Thursday, 5 February 2015

जग की पंडिताई


शायद आज मेरी बात से समाज का एक बहुत बड़ा समुदाय सहमत नहीं होगा पर फिर भी आप सभी के कटाक्ष मैं सहने के लिए तैयार हूँ और हाथ जोड़कर उस पंडित वर्ग से विनम्र निवेदन करती  हूँ जो अपने पांडित्य के आगे किसी भी जाती को अपने से श्रेष्ठ नहीं समझते कि कृपया आप अपने घर के मंदिर से भगवान् राम और श्री कृष्ण की मूर्ती उठाकर फेंक दीजिये क्योंकि राम एक रघुवंशी थे मतलब क्षत्रिय और कृष्ण यदुवंशी। इंसान पढ़ा लिखा। बहुत उन्नति की। कोई वकील बना, कोई डॉक्टर, कोई इंजीनियर पर मुझे बहुत आश्चर्य होता है जब कोई इतना पढ़ा लिखा वर्ग जात पात जैसी दखियानूसी बाते करता है सच मेरा सर शर्म से झुक जाता है मुझे लगता है कि क्यों भगवान् ने इस दुनिया में  इंसानों को जन्म दे दिया। इस जग की पंडिताई ने कितनो का जीवन बर्बाद कर दिया और शायद मेरा भी।

By Swati Gupta

Labels:

महिला समाज की जननी



महिला जोकि किसी जीवन की जननी होती है, जिससे मानव समाज की उत्पत्ति हुई और जिससे हमे ममता, दया, छमा, प्यार आदि का ज्ञान हुआ , जिसके बिना इस संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती, वो जो किसी नवजात शिशु को अपने स्तनों से लगाकर अपना असीम प्रेम देने का प्रयास करती है, उसे आखिर हमने और हमारे समाज ने क्या दिया है - लाचारी, बेबसी, गुलामी  और एक निचला दर्ज़ा जो कि निश्चित ही हमारी विकृत और संकीर्ण विचारधारा का प्रतिक है ।  

एक समय था जब महिलाओं को घरों की चार दीवारों तक सीमित रखना इज्ज़त और परम्परा का दूसरा नाम था, पर धीरे-धीरे समाज की सोंच में बदलाव आया और हमने महिलाओं को उनका हक़ दिलाने की लड़ाई की शुरुवात की और साथ ही उनके शशक्तिकरण पर भी काफी बल दिया । 

मगर हम इस बात को पूर्णतया नकार नहीं सकते की आज भी हमारे देश में महिलाओं की  उस लायक स्तिथि नहीं है जिस लायक कभी गाँधी जी ने सोंची थी, और न हीं महिलाओं की स्तिथि ऐसी है  जो उन्हें समाज में सम्पूर्ण स्वतंत्रता का एहसास करा  पायें । बेशक महिलाओं के शशक्तिकरण के  लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं पर वो किसी भी प्रकार से उन्हें समानता का एहसास कराने में  सक्षम नहीं हुए है, अभी भी इस दिशा में बहुत से कार्यों का होना बाकी है और खासकर देश के पिछड़े इलाकों में जहां आज भी लोग महिलाओं को घर की साज़-सज्जा की एक वस्तु मात्र मानते हैं , हमे आगे आकार इस लड़ाई को एक आंदोलन का रूप देना होगा ताकि हमारे राष्ट्र की महिलाये स्वतंत्रता और समानता का एहसास कर सकें |

Labels: ,

भ्रष्टाचारी शादी

भई आजकल मौसम जरा शादियों वाला है। शादियाँ तो आपके आस-पडौस और परिवार में भी हो रही होगी। पर यहाँ जरा शादी की बात निराली है। और ये शादी है हमारे पडौस के शर्मा जी की बेटी की। बेचारे सामान्य परिवार के शर्मा जी की इतनी ही चाह तो है कि उनकी बिटिया अच्छे परिवार और भले लोगों के बीच पहुँच जाए। पर कोई हंसी मजाक है क्या? बिटिया का ब्याह अच्छे परिवार में करवा पाना। वो भी इस महगाई के दौर में। वैसे शर्मा जी इस बात से खुश है कि बिटिया के लिए घर परिवार अच्छा और ऊँचा मिला और लोग भी बहुत भले हैं। मांग भी कुछ ख़ास नहीं है हाँ, पर खाने की लड़ाई है। लड़के वालों का सख्त कहना है कि सारा खाना देशी घी का होना चाहिए और शहर के नामी गिरामी  हलवाई के यहाँ की मिठाई और शहर के नामी लोगों के यहाँ की ही आइस्क्रीम, चाट, पकवान, लस्सी आदि माँगा है। आखिर ऊंचे-ऊंचे घरों से लोग आएँगे। शर्मा जी हमारे घर ये सब बता ही रहे थे कि पिता जी पूछ ही बैठे - " हैं ...........????? शर्मा जी ये सब कैसे करेंगे आप? इससे तो आपका पूरा बजट ही हिल जाएगा।" 
शर्मा जी बोले - "अरे नहीं गुप्ता जी, आजकल नामी गिरामी लोगों का कौन सा काम रह गया है। उनका तो अब केवल नाम रह गया है। सब इंतजाम हो जाएगा बल्कि ये सोचिये कि बस हो ही गया।"
रिफाइंड तेल के कनस्तर मंगवा लिए हैं और देसी घी की इत्र की शीशियाँ। खुशबू के साथ-साथ स्वाद भी एकदम देसी घी जैसा लाती है। रही मिठाइयों की बात तो शहर के नामी हलवाई के यहाँ से खाली डिब्बे मंगवा लिए हैं और नुक्कड़ के हलवाई के यहाँ से मिठाई लाकर भरवा देंगे डिब्बों में।
गुप्ता जी - " अरे ! शर्मा जी लड़के वालों को कुछ पता चल गया तो .........?"
शर्मा जी -" अरे नहीं गुप्ता जी। जब सावित्री बिटिया दिखी थी तब उसी के मिस्ठान भण्डार की मिठाई खिलाई थी। लड़के वाले खासी तारीफ़ कर रहे थे। बस चाट पकोड़े पकवान आइसक्रीम सबका वही हाल है। बैनर नामी रखेंगे और आदमी अपने। शादी के तोहफों में फिरोजाबाद के एक मित्र से हमने डिनर सेट मंगवा लिए हैं हलका defected माल है किसी की समझ ने न आएगा। और लोग तारीफ़ भी करेंगे।"
गुप्ता जी-" अरे वाह ! गुप्ता जी ,शादी में भी भ्रष्टाचार ?"
शर्मा जी -" आखिर सीखा भी तो अपनी ही सरकार से है। क्या होगा हमारी बेटियों का जब महगाई आसमान छुएगी? क्या हमारी बेटियों को महगाई की मार चढ़ा दें? हमें भी सोनिया का ही रास्ता अपनाना होगा,और वादा करके उसे न निभाना होगा।"
मैं वही खड़ी सब सुन रही थी और मन में ही बोली " वाह  मनमोहन तेरी माया जैसा तू वैसी ही प्रजा को पाया "


By- swati gupta

Labels:

Wednesday, 4 February 2015

प्यार एक अनछुआ एहसास

प्यार एक अनछुआ एहसास जिसे सिर्फ महसूस करा जा सकता है , वो एहसास जो हमारे सिने में दिल होने के बात की पुष्टि  करता है , वो एहसास जो इस बात की भी पुष्टि करता है की मै भी इंसान हूँ , प्यार एक दुआ की तरह है जो कबूल हो जाये तो वरदान और जो न कबूल हो तो ज़िन्दगी भर पिया जाने वाला ज़हर ।  इंतज़ार सिर्फ उसी का रहता है जिसपर हमारा हक़ होता है ऐसा नहीं होता की हमने उससे पहले कोई खूबसूरत चेहरा न देखा हो पर फिर भी दिल न जाने क्यों उस एक पर आकार रुक जाता है , क्यों सारी कमिया  एक दम से पूरी हो जाती है , क्यों तमन्नाओ की उड़ान अचानक और ज्यादा  बढ जाती है , क्यों दूर दूर रहकर भी हमेसा साथ रहते है , क्यों बिना बातो के भी होंठो पर मुस्कान आ जाती है , कहते है दुनिया में जिस किसी ने भी सच्चा प्यार किया वो मिल न सका मगर इस दुनिया से ऊपर भी एक दुनिया है जहाँ वो कभी जुदा ही नहीं हो सकते. प्रेम बहुत  ही छोटा शब्द है मगर उसका अर्थ उतना ही महान है
मगर आज के समय में लोगो ने प्यार की परिभाषा को बदल दिया है , प्यार उनके लिए एक खेल मात्र होकर रह गया है , उन्हें प्यार के महत्व को समझना चाहिए , सच्चा प्यार करने वाले को समझना चाहिए , प्यार करने वाले के जज्बात को समझना चाहिए , प्यार की  ताकत को समझने चाहिए , और धैर्य रखकर उन्हें सच्चा प्यार करने वाले का साथ निभाना चाहिए ।  जैसा की एक प्रसिद्ध गीत के माध्यम से कहा भी गया है की -
                                               " दिल को देखो चेहरा न देखो , चेहरे ने लाखो को लूटा ,
                                                                  दिल सच्चा और चेहरा झूटा "

 

Labels:

Tuesday, 3 February 2015

शादी का entrance exam

दोस्तों आपने S.S.C , Railway , Bank . I.A.S , P.C.S और भी न जाने कितने entrance एग्जाम के बारे में सुना होगा और दिया भी होगा । पर ऐसे entrance एग्जाम के बारे में नहीं सुना होगा । भारत एक विकासशील देश है । स्वतंत्रता के पश्चाद भले ही भारत ने कितनी भी प्रगति क्यों न कर ली हो परन्तु स्त्रियों की सामाजिक स्थिति के बारे तो केवल स्थितियाँ बिगड़ी ही है । जिसका साक्षात प्रमाण मेरे सामने घटा । कुछ दिन पहले ही मेरा एक अजीबोगरीब वाकये से सामना हुआ और मुझे पता चला कि भारत में हर एक क्षेत्र में लडको के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली लड़कियों को एक ख़ास तरह की परीक्षा भी पास करनी पड़ती है और वो है शादी का entrance exam ।
हाँ जी ! बात जरा कुछ दिन पहले की है। जिसमे हमारे एक रिश्ते दार की बेटी के दिखने का प्रोग्राम था । मैंने पूछा क्या देखने आ रहे है ? क्या आपकी बेटी कोई नुमाइश की चीज़ है ? तो उनका जवाब " करना पड़ता है लड़की जात है ।"
खैर स्थितियों के चलते मैं कैसे आवाज़ उठाती भला । ये दिखने वाली बात को हज़म कर ही लिया जैसे तैसे । और फिर बेटी की दिखाई का वक्त भी आ गया । लड़की को तैयार करके लड़के वालों के सामने लाया गया । फिर आगे जो हुआ उससे तो मेरे होश ही उड़ गए । ऐसा प्रशनपत्र हल करना था लड़की को जिसके बारे में मैने सोचा तक न था ।
प्रशनपत्र का पहला प्रशन सुनिए जरा । ये लड़के के पिता की तरफ से था ।
पिता - बेटा ! कहाँ तक पढ़ी हो ?
लड़की - जी ! M.A. म्यूजिक से किया है ।
पिता - अच्छा टंग की spelling बताओ जरा ?
लड़की - tongue .
हाय ! मेरा दिल वहीँ कसक मार कर रह गया । पता चला था कि लड़के वाले आगरा से 300 km दूर से आये थे पर क्या 300 km दूर spelling पूछने आये थे ? वही dictionary खरीदकर देख लेते तो कम से कम किराए का खर्चा बच जाता । खैर आप अगला प्रशन सुनिए ।
पिता - मान लीजिये आपको 20 मीटर कपडा बेचना है । 1-1 मीटर के कितनी बार काटोगे ?  
लड़की - 19 बार ।
फिर मेरा दिल मचल गया और आवाज़ उठी कि क्या लड़की से घर में कपडा बिकवायेगा ?
पिता - अगर हमारे घर पर 20 - 25 लोग आ जाए तो कितनी देर में खाना तैयार कर लोगी? 
लड़की - ( कुछ देर तक शांत रहने के बाद ) जी! 2 से 3 घंटे तो लग  ही जायेंगे ।
और मेरे दिल के वही अन्धाधुन्द विचार फिर तपाक से बोले कि ये लड़की ढून्ढ रहे है या हलवाई ।
उनके सवाल पर सवाल जारी थे और उनका हर सवाल मेरे दिल में खंज़र की तरह लग रहा था । मैं एक बार लड़की को देखती फिर लड़के को और फिर लड़के के पिता को । अभी तो लड़की और लड़की के पिता की बेचारगी दिमाग को शांत भी नहीं कर पाई थी कि लड़के के पिता ने एक ऐसी बात कह डाली जो मेरे सौ खून  के बराबर था । वो बोले- " लड़की में तो कुछ ऐसा ख़ास नहीं है । पर क्या है आप पहले ये बताएं कि आप बात कितने में तय करेंगे मैं वही सीना पकड़ कर  गयी कि लड़की ने जवाब तो सब ठीक ही दिए फिर लड़की में कुछ ख़ास क्यों नहीं ? सूरत भी माशाल्लाह थी लड़की की । फिर बाद में समझ आया  कि दीर्घ उत्तरीय प्रशन तो बाकी ही था हल करने के लिए । जो हमेशा इस प्रशनपत्र में अर्थ व्यवस्था से सम्बंधित होता है । अंततः वो काफी मशक्कत के बाद पूरे 7 लाख में अपना लड़का बेचकर चले गए और इसी के साथ उस लड़की ने शादी का entrance test पास कर लिया । अपनी आँखों से पूरा नज़ारा देखने के बाद मैंने लड़की के पिता से फिर पूछा - "इतना कुछ होता रहा आपकी बेटी के साथ आप कुछ बोले क्यों नहीं ?"
और उनका ज़वाब फिर वही था " करना पड़ता है लड़की जात है ।" और मैं सोचने लगी कि भारत कितना आगे बढ़ गया पर क्या हम जैसी लडकियाँ क्या कभी आगे बढ़ पाएंगी ? क्या हमें कभी जिन्दगी मिलेगी ?
और फिर मस्तिष्क में विचारों की तेज़ आंधी के साथ ये विचार कौंध गए ।
" हाय ! रे औरत तेरी कथा पुरानी है ।
बेटी तू है , पत्नी तू है , माँ तू ही कहलानी है ।
नुमाइश की तू चीज़ रहेगी, इज्ज़त फिर भी न पानी है ।
तू घर घर बेचीं जाएगी , बस तेरी यही कहानी है ।
हाय ! रे औरत तेरी कथा पुरानी है ।"

By- Swati Gupta

Labels: