Thursday, 28 March 2013

आस्था के नाम पे ढोंग चरम पर



पिछले दिनों आशाराम ने भक्तों के साथ होली खेलने के नाम पर हज़ारो लीटर पानी बर्बाद कर दिया और जब सभी तरफ इसका विरोध हुआ तो आशाराम ने हमेशा के लिये अज्ञातवास जाने का एलान कर दिया है और साथ ही अपने विरोधियों और भक्तों से ये भी कह डाला कि उनका विरोध बिना किसी कारण हो रहा है वो जब चाहे कहीं भी वर्षा करा सकते है और पानी की किल्लत को खत्म कर सकते हैं |
आशाराम जी खुद को जनता का बड़ा शुभचिंतक कहते हैं तो क्या उन्हें ये ज्ञात नहीं कि महाराष्ट्र इस समय भीषण सूखे कि चपेट में है और अगर उनके पास सच में चमत्कारी शक्ति हैं तो वो महाराष्ट्र का भला क्यों नहीं कर देते हैं और सिर्फ महाराष्ट्र ही क्यों ये देश ही क्यों पूरी दुनिया में कई जगह सुखा पड़ा है तो अगर आशाराम सच में मानव कल्याण के लिये जीते हैं तो उन सभी की सहायता क्यों नहीं करते है |
बात सिर्फ इतनी नहीं की आशाराम ने क्या गलत कहा और वो क्या गलत कर रहे है बड़ी बात तो ये है कि अपनी आँखों के सामने सच देखने के बाद भी जनता कि आँखों पर ये आस्था का झुटा पत्ता बंधा है और न जाने कब तक जनता आस्था के नाम पर खुद को इन जैसे ढोंगी लोगो से जुड़ती रहेगी | जिस तरह किसी हिंसक कांड में में जितना दोष हिंसा करने वाले का होता है उतना ही दोष हिंसा सहने वाले का होता है उसी तरह अगर आशाराम जैसे ढोंगी लोग जनता को तभी ठग सकते है जब जनता उन्हें ये मौका देती है,  हमे इस वक्त आवश्यकता है एक ऐसी सोंच कि जो समाजा को नै दिशा के साथ-साथ नै दशा भी दे सके |

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Tuesday, 26 March 2013

जो अभी नहीं है शायद, वो कभी तो होगा।


जो अभी नहीं है शायद, वो कभी तो होगा।
कभी तो तेरा ये दामन दागदार होगा।।

कभी तो भीगेगा मेरा तन बदन आंसुओं से।
कभी तो मोहब्बत पर, बेवफाई का दाग होगा।।

कभी तो बरसेगी ये गम की छटा मुझ पर।
कभी तो गम के अंधेरों में मुझे रहना होगा।।

कभी तो दिल का हर टुकड़ा चुभेगा शीशे की तरह।
और हर टुकड़े की चुभन को मुझे सहना होगा।।

Written By- Swati Gupta

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कहीं छुपी ना रह जाये योग्यता


योग्यता एक एक ऐसा गुण हैं जो कभी किसी के पास जाति, धर्म, उम्र, परिस्थिति या जगह देखकर नहीं आता है, योग्यता तो तो एक फूल के सामान है जो किसी भेद-भाव के बिना कहीं भी अपने पैर जमा लेती है और अपनी मेहेक से सारा वातावरण महका देता है, मगर जिस फूल की देखभाल न की जाये वो लंबे समय तक अपनी मेहेक को बरकरार नहीं रख पाता है, उसी तरह योग्यता को अगर सही दिशा न मिले तो वो सीमाओं की बाध्यता को नहीं तोड़ पाता है |

  अक्सर देखा गया है की कुछ बच्चों में भरपूर योग्यता होने के बावजूद वो दुनिया के सामने नहीं आ पाते हैं और उनकी बेहतरीन योग्यता को सही दर्ज़ा नहीं मिल पाता है, उन बच्चों के सामने आने के कई कारण हो सकते जैसे की उनका परिवेश उनकी सहायता न कर पाता हो, उनका शर्मीला स्वभाव और संसाधनों की कमी आदि की वजह की वजह से भी वो दुनिया के सामने अपनी योग्यता को नहीं दिखा पाते हैं |

  देश के बड़े-बड़े शहरों में तो के बच्चों के पास कई मौके होते हैं की वो खुद की योग्यता को दुनिया के सामने ला सकें, पर छोटे शहरों के बच्चों के सामने ऐसी मौकों की कमी बनी रहती है और उन्ही की इस छुपी हुई योग्यता को दुनिया के सामने लाने के लिये हमारी “रफ़्तार लाइव” की टीम ने  जल्द ही एक प्रतियोगिता का आयोजन करने का फैसला किया है, जिसके अंतर्गत हम देश के ज्यादा से ज्यादा शहरों को साथ लेकर बच्चों की लेखन, चित्रकारी और फोटोग्राफी की योग्यता को समाज के सामने लाना चाहते है | हम चाहेंगे की आप हमारी इस कोशिश से जुड़े और छुपी हुई योग्यताओं को दुनिया के सामने लाने में हामारी सहायता करें |

ज्यादा जानकारी के लिये आप हमे हमारी जी-मेल  raftaarlive@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं |

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Sunday, 24 March 2013

बस दिल की दरकार है इतनी


दिल की दरकार है कि वो मेरा प्यार समझ लें।
बात अधूरी न रह जाए कहीं, वो हालात समझ लें।

बड़ी मुश्किल से थाम रख्खा है हमने अपने दम को।
कहीं दम न तोड़ दें हम, वो मेरे ज़ज्बात समझ लें।

प्यार की बस्ती बसी बसाई है, उजड़ जायेगी सनम।
वीरान नगरी न बस जाए, जो वो कब्रिस्तान समझ लें।

बड़ी ही बेरंग लगती है जिन्दगी, मुझको उनके बिना।
बस इतना कर दे रहम, कि वो मेरा प्यार समझ लें।

हालात बुरे होते गए हम खुदा के सामने रोते गए।
पर वो खुदा खुदाई के नाम पर पत्थर बना रहा।

हम तड़पते रहे हर रोज, हम मरते रहे हर रोज।
और वो खुदा खुदाई के नाम पर, सिर्फ तकता रहा। 

समझदार नहीं थे हम, जो मोहब्बत कर बैठे।
मैंने समझा उसे खुदा, पर वो हमे पत्थर समझता रहा।

दिल का ये दर्द हम बयां करते करते थक गए।
और एक वो था कि हर रोज नए दर्द से भरता रहा।
वो खुदा खुदाई के नाम पर पत्थर बना रहा।

Written By- Swati Gupta

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केजरीवाल का असहयोग आन्दोलन

आम आदमी पार्टी अब चुनावी रंग के क्लेवर में बिजली -पानी का फ्लेवर मिलाने में तल्लीनता से तत्पर्य है ,दिल्ली विधान सभा चुनावी संग्राम नजदीक है और आम आदमी की समस्याओं का एजेंडा हर पार्टी चुनावी मुद्दा रहा है |लम्बे समय से दिल्ली में बढ़ी बिजली दरों के खिलाफ भाजपा अपने प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल के नेतृत्व से साथ विरोध प्रदर्शन करता रहा है पर भाजपा का विरोध प्रदर्शन केवल औपचरिकता मात्र ही रहा है | पहली बार बिजली - पानी की बढ़ी दरों के खिलाफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने १९२० में गाँधी जी द्वारा किये व्यापक असहयोग आन्दोलन की तर्ज पर अपने आन्दोलन को असहयोग आन्दोलन नाम करार दिया है |
अरविन्द केजरीवाल ने २३ मार्च भगत सिंह की पुण्यतिथि से अपने असहयोग आन्दोलन की शुरुआत सुबह गांधी समाधि स्थल , राजघाट में पुष्प अर्पित करके पूर्वी दिल्ली स्थित सुन्दर नगरी से अपने अनशन का प्रारंभ कर दिया और अरविन्द केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से अपील कि वे अपने बिजली -पानी के बिल न जमा करें साथ में जनता को सम्बोधित करते हुए कहते है कि - जो कुछ करना है अब हम सबको मिलकर करना होगा | गाँधी जी कहते थे कि जो अन्यायपूर्ण कानून हो ,उस कानून का पालन मत करो | बदले में सरकार सज़ा दे तो भुगतने के लिए तैयार रहो मैं कई लोगों से बात की है ,सभी का मानना है कि इन नाजायज बिलों को बंद करना चाहिए | लेकिन लोग डरते हैं ,उन्हें डर है कि कहीं उनकी बिजली न कट जाए ,केस न बन जाए ,पेनाल्टी न लग जाए ||
इसी दर का फायदा शीला दीक्षित की सरकार जी उठा रही है | बिजली -पान्नी कंपनियों के साथ मिलकर बार -बार दाम बाधा देती हैं | उन्हें पता है की लोग दर के मारे कुछ नहीं करेंगे | अभी जल्द ही शीला जी बिजली के दाम बढाने जा रही हैं | अखबारों में छपी खबरों के अनुसार शीला जी कहना है कि बिजली कंपनियो को २०००० करोड़ रु . का घाटा हो गया है ,सरकार का कहना है कि इस घाटे को पूरा करने के लिए बिजली के दाम और बढाने पड़ेंगे | दिल्ली में ३५ लाख बिजली के कनेक्शन हैं अगर २०००० करोड़ रु . को ३५ लाख से भाग दिया जाए तो इस हिसाब से हर परिवार का बिजली का बिल ५,००० रु . प्रतिमाह बढ़ने वाला है |
अरविन्द केजरीवाल और उनकी टीम के अनुसार शीला सरकार द्वारा दिया जा रहा बिजली कंपनियों के घाटे का हवाला फर्जी है | केजरीवाल का अनिश्चितकालीन अनशन कब तक चलेगा और क्या वाकई में गांधी के असहयोग आन्दोलन की तरह व्यापक होगा या दिल्ली सरकार बिजली -पानी के बढे दामों को वापस लेकर चुनावी समय में वोट की रोटियां सेकने की जहमत उठाएगी , ये काफी हद तक केजरीवाल के असहयोग आन्दोलन की व्यापकता ही तय करेगा की सरकार किस कदम तक विवश हो सकती | क्योंकि अब चुनाव नजदीक है सभी पार्टियाँ मुस्तैदी से लामबंद है ,जनता के फैसले का समय निकट है | ये लोकतंत्र है इसमें हर पांच साल बाद निर्णय जनता को लेना यही लोकतांत्रिक मिजाज भी है |
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Thursday, 21 March 2013

संजय को आखिर माफ़ी क्यों ?


आखिर “संजय दत्त” को कोर्ट ने सजा सुनाते हुए पाँच वर्ष का कारावास दे ही दिया लंबे समय से चल रहे मुक़दमे में कोर्ट ने संजय “आर्म्स एक्ट” में दोषी करार करते हुए पाँच साल कि सजा सुनाई जिसमे से अठारह महीने की सजा संजय पहले ही काट चुके हैं और अब उन्हें तीन साल और छ माह की सजा और काटनी होगी, इससे पहले निचली अदालत ने संजय को छ साल की सजा सुनाई थी जिसको सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर पाँच साल कर दी है |

दूसरी तरफ संजय दत्त के समर्थन में पूरा बॉलीवुड दुःख प्रकट कर रहा है, महेश भट्ट ने कहा की वो कोर्ट के फैसले का सम्मान करते है पर संजय एक अच्छे इंसान हैं इसलिए उन्हें संजय की इस सजा का बेहद दुःख है और पूरी रात संजय के घर उनके करीबी लोगो का आना-जाना लगा रहा जिनमे रणबीर कपूर, फरहान अख्तर, राजू हीरानी आदि शामिल हैं, वही प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष “मार्कंडेय काटजू” ने महाराष्ट्र के राज्यपाल को एक चिठ्ठी लिखकर “दत्त परिवार” के योगदान को ध्यान में रखते हुए संजय दत्त को माफ़ी देने की अपील की है |

संजय दत्त भले ही इस देश के एक मशहूर अभिनेता हैं पर क़ानून की नज़र में वो दोषी पाए गये है तो अब सवाल ये उठता है की अगर संजय की जगह कोई सामान्य व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाता तो क्या संजय की तरह उसे भी सहानुभति मिलती, क्या उसकी भी बात राज्यपाल तक पहुचाई जाति, संभव हो उस व्यक्ति ने भी अपने जीवन में बहुत से परोपकार के कार्य किये हो, मानवजाति के कल्याण के लिये जीवन में बहुत कुछ किया हो और प्रसिद्ध व्यक्ति न होने की वजह से आज उन्हें दुनिया ना जानती हो | तो क्या ये सही होगा कि संजय कि दया याचिका को स्वीकार कर उन्हें सिर्फ इसलिये माफ कर दिया जाये कि वो एक इज्ज़तदार और बड़े परिवार से  हैं |

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Heading towards green earth.



Contributing towards green earth, Mahindra & Mahindra in its collaboration of REVA launched its all electric car e2o at India gate on 18th march 2103. E2O is the best looking electric car in the Indian market , a two door hatchback having a seating capacity of 4 adults can go 100 km in a single charge. It can hit a top speed of 81Kmph.  Full charging the vehicle takes around 5 hours and a charge for 1 hour can take you to 20 kms. It delivers a Power of 19 kW @ 3750 rpm and torque of 53 N-m @ (0-3400 rpm).  It comes in two variant E2O TO and E2O T2 and with a base price tag of Rs 595415 (ex showroom).  Cruising in the city traffic and those tight, narrow streets will be less hassle free, thanks to its wheel base of 1.96m and a turning radius of 3.9m. Loaded with tons of luxury features like Push Button Start/Stop, A/c Keyless entry, Power Windows, One touch foldable seats, Remote hatch release, Easy home charging, Driving range using GPS navigation, Remote Lock/Unlock, Smartphone application and lot more. Despite its range of just 100 kms, limiting its use only to cities doesn’t stop this vehicles potential to be an everyday car for India.

By - Preetam Gupta

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Wednesday, 20 March 2013

एसिड हथियार की संज्ञा में क्यूँ नही



एसिड के  भयावह  प्रकोप से आज लोग शौचालय में एसिड का प्रयोग करना बंद चुके वहीँ आज के समाज में उन आमानवीय कृत्यों  और कुंठा से भरे लोग अभी भी  इस सामज में एसिड का प्रयोग अपने बल के रूप में करते हैं  | एसिड को लेकर एक महत्वपूर्ण बात ये भी है की ये आसानी से उपलब्ध हो जाता है ,जिस कारण इसे कोई भी आसानी से खरीद सकता है  और इसे हथियार के रूप अख्य्तियार कर मनमाने ढंग  से अपने अनुसार आजमाता फिरता  है | चाहे महिला को लेकर  एसिड अटैक हो ,पुरुष को लेकर एसिड अटैक या फिर पशुओं को लेकर एसिड अटैक हो |

आखिर हमारे मानवीय मूल्य कहाँ खो गये ,जिस संस्कृति का  हम ढिंढोरा पिटते -पिटते नही थकते कहाँ लुप्त हो गये वो आर्दशवादी विचार जिसमे हमे सिखया जाता है कि कमजोर और असहाय की सेवा है , हमारा प्रथम मानवीय कर्तव्य है | किस पिटारे में जा छुपा है हमारे  अन्दर का वो इंसान जो ये दुहाई देते नही थकता कि"मेरा  भारत महान " अगर ऐसा है आपका भारत महान तो नही चाहिए जो खूबसूरती से नफरत करता है तभी तो अभी तक कोई ऐसा कानून नही पास हुआ जो तेजाबी हमलो के खिलाफ सख्त प्रावधानों से पूर्ण हो मतलब कोई कानून ही नही निहित किया गया तेजाबी हमलो के खिलाफ जो काफी निराशाजनक है |
जब एसिड इनता घातक है तो सरकार इस जानलेवा वस्तु साम्रगी के खिलाफ ठोस कदम क्यूँ नही उठाती ,यहाँ तक सरकार का ढुलमुल रवैया एसिड विक्टिम के साथ नकारात्मक रूप में ही रहा उनकी हरदम अवेहना कर ,सरकारी राहत कोष से उन्हें कोशों दूर रखा है | एसिड विक्टिम से बातचीत में पता  चलता है कि वे किसी मनोव्रत्ति में जी रही हैं , वे इस जीवन से  बेहतर मरना ही उचित समझती है ,क्योकि समाज में इंसानी हिमायत अंतिम चरण में हैं और लोगों का  नजरिया  एसिड विक्टिम को लेकर  अमानवीय है और मदद के नाम पर केवल तमाम तरह की पूछताछ कर एसिड विक्टिम के घाव को फिर से ताजा करने के सिवा कुछ भी नही | यहाँ तक NGO  जो क्रियान्वित  हैं पर प्राण घातक एसिड अटैक्स मुद्दे पर कोई NGO पहल करता नही दिख रहा ,एसिड विक्टिम की मदद दूर की बात है | एसिड अटैक्स  जैसे गंभीर मुद्दे को छोड़ देना या फिर नकार देना उनके सामाजिक कार्यों पर प्रश्न खड़ा करता  है |

एसिड अटैक्स  को देखते  हुए उसे भी हथियार की संज्ञा में लाना बहुत जरुरी है , हथियार की संज्ञा में आते ही एसिड को बेचने के लिए लाइसेंस जरुरी होगा तो खरीदने वाले को भी कानूनी आधार पर ही एसिड दिया जाएगा और उसका विवरण  उस बिक्री की दूकान में उपलब्ध होगा तो आसानी से पता लगा पाना संभव  हो जाएगा क्योंकि उस व्यक्ति की जानकारी आकंड़ों में  निहित हो जायेगी | ये कदम कितना सार्थक  होगा , ये अलग चर्चा का विषय है पर ये कदम सरकार की कदम से उठाये जाने अनिवार्य है |

अब सरकार जागी है देर ही सही पर पर इसे पहल की शुरुआत  कह सकते हैं ,अपराध कानून विधेयक २०१३ प्रावधानों पर सर्वदलीय बैठक में विधेयक में पहली बार तेज़ाब हमला करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है | ये कानून कितना कारगर सिद्ध होगा ये व्यापक चर्चा का विषय इसलिए है क्योंकि कई कानून अमलीय जामा पहनने के बाद भी निरर्थक सिद्ध हो रहे हैं तो फिर ऐसे कानून का क्या लाभ है पर सरकार की तरफ से उठाया गया सार्थक कदम की पहल हो सकती  है चाहे विलम्भ  ही सही | 

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Tuesday, 19 March 2013

That’s out of the Ground



In cricket quality batsmen were always treated with respect. All the batsmen can broadly be divided into two categories: one is attacking batsmen and another one is technical batsmen. As cricket is getting older players of technical categories became lesser now a days. ODI and now T-20 helped the attacking category to grow at faster rate. Especially T-20 worked like Borunvita to attacking category. Sanath Jayasuriya, Chris Gayle, Virendar Sehwag, Brendon Mccullum, Kieron Pollard, Tillakaratne Dilshan, Herschelle Gibbs, David Warner and Shahid Afridi are the kingsof this category. All this players are the brand ambassadors of this category. Pitch condition, opponent and match condition doesn’t hassle them at all. Their first and last catchword is to hit the ball hard. From the above list of players there is a player for whom this catchword is his life.
At the age of 16 he astonished the Cricketing World with his hard hitting. He scored fastest hundred of just 33 balls including 11 six and 6 boundaries. He made this record way back in 1996 and till now no one would able to break this record. Yuvraj Singh, Ravi Shahtri and Garry Sobers hit 6 sixes in an over at some level of cricket. In the first ODI against Southafrica in the current series he hit six number 300 in ODI. He is the only batsman in the history of Cricket to hit this ample number of sixes.
He is at the top of this list and Sanath Jayasuriya who is at second number in this list hit 270 sixes and for that Sanath took 445 matches. Afridi hits 308 sixes in 352 ODI. From the list of batsmen mentioned above each of them crossed the line between attacking batsmen and technical batsmen category more than once. But, Afridi is always allegiant to this category. Sehwag is quite close to him in this allegiant ship, but when he was not in good form he started playing defensively.
Shahid Afridi had always played fearlessly and still playing like he was playing when he is new to this international cricket.
Whether it’s Test Match, ODI and T-20 crowd always cherished to watch bowl sailing over the boundary rope. There were some more records regarding six hitting in Cricket. Let’s look at them below:-


S.NO
Record
Name of Cricketer
Number of Sixes
Number of Matches/Opponent Team
1.
Most Sixes in ODI
Shahid Afridi(PAK)

308
352
2.
Most Sixes in Test Matches
Adam Gilchrist(AUS)
100
96(137 Inning)
3.
Most Sixes in T-20
Brendon Mccullum(NZ)
73
60
4.
Most Sixes in an Inning(ODI)
Shane Watson(AUS)
15
Bangladesh(11 April 2011)
5.
Most Sixes in an Inning(Test Matches)
Waseem Akram(PAK)
12
Zimbabwe(17 Oct 1996)
6.
Most Sixes in an Inning(T-20)
Richard Levi(SAF)
13
New Zealand (19 Feb 2012)
7.
Most Sixes in an Over(ODI)
Herschelle Gibbs(SAF)
06
Netherland (16 Mar 2007), Bowler (Daan van Bunge)
8.
Most Sixes in an Over(Test Matches)
Kapil Dev(IND)


04
England(1990), Bowler (EE Hemmings)
Shahid Afridi(PAK)
India (2006), Bowler (Harbhajan Singh)
AB de Villiers(SAF)
Australia(2008-09), Bowler (AB McDonald)
9.
Most Sixes in an Over(T-20)
Yuvraj Singh
06
England(19 Sep 2007), Bowler(Stuart Broad)

Cricket had always been a game where you need to develope proper skills and technique to play the game. But hitting sixes in Cricket always need power because if you put more power even an edge can go out of the ground.
In Test Matches still there is no one who hit 6 sixes in an over as Yuvraj did in T-20 and Gibbs in ODI.Wait is on but who knows next match or next inning will end this wait.

Sports Editor

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Monday, 18 March 2013

युवाओं के लिये भी प्रेरणा है “२ लिटिल इंडियन्स”


पैसे और नाम के पीछे दौड़ती आज कि दुनिया में शायद किसी के पास इतना समय भी नहीं कि वो अपने देश के बारे में कुछ सोंचे या कुछ करे, बल्कि लोग देश के हालात सुधारने के बजाय सुबह का अखबार पढते हुए ये कहते हैं कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता है | आज के समय में हमे जरुरत है एक ऐसी सोंच की समाज को देशभक्ती के लिये प्रेरित करे और साथ ही देश के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराये, क्यूंकि आज हम समय के ऐसे दोराहे पर खड़े हैं जहाँ एक तरफ तो हम कहते हैं कि देश को उस युवा ताकत की जरुरत है जो इसे एक नयी दिशा और दशा दे सके वही दूसरी तरफ हम अपने बच्चों की विचारधारा को इतना संकीर्ण करते जा रहे हैं की वो सिर्फ अपने बारे में ही सोंचने को मजबूर हैं |
जहाँ दुनिया में ऐसे लोग हैं जो सिर्फ अपने लिये ही जी रहे हैं, वही कुछ ऐसे भी लोग हैं जो देश के लिये अपने माध्यमों के जरिये कुछ करने का जज्बा रखते है उन्ही में से एक नाम है “रवी भाटिया” का जो अपनी आने वाली फिल्म “२ लिटिल इंडियन्स” के जरिये समाज को जगाने का प्रयास करना चाहते हैं, प्रख्यात विज्ञापन निर्माता “रवी भाटिया” ने इससे पहले लगभग ३०० विज्ञापन और दूरदर्शन के लिये दो टेलीफिल्म “कब होगी सुबह हमारी” और “नन्हे कदम” में बतौर निर्माता अपना योगदान दिया है |

रवी भाटिया की फिल्म “२ लिटिल इंडियन्स” एक फिल्म की जगह एक संदेश है जो वो बच्चों के माध्यम से समाज को देना चाहते हैं, बच्चे जो मासूम, भावुक और आने वाला कल हैं उन जैसे शशक्त माधम का प्रयोग कर “रवी भाटिया’ ने एक काबिल-ए-तारीफ़ कदम उठाया है, आइये हम “रवी भटिया” की इस पहल में जुड़े और “२ लिटिल इंडियन्स” जैसे संदेश को देश के हर कोने में पहुंचायें |

 

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Sunday, 17 March 2013

फाइट करेंगी बॉलिवुड ब्यूटी कटरीना कैफ


  कटरीना कैफ की इमेज बॉलिवुड में एक नाज़ुक सी हेरोइन की है पर अब वो इस इमेज से तंग आ गयी है और सबसे कह रही है कि वह ऐक्शन फिल्में करना चाहती हैं। फिलहाल उनकी झोली में आमिर खान के अपोजिट 'धूम 3' और रितिक रोशन के अपोजिट 'बैंग बैंग' हैं। इन दोनों ही फिल्मों में कैट की दिली इच्छा पूरी होने वाली है। दोनों फिल्मों में उन्हें ऐक्शन सीन करने का चांस जो मिलने वाला है। जानकारों की अगर मानें, तो 'धूम 3' और 'बैंग बैंग' दोनों फिल्मों में हार्ड कोर स्टंट करके कैट सबको हैरान कर देने वाली हैं। कटरीना की ये ख्वाहिश तो बस पूरी ही होने वाली है |
   जब कैट से इस बारे में एक समाचार पत्र ने बात करी , तो उन्होंने बताया, 'रितिक के अपोजिट मेरी फिल्म 'बैंग बैंग' हॉलिवुड फिल्म 'नाइट ऐंड डे' से इंस्पायर्ड है। फिल्म की स्टोरी को इंडियन ऑडियंस के मुताबिक बनाया गया है। यह एक ऐक्शन कॉमेडी फिल्म है। मैंने इस तरह की फिल्म पहले कभी नहीं की है। इस फिल्म में रोमांस है, तो ट्विस्ट भी हैं।' वैसे, इन दिनों कटरीना स्विट्जरलैंड में आमिर के साथ 'धूम 3' की शूटिंग में बिजी हैं। बकौल कैट, 'हम यहां (स्विट्जरलैंड में) शूटिंग कर रहे हैं। अभी काफी शूटिंग बाकी है, लेकिन पूरी टीम तेजी से काम करने में बिजी है। फिल्म में मेरा रोल बेहद ग्लैमरस और बोल्ड है। आमिर के साथ काम करके बहुत मजा आ रहा है। वाकई वह बेहतरीन ऐक्टर हैं और मुझे काफी सपोर्ट भी करते हैं।' चलिए कैट हम तो बस यही चाहते है की जो रोल आप चाहे वो आपको मिले |
 
लेखक-आरती विमल

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