, 24 January 2013

बर्फी का बढ़ा स्वाद



५८ वें फिल्म फेयर अवार्ड्स सन्डे रात को मुंबई में एक रंगारंग इवेंट में दिए गए |अवार्ड्स नाईट में बॉलीवुड वालों का जमावड़ा रहा ,तो प्रोग्राम के होस्ट शाहरुख खान और सैफ अली खान ने समां बांध दिया |खासकर किंग खान ने हिंदी सिनेमा के १०० साल पुरे होने पर एक खास सांग पर परफार्म किया | इसमे इन्होने सिनेमा के अलग -अलग फेज़ को याद किया |
हालाकि यह शाम आस्कर में बॉलीवुड की ऑफिशल एंट्री कर चुकी 'बर्फी'  के नाम रही ,जिसे सबसे ज्यादा अवार्ड मिले |बर्फी के कलाकारों में रणबीर कपूर को बेस्ट एक्टर ,इलियाना डीक्रूज़ को बेस्ट डेब्यू फीमेल ,प्रीतम को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर ,अनुराग को बेस्ट फिल्म अवार्ड मिले |वहीँ एक्सपेरिमेंटल मूवी 'विक्की डोनर' का भी जलवा रहा |इसके के लिए आयुष्मान खुराना को बेस्ट मेल डेब्यू एक्टर 'पानी दा रंग....'   के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर और अनु मलिक को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड मिला |इरफ़ान खान को पान सिंह तोमर के लिए बेस्ट मेल एक्टर (क्रिटिक्स चॉइस) अवार्ड दिया गया |
फिल्म 'कहानी' के लिए सुजॉय घोस को बेस्ट डायरेक्टर और विधा बालन को बेस्ट फीमेल एक्ट्रेस का आवर्ड मिला |जबकि 'जब तक हैं जान ' के लिए अनुष्का शर्मा को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस और गुलजार को 'छल्ला ' के बेस्ट लिरिक्स का फिल्म फेयर अवार्ड मिला |इसके अलावा 'इंग्लिश विंग्लिश' के डायरेक्टर को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर आवर्ड से गौरी शिंदे को नवाजा गया ,वहीँ दिवंगत यश चोपड़ा को लाइफटाइम अचीवमेंट से सम्मानित किया गया |

फिल्म फेयर अवार्ड लिस्ट ....
Best Film
Barfi!
Best Actor (Male)
Ranbir Kapoor (Barfi!)
Best Actor (Female)
Vidya Balan (Kahaani)
Best Director
Sujoy Ghosh (Kahaani)
Best Film (Critics)
Gangs Of Wasseypur
Best Actor Male (Critics)
Irrfan Khan (Paan Singh Tomar)
Best Actor Female (Critics)
Richa Chaddha (Gangs Of Wasseypur)
Best Actor In A Supporting Role (Male)
Annu Kapoor - Vicky Donor
Best Actor In A Supporting Role (Female)
Anushka Sharma - Jab Tak Hai Jaan
Best Debut (Male)
Ayushmann Khurrana
Best Debut (Female)
Ileana D'cruz
Best Debut Director
Gauri Shinde (English Vinglish)
Best Music Director
Pritam - Barfi!
Best Lyrics
Gulzar - Challa - (Jab Tak Hai Jaan)
Best Playback Singer (Male)
Ayushmann Khurrana – Pani da rang – (Vicky Donor)
Best Playback Singer (Female)
Shalmali Kholgade – Pareshaan – (Ishaqzaade)
Best Story
Juhi Chaturvedi (Vicky Donor)
Best Screenplay
Sanjay Chouhan & Tigmanshu Dhulia (Paan Singh Tomar)
Best Dialogue
Anurag Kashyap, Akhilesh Jaiswal, Sachin K Ladia & Zeishan Qadri (Gangs of Wasseypur)
Best Sound Design
Sanjay Maurya & Allwin Rego (Kahaani)
Best Production Design
Rajat Podar (Barfi!)
Best Editing
Namrata Rao (Kahaani)
Best Cinematography
Setu (Kahaani)
Best Action
Sham Kaushal (Gangs Of Wasseypur)
Best Background Score
Pritam (Barfi!)
Best Choreography
Bosco-Caesar (Aunty Ji - Ek Main Aur Ekk Tu)
R.D. Burman Award
Neeti Mohan
Best Costumes
Manoshi Nath & Rushi Sharma (Shanghai)
Sony Trendsetter of the Year
Barfi!
Lifetime Achievement Award
Yash Chopra 

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Wednesday, 23 January 2013

इस राह पर मंजिल का कोई ठिकाना नहीं


जाने अनजाने उस राह पर चल दिए हम .....
जिस राह पर मंजिल का कोई ठिकाना नहीं।

हम तैयार खड़े हैं, उनका हाथ थामने को पर.........
वो कहते हैं "उन्हें मेरा साथ निभाना नहीं"

मेरे तो आँसुओं पर भी, कसमे लगा दी उनने .......
वो कहते हैं "कसम है अब आंसू बहाना नहीं"

पर लगेंगे जो घाव दिल पर, फिर इलाज़ न होगा........
फिर देखकर ज़ख्म मेरे, तुम घबराना नहीं।

इन राहों में सनम, कहीं मिट जाये न हम ........
ये हकीकत है इस दिल की, कोई बहाना नहीं।

वो हकीकत सा लगा था, जो सपना था शायद.........
पर ये दिल है जिसे, खुद को समझाना नहीं।

नीलामी की कगार पर खड़ी है मोहब्बत हमारी ..........
तुम्हे कसम है खुदा की, बस कीमत गिराना नहीं।

Written By- Swati Gupta

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भ्रष्टाचार के खिलाफ पहली पहल



रोहिणी कोर्ट ने जूनियर बेसिक टीचर (जेबीटी) भर्ती घोटाले में मंगलवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला सहित नौ लोगो को १०-१० साल कि सजा सुने है, ये पहली बार है जब भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट ने किसी बड़े राजनेता को १० साल तक कि सजा सुनाई है कोर्ट के फैसले के बाद चौटाला समर्थकों ने परिसर में जमकर हंगामा किया |
विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने रोहिणी स्तिथ कोर्ट में ५५ लोगो को सजा सुनाई, मगर स्वास्थ खराब होने कि वज़ह से चौटाला कोर्ट में पेश नहीं हो सके, कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए चौटाला पिता-पुत्र सहित दो आईएस अधिकारीयों संजीव कुमार व विद्याधर तथा शेरसिंह बढ़शामी को घोटाले का मुख्य दोषी माना है |
कोर्ट के इस फैसले से एक उम्मीद बंधी है कि शायद इस तरह के निर्णयों से घोटाला करने वालों में कही न कही क़ानून का खौफ बढ़ेगा जिस कारण कोई भी अपराधी इस तरह का अपराध करने से पहले चौटाला पिता-पुत्र का उदाहरण अपने समक्ष पायेगा |

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Tuesday, 22 January 2013

एक मुलाकात समाज के समझदार लोगो से .......



जो अपनी निजी जीवन को सुधार नहीं पाए वो दुसरे लोगो को क्या सिखाएंगे अधिकतर उनकी सभावो में जो लोग नजर आये उनमे उनके चमचो की संख्या ज्यादा पायी गयी ...

तो चलिए चमचो की बात पहले ही कर लेते है जिन्होंने इनको समझदार कहा फालो किया .....

चमचे (पत्तेचाट) जिनकी तादाद भारत में सबसे ज्यादा है जो एक बोतल दारु ,मुर्गा पर अपने जीवन के बड़े से बड़े निर्णय बदल देते है अगर गाँव में जाए तो कुछ चमचे एक बोतल दारु के खातिर अपनी बहु बेटियों का सौदा भी कर देते हैंजो की महापाप है खैर आखिर ये चमचे ही है इनकी अपनी मजबूरियाँ है सबसे बड़ी सबसे महतव्पूर्ण उनकी आर्थिक समस्या जिनसे भारत देश की ७०% आबादी जूझ रही है खैर इन्हें समझाया ही जा सकता है की खूब मेहनत करो और इस तरह की हरकतों से दूर रहो 

मगर ये समाज सुधारक ,पंचायत के लोग व वो सभी जमीदार........

जिनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ते है कुछके तो देश के बहार भी पढने जाते है जो खुद एक अच्छी समझ रखते है उन्हें क्यों ये समझ नहीं आता की सिर्फ झूठी वावाही पर जीवन नहीं चलता सिर्फ रुपय के लिए उनका शारीरिक,मानसिक शोषण करना कितना ठीक है आप भी इंसान है अत्यंत दुःख है की आप पढ़े लिखे भी है पर कोई मानवता नहीं नैतिकता तो मर सी गयी हो जैसे और अपने ज्ञान का नकारात्मक इस्तेमाल करना अपनी साड़ी उर्जा अपने आपको बचाने में लगाना यही ख़त्म नहीं होती ये बात .....इसका प्रभाव भी देख लीजिये 

अब आपके बच्चे अच्छे बनेंगे ऐसा ही सोचते है न आप पर होता क्या है की कोई पागल हो जाता है तो कोई शराबी बन जाता है या कोई अपाहिज होता है या बन जाता है साहब ये किसी की गुरुवाणी नहीं है ये आपके कर्म है .

By 
Manish Shukla

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Sunday, 20 January 2013

सलमान की 500 करोड़ की 'दबंग' डील


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बॉलिवुड के दबंग खान और सोशल मीडिया के बिग बॉस सलमान खान छोटे पर्दे के भी टाइगर साबित हुए हैं। उन्होंने स्टार इंडिया एंटरटेनमेंट ग्रुप के साथ 500 करोड़ का करार किया है।

2009 में वॉन्टेड की रिलीज के बाद से सलमान लगातार सुपरहिट फिल्में दे रहे हैं। उनकी हर फिल्म 100 करोड़ के क्लब को भी पार कर रही है। ऐसे में 500 करोड़ की डील दिनोदिन सलमान की बढ़ती ब्रैंड वैल्यू की ही नतीजा है। इस डील के तहत चैनल के पास अगले पांच सालों तक सलमान की रिलीज होने वाली सभी फिल्मों का टेलिकास्ट करने का अधिकार होगा।

सलमान बड़े पर्दे के अलावा छोटे पर्दे और सोशल मीडिया पर भी राज कर रहे हैं। बॉलिवुड के दबंग की सेटेलाइट रेटिंग भी बेहतर है। स्टार इंडिया के सीईओ संजय गुप्ता ने कहा कि यह बहुत ही अच्छी और बड़ी डील है।

सलमान की आने वाली कुछ फिल्मों में साजिद नाडियाडवाला की किक, सोहेल खान की अगली फिल्म जो बोनी कपूर की 'नो एंट्री' का सीक्वल होगी और सूरज बड़जात्या की दबंग 3 है, जो इस डील के तहत आ गई है।

साभार- नवभारत टाइम्स 

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क्या राहुल को भविष्य के पी एम की तरह देखना सही


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कांग्रेस पार्टी ने और राहुल गाँधी को पार्टी का उपाध्यक्ष घोषित कर दियाइस फैसले के साथ ही  कांग्रेस की एक दबी हुई ईक्षा भी सामने आई की राहुल ही उनकी पार्टी से अगले पि एम पद के दावेदार होंजिस पर पार्टी की एक बड़ी मात्रा  में सहमति भी बन गयी हैइस फैसले को लेकर ट्विटर पर लोगो ने मज़ाको की फुलझड़िया छोड़ राखी है और इस फैसले पर कांग्रेस के बुधिजिवियो और राहुल का अच्छा खासा मज़ाक बना रखा है ।
क्या कांग्रेस को अब भी लगता है कि राहुल या उनकी पार्टी का कोई सदस्य इस लायक है कि वो अगला प्रधानमंत्री बने, क्यूंकि जनता अभी तक भूली नहीं है कि ये वही राहुल है जो गांव-गांव जाकर दलितो के साथ खाना खा कर बड़े-बड़े वादे तो करते है पर बहादुर लड़की के साथ दुराचार होने पर एक बार भी गुस्साई जनता से मिलने न आये, न कोई आश्वासन दिया न ही उस लड़की के परिवार से ही सही समय पर मिलने गए | युवा शक्ति कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले राहुल कि जुबान उस समय क्यों खामोश हो जाती है जब उनकी पार्टी और उनके रिश्तेदार भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं |
मुझे इन परिस्थितियों को देखकर राजनीती फिल्म का एक संवाद याद आ रहा है जिसमे अजय देवगन कहते हैं कि “हमारा उम्मीदवार हमारे बीच का होना चाहिये ऊपर से टपका हुआ नहीं” | उसी तरह राहुल भी चाहे कितना  भी युवा और दलितो के हमदर्द बनकर खुद को उभारे पर वो उनमे से एक नहीं जो उनकी समस्या को उनके मनचाहे तरीके से हल कर पाए |

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Friday, 18 January 2013

दिल्ली के बाद अब मुम्बई हुई शर्मशार


दिल्ली के बाद अब मुम्बई में बस में एक चार साल कि बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आई है बच्ची का रेप उसकी स्कूल बस में १५ जनवरी को हुआ था, बच्ची के घर वालों को बताने के बाद मामले का खुलासा हुआ, बच्ची के घर वालों ने स्कूल में शिकायत की और फिर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई | बलात्कार के आरोपी बस कन्डक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है |
वहीँ इस पुरे मामले में स्कूल प्रशाशन का कहना है कि सरकार कि गाइड लाइन के अनुसार बस में एक महिला मौजूद थी और घटना के बाद उन्होंने खुद ही बच्ची के घर वालों के साथ मिलकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी, दूसरी ओर अभी तक बस में किसी महिला के होने कि पुष्टि नहीं हुई है, और अभी तक बस कन्डक्टर ने अपना गुनाह भी कुबूल नहीं किया हैं |
सवाल ये है कि देश जब ऐसी परिस्थितियों से गुजर रहा है तो फिर स्कूल प्रशासन ने सिर्फ ड्राईवर और कन्डक्टर के भरोसे बच्ची को क्यों भेज दिया, क्यों स्कूल प्रशासन ने सरकार द्वारा दी गयी गाइड लाइन के अनुरूप काम किया |

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पाकिस्तान का गैरजिम्मेदाराना रवैया



नियंत्रण रेखा  पर एक भारतीय सैनिक का सर काटने और वहां संघर्ष विराम समझौता तोड़कर तनाव पैदा करने की पाक की नापाक कोशिशों का जनरल बिक्रम सिंह ने मुहतोड़ जवाब देने की चेतावनी दी है |इससे दोनों देशों के आपसी रिश्ते एक बार फिर तनाव के दौर में प्रवेश करते दिख रहे हैं ऐसे वक्त पर ,जब पाकिस्तान और भारत के बीच फिर से बहाल दोस्ताना बातचीत कुछ रंग दिखाने लगी थी ,पाकिस्तान की ओर से दो भारतीय सैनिकों को बेरहमी से मारने की कार्यवाही क्यों और किसने कार्यवाही ,यह किसी की समझ में नही आ रहा |डेढ़ दशक का इतिहास देखें तो पाक के रेवैये में वहीँ एक बात झलकती है |
आइये डालते है एक नजर ....
१९९९ में भारत से दोस्ती की पहल करने वाले नवाज शरीफ ने अटल बिहारी बाजपेयी का लाहौर में गर्मजोशी से स्वागत किया और इसके तीन महीने बाद पाक सेना ने कर में करगिल घुसपैठ कर दी |२००८ में जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री नई दिल्ली में मौजूद थे ,मुंबई पर पर २६/११ का आतंकवादी हमला हुआ |और अब ,जबकि दोनों देशों के क्रिकेट रिश्ते बहाल कर लिए ,वीजा व्यवस्था को उदार बनाने का समझौता किया और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने के लिए व्यापार की शर्ते उदार करनी शुरू कीं .पाकिस्तान ने यह घिनौना काम कर दिया ताकि नियंत्रण रेखा पर २००३ में हुआ संघर्ष विराम समझौता तोड़ने का बहाना मिले और जम्मू कश्मीर की ७४० किलोमीटर विभाजन रेखा पर चौबीस घंटे गोलाबारी चलती रहे |इन तीनो वारदातों में हाथ पाकिस्तान सेना का ही उजागर हुआ है और तीनों बार पाकिस्तान की जनतांत्रिक सरकार भारत के खिलाफ हुई घटनाओं से पल्ला झाड़ती रही है | 
तालिबानी खेल  
इस बार भी पाक सरकार कह रही है की वह संघर्ष विराम समझौता नही तोड़ना चाहती लेकिन विदेश मंत्री खार के बयानों के बावजूद नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी का सिलसिला चलता रहा | जबकि अपने को मजबूत पाते ही वह भारत के खिलाफ सक्रीय हो जाती है | १९९९ में जब काबुल में अमेरिकी अगुवाई वाली सवा लाख नाटो सेना ने अफगानिस्तान से लौटने की तैयारी में है है और वहां से सही –सलामत लौटने की तैयारी के लिए अमेरिकी पाकिस्तान की खुशामद कर रहा है , पाकिस्तान सेना ने फिर अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है | २०१४ तक अफगानिस्तान से अमेरिकी फ़ौज के हटाने और वहां तालिबान के लौटने की संभावना से पाकिस्तान का मनोबल इतना बढ़ गया की वह तालिबान की मदद से जम्मू कश्मीर पर कब्जा करने का सपना देखने लगा है |इसलिए राजनयिक हलको में इस नजरिये से भी सोचा जा रहा है की पाकिस्तानी सेना का ताजा कदम क्या २०१४ की तैयारी है ?
शायद यही वजह है की रक्षा मंत्री एके एटोनी ने दो सैनिको को हत्या की वारदात को टर्निग प्वाइंट यानी एक ऐसा मोड़ कहा है जहाँ से पाकिस्तान के प्रति भारत का रवैया काफी बदला हुआ होगा |२००३ में नियंत्रण रेखा पर पूर्ण संघर्ष विराम समझौता करने के पीछे पाकिस्तान की मज़बूरी थी क्योंकि तालिबान को काबुल से हटाने के बाद पाकिस्तान से अमेरिका ने साफ़ कहा था की यदि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ नही दिया तो उसको पाषण युग में भेज दिया जाएगा |
डरा और कमजोर पाकिस्तान भारत के साथ भी रिश्ते सामान्य करने को मजबूर हुआ क्योकि उसकी आर्थिक हालत पूरी तरह खस्ता हो चुकी थी |लेकिन अब अफगानिस्तान से अमेरिका की विदाई के साथ पाकिस्तान को फिर लग रह है की कश्मीर पर तनाव बढाकर वह अपने मंसूबे पूरे  कर सकता है |



(कुछ अंश नवभारत टाइम्स से)

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सरकार ने दी एक राहत और सौ आफत


आखिर घरेलू महिलाओं को जिस चीज़ का इंतज़ार था वो मिलना तय हो गया है सरकार ने साल में सब्सिडी सिलिंडर कि संख्या से बढ़ाकर 9 कर दी है अगले फाइनैंशल इयर 2013-2014 में अप्रैल से 31 मार्च तक लोग सब्सिडी वाले सिलिंडर ले सकेंगे, वहीँ दूसरी तरफ सरकार ने डीज़ल के दाम बढ़ाकर आम आदमी पर दूर से एक छुपा हुआ वार भी किया है सरकार ने ये तय क्या है कि ऑइल मार्केटिंग कंपनियां कुछ समय के लिए डीजल की कीमत खुद तय करेंगी और रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियां डीजल के दाम 50 पैसेप्रति लीटर हर महीने बढ़ाएगी |
डीज़ल के दाम बढ़ने से अब खेतीमाल ढुलाईट्रांसपोर्ट और बिजली उत्‍पादन महंगा हो जाएगा। अनाजफल-सब्जियांयात्री भाड़ा और बिजली के दाम सीधे-सीधे बढ़ जाएंगे, सरकार प्रत्येक लीटर डीजल पर रुपये की सब्सिडी दे रही है, बताया जा रहा है कि ऑइल मार्केटिंग कंपनियां एक बार में सब्सिडी खत्म नहीं करेंगी मगर धीरे-धीरे डीज़ल कि कीमतों में नौ रूपए कि बढ़ोत्तरी हो जायेगी जिसकी मार झेलेगा आम आदमी क्यूंकि डीज़ल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टटेशन कॉस्ट बढ़ेगा और जो सीधा मेहेंगाई बढ़ाकर आम आदमी कि ही कमर तोड़ेगा |
हमारे अर्थशास्त्री प्रधानमन्त्री ने न जाने कौन सी गाड़ना करके ये फैसला लिया है जिसमे उन्होंने नौ सब्सिडी सिलिंडर कि लालीपॉप दिखाया और दूसरी तरफ डीज़ल पर से सब्सिडी हटाकर जनता को लोहे के चने चबाने को मजबूर कर दिया है 

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Thursday, 17 January 2013

आवाम और सरकार दोनों समझें निदा फाजली कि बात की गहराई को


कुछ समय पहले जानेमाने शायर निदा फाजली ने अपने एक बयाँ में कसाब की तुलना अमिताभ बच्चन से की थी जिस पर अमिताभ बच्चन के समर्थकों ने काफी रोष प्रकट किया था वहीँ दूसरी तरफ गहराई से समझने वाले कुछ विचारशील लोगो ने इस बात का समर्थन किया था | निदा फाजली ने एक साहित्यिक पत्रिका को लिखे खत में कहा जिस प्रकार अमिताभ बच्चन की “एंग्री यंग मैन” की छवि बनाने वाले सलीम-जावेद को लोगो ने भुला दिया, उसी प्रकार अजमल कसाब को फांसी देने के बाद हमारी सरकार और देश दोनों ने ही इसके पीछे के मास्टर-माइंड हाफिज सईद को भुला दिया |
निदा फाजली के बयान को जिस तरह से लोगो ने समझा वो रवैया अतिसंवेदनहीन रहा, मगर सोचने वाली बात तो ये है कि निदा फाजली के बयान से हमे क्या सीख लेनी चाहिए और किस तरह से इस गंभीर मुद्दे पर अमल करना चाहिये | आज सीमा पर जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसके लिये कहीं न कहीं भारत सरकार का संवेदनहीन रवैया जिम्मेदार है और सीमा पर हुई गोलीबारी के लिये अब हाफिज सईद से जोड़ कर देखा जा रहा तो पता चल रहा है कि उस गोलीबारी के तार हाफिज सईद कि ओर इशारा कर रहे हैं |
सोचने वाली बात तो ये है कि किसी विचारशील व्यक्ति के बयान का गलत मतलब निकालकर तूल देने से बेहतर है कि उसके पीछे छुपी गहरायी को समझे और उस पर सकारात्मक रवैया अपनाते हुए कोई फैसला ले जो जनता के हित में हो |

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चौतरफा आतंक के सायें में देश और दिल्ली की महिलायें


देश और दिल्ली में लगातार अपराध जिस तरह अपने कदम जमा रहा है वो अतिनिन्द्नीय है और इसके लगातार बढ़ते कदम इस बात की ओर भी इशारा कर रहे हैं की देश और दिल्ली की जनता भले ही काननों को सख्त करने और अपराधियों पर हर सख्त कार्यवाही करने की मांग करे मगर  हालात तो कुछ और ही बयाँ कर रहे हैं |
महिलाओ पर अत्याचार की ये दास्तान बहुत पुरानी है जो अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही | बहादुर लड़की का स्वर्गवास हुए एक महीने हो चुके है मगर देश और देश की राजधानी दिल्ली किसी भी तरह से अभी भी महिलाओं के लिये सुरक्षित होती नज़र नहीं आ रही, वहीँ दिल्ली की हैवानियत की तस्वीर तब सामने आई जब दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने महिलाओं के लिये 181 नंबर पर हेल्पलाइन शुरू करवाई जिस पर अभी तक एक लाख से भी ज्यादा कॉल आ चुके हैं जिनमे घरेलु हिंसा, छेद-छाड़,परेशान करने के मामले हैं, अब आप स्वयं ही समझ सकते हैं की दिल्ली महिलाओ के लिये कितनी असुरक्षित है |
महिलाओ के लिये सबसे बड़ी परेशानी की बात तो ये है की अगर वो खुद ही आगे बढ़कर अपराधियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठती है तो प्रशाशन के कुछ नुमाइंदे उनकी मदद के बजाये उनसे ही इस तरह का व्यहवार करते है मानो वो पीड़िता नहीं खुद ही अपराधी हैं, अगर महिलाए स्वयं हिम्मत करके किसी दुराचारी से भीड़ जाती हैं तो कभी-कभी तो उन्हें उन अपराधियों की मानसिक विकृतियों का शिकार होना पड़ता है जैसे कि आये दिन खबरे सुनने को मिलती है की किसी महिला के विरोध करने पर अपराधी उस पर तेज़ाब तक फेंक देते है, अब ऐसी स्तिथि में महिलाये कहा जाकर अपना दुखड़ा रोयें जब कि वो चौतरफा परेशानियों का शिकार होती हैं |
ऐसी गंभीर परिस्थितियों में हमारे समाज को ही आगे बढ़कर पहल करनी होगी और अपनी बुलंद आवाज़ से एक ओर सोयी हुई क़ानून व्यवस्था को जगाना होगा और दूसरी और ऐसे विकृत मानसिकता वाले अपराधियों को समाज से बाहर खदेड़ना होगा, तभी जाकर हम एक भयमुक्त समाज कि कल्पना कर सकते हैं |

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Wednesday, 16 January 2013

रेलवे का सरचार्ज


 
रेलवे की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मेला सरचार्ज के नाम पर पांच रूपए तक बढ़ोतरी का फैसला किया है। स्लीपर से एसी क्लास तक दो रूपए से पांच रूपऎ तक एक टिकट पर अतिरिक्त देने होंगे। आगामी एक जनवरी से बढ़ा सरचार्ज लिया जाएगा। रेलवे ने इस सम्बन्ध में निर्देश जारी कर दिए हैं। देश के किसी भी कोने में सामाजिक व धार्मिक मेले के आयोजन पर रेलवे विशेष रेलगाडियां संचालित करता है। इसके लिए टिकट चेकिंग स्टॉफ, बुकिंग, रिजर्वेशन, चालक, गार्ड आदि की रेल प्रशासन को व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके लिए रेलवे अपने यात्रियों से "मेला सरचार्ज" के नाम पर प्रत्येक टिकट पर कुछ निश्चित राशि अधिक वसूलता हैं। 

अगर इलाहाबाद में कुंभ का मेला लग रहा है तो इलाहाबाद के लिए कटने वाले टिकट और इलाहाबाद से लिए जाने वाले टिकट पर सरचार्ज लेगा। मेला सरचार्ज में बढ़ोतरी के आदेश रेल मंत्रालय ने जारी कर दिए हैं। कंप्यूटर में भी इसे अपडेट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सामान्य, एक्सप्रेस एवं मेल ट्रेनों में यह सरचार्ज बढ़ाया गया है, जो 1 जनवरी से लागू होगा। वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के अनुसार इलाहाबाद जाने वाली सभी ट्रेनों में सरचार्ज लगाया जाता है।

इस बार महाकुंभ के लिए एक जनवरी से इलाहाबाद जाने वाली ट्रेनों में सरचार्ज बढ़ा दिया गया। बढ़ी हुई दरें साधारण श्रेणी के साथ एसी चेयरकार, एसी तृतीय एवं द्वितीय फर्स्ट क्लास व एसी प्रथम पर प्रभावी होगी। 

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अंतरा माली के पिता और फेमस फोटोग्राफर जगदीश सड़क पर




रेखा की खूबसूरती को हमेशा के लिए तस्वीरों में जिंदा रखने वाले सीनियर फ़ोटोग्राफ़र जगदीश माली आज खुद सड़क पर हैं और वह भी बेहद दुखद हालत में। फटे-चिटे कपड़ों में यह आर्टिस्ट वर्सोवा की सड़क पर पड़े नज़र आए।


इन पर ऐक्ट्रेस मिंक बरार की नज़र उस वक्त पड़ी, जब वह वहां मौजूद भिखारियों को कंबल दान कर रही थीं। उन्हें देख ऐसा लग रहा था जैसे कई दिनों से उन्होंने कुछ खाया-पिया न हो। खैर, मिंक को उन्हें इस हाल में भी देखकर पहचानने में ज्यादा देर नहीं लगी। यारी रोड स्थित एक फूड जॉइंट के बाहर मिंक और उनके भाई ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनकी किसी भी बात का जवाब नहीं दिया। मिंक की मानें तो वह काफी डिस्टर्ब और पूरी तरह टूटे हुए लग रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि वह कहां जाना चाहते हैं तो उन्होंने जवाब दिया, 'अपने स्टूडियो'। उन्हें अब यह तक याद नहीं कि वह अपना स्टूडियो बेच चुके हैं।



जगदीश माली 80 और 90 के दशक के वह फेमस फोटोग्राफर हैं, जिन्होंने न्यू कमर्स और फेमस फिल्मी सितारों की ऐसी ग्लैमरस तस्वीरें लीं, जो मैगज़ीन कवरों पर छाईं। फिल्म मेकर पहलाज निहलानी ने कहा कि उनकी फिल्म और फीचर की दुनिया में एक अलग पहचान थी। लेकिन सब कुछ होते हुए भी वह अकेले थे। पहलाज जगदीश के साथ 'शोला और शबनम' और 'आंखें' में काम कर चुके हैं। उनकी बेटी अंतरा माली भी कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं, जो अपनी मां के साथ माहिम में रहती थीं और जगदीश अकेले ही आरम नगर में रहते थे। फिलहाल अंतरा ने एक जर्नलिस्ट से शादी कर ली है और वह अब साउथ मुंबई में रहती हैं। जब उनसे इस बारे में कॉन्टैक्ट किया गया तो अंतरा ने इस पर अपना कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। उन्होंने बस इतना ही कहा कि उन्हें हाल ही में बेबी हुआ है और वह फिलहाल काफी व्यस्त हैं।



करीब एक-डेढ़ घंटे तक मिंक ने जगदीश से उनके बारे में जानने की कोशिश की और आखिरकार उन्होंने सलमान खान को फोन किया। सलमान ने उन्हें उनके घर वापस लाने के लिए एक कार भेजी और साथ में चार लोगों को भी भेजा। माली के एक दोस्त ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अल्कोहल में वह पूरी तरह डूब गए थे। हमेशा सोशल रहने वाले और मॉडल तथा स्टार्स के साथ हाई-प्रोफाइल पार्टीज़ अटेंड करने वाले माली पिछले कुछ सालों से काफी अकेले रहने लगे थे। फेमस फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी ने बताया, 'कुछ साल पहले माली को हार्ट अटैक आया था। मैं उनके टच में नहीं था।'

साभार - नवभारत टाइम्स 

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ख्वाब हो या हकीकत!

avinash pandey

तुम
प्रकृति की गति को कुछ पल के लिए रोके खड़ी थी
वादियों में केसर की फसल ओढ़े धरती की माफिक
मैं तुम्हे छूना केवल इसलिए चाहता था
ताकी जान  सकूं की तुम ख्वाब हो या हकीकत!!!!
शब्दों के अकाल से पीड़ित मैं भूल गया था
चीकू से शब्द, बातों के पुलिंदें
ग़ालिब के शेर,भावनाओं के पुल
सब कुछ भूल गया था मैं!!!!!
किसी जंगली कबीलाई गाँव में
जैसे बिजली का पहला बल्ब जला हो!
विष बुझे तीर से घायल की
संजीवनी की तरह आये तुम
देख नहीं पाया कुछ भी
देखते हुए भी सब कुछ
क्या तुम मुस्करा रही थी?????
या चाहती थी कुछ कहना?
केवल इसीलिए मैं तुम्हे देखना चाहता था
ताकी 
जान  सकू की क्या तुम कुछ कहना चाहते थे???

By 
Avinash Pandey

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Tuesday, 15 January 2013

वो पत्थर ही है शायद, कोई देवता नहीं।


                                                       
                                                          वो पत्थर ही है शायद, कोई देवता नहीं।
इतना दर्द देकर भी, वो कभी थकता नहीं।।

हमने उसका हर दिया आंसू, बड़े शौक से पिया है,
पर वो है कि ख़ुशी बनकर कभी बरसता नहीं।
वो पत्थर ही है शायद कोई देवता नहीं ..............

भटके हैं हर पल, उससे चंद सवाल करने को,
छिपा फिरता है न जाने किससे, वो मुझे मिलता नहीं।
वो पत्थर ही है शायद, कोई देवता नहीं .............

                                                  चीख चीखकर हर आवाज़ मेरी, अब गुमनाम हो गई,
किस मिटटी का बना है, वो कुछ सुनता नहीं।
वो पत्थर ही है शायद, कोई देवता नहीं ...............

रहमत कर दे खुदाया, मैंने कितना कहा उसे,
पर वो है कि खुशियाँ मेरे दामन ने भरता नहीं।
वो पत्थर ही है शायद कोई देवता नहीं ...............

हर रोज उसके दर गए इस आस से, कि वो साथ देगा,
पर सिसकते रह गए हम, और वो कुछ समझता नहीं।
वो पत्थर ही है शायद, कोई देवता नहीं ....................

क्यों गिडगिडाते रहे हम, उसकी चौखट पर नादान बनकर,
जब जानते थे कि वो पत्थर है, कुछ कहता नहीं।
वो पत्थर ही है शायद कोई देवता नहीं ....................

                                                          Written By- Swati Gupta

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