Tuesday, 29 May 2012

खेल को निगलता भ्रष्टाचार का जिन्न !

हमेशा से ही खेल उस भावना के तहत खेला जाता है जिसमे मित्रता , अपनत्व एवं सम्मान को सबसे बड़ा दर्ज़ा दिया गया है , परन्तु जब खेल में भ्रस्टाचार का आगमन हो जाता है तो वो खेल की मर्यादा को गर्त के उस सागर में ले जाता है , जहाँ पर खेल की साड़ी नैतिकताओ का अंत हो जा है खिलाड़ी जब किसी खेल से जुड़ता है तो उसका एक मात्र लक्ष्य ये होना चाहिए की वह अपने प्रदर्शन के द्वारा अपना एवं अपने राष्ट्र का सम्मान बढ़ाये तथा अपने प्रदर्शन को उस ऊच्च कोटि का साबित करके दिखाए जहाँ उसके देश को उसके नाम से जाना जाये
      क्रिकेट जगत में पहली मैच फिक्सिंग १९९४ में हुई थी उस समय ये कोई नहीं जानता था की फिक्सिंग या यह दीमक क्रिकेट जगत को धीरे धीरे खोकला कर देगा , एक मात्र खिलाड़ी हेंची क्रोनिये जोकि साउथ अफ्रीका से थे उन्होंने जानता के समक्ष इस बात की पुष्टि की थी की वह भी फिक्सिंग का हिस्सा रहे है और वो आत्म ग्लानी की वजह से इस इकरार के समय रो भी पड़े थे
हमारा भारतीय क्रिकेट जगत भी फिक्सिंग के दंश से अछूता नहीं रहा है , इसने कई भारतीय क्रिक्केटर जैसे अजय जडेजा , नैन मोंगिया , अजहरुद्दीन आदि को भी अपना निशाना बनाया है
ये दुर्भाग्यपूर्ण है की खेल जोकि मत्रिपूर्ण संबंधो को और प्रगाड़ करने का एक जरिया है उसे आज के समय में कुछ लोगो ने निजी हितो के लिए एक अनैतिक एवं गन्दा रूप दे डाला है


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