क्या राहुल को भविष्य के पी एम की तरह देखना सही
कांग्रेस पार्टी ने और राहुल गाँधी को पार्टी का उपाध्यक्ष घोषित कर दिया, इस फैसले के साथ ही कांग्रेस की एक दबी हुई ईक्षा भी सामने आई की राहुल ही उनकी पार्टी से अगले पि एम पद के दावेदार हों, जिस पर पार्टी की एक बड़ी मात्रा में सहमति भी बन गयी है, इस फैसले को लेकर ट्विटर पर लोगो ने मज़ाको की फुलझड़िया छोड़ राखी है और इस फैसले पर कांग्रेस के बुधिजिवियो और राहुल का अच्छा खासा मज़ाक बना रखा है ।
क्या कांग्रेस को अब भी लगता है कि राहुल या उनकी पार्टी का कोई सदस्य इस लायक है कि वो अगला प्रधानमंत्री बने, क्यूंकि जनता अभी तक भूली नहीं है कि ये वही राहुल है जो गांव-गांव जाकर दलितो के साथ खाना खा कर बड़े-बड़े वादे तो करते है पर बहादुर लड़की के साथ दुराचार होने पर एक बार भी गुस्साई जनता से मिलने न आये, न कोई आश्वासन दिया न ही उस लड़की के परिवार से ही सही समय पर मिलने गए | युवा शक्ति कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले राहुल कि जुबान उस समय क्यों खामोश हो जाती है जब उनकी पार्टी और उनके रिश्तेदार भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं |
मुझे इन परिस्थितियों को देखकर राजनीती फिल्म का एक संवाद याद आ रहा है जिसमे अजय देवगन कहते हैं कि “हमारा उम्मीदवार हमारे बीच का होना चाहिये ऊपर से टपका हुआ नहीं” | उसी तरह राहुल भी चाहे कितना भी युवा और दलितो के हमदर्द बनकर खुद को उभारे पर वो उनमे से एक नहीं जो उनकी समस्या को उनके मनचाहे तरीके से हल कर पाए |
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