Friday, 5 February 2016

सीनियर ऐक्टर्स समझें अपनी जिम्मेदारी


बदलते समय के साथ हिंदी सिनेमा और इसका ऑडियंस तेजी से बदला है। इसी के चलते अब लोग उन फिल्मों को हाथों हाथ ले रहे है, जिन्हे पहले केवल एक लिमिटेड ऑडियंस के लिए माना जाता था। 

एक समय था जब ओम पुरी अभिनीत अर्धसत्य और नसीरुद्दीन शाह की पार जैसी फिल्मों को लोग ज्यादा अहमियत नहीं देते थे। अब समय तेजी से बदल रहा है। जहां लीक से हटकर बनने वाली फिल्में जैसे मांझी- द माउंटेन मैन और लंचबॉक्स को भी दर्शकों की कोई कमी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ ऐसी फिल्मों की भी कोई भरमार नहीं जो केवल पैसे कमाने के लिए ही बनती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि पैसा कमाने की होड़ में वह एक्टर हैं जो 20 साल से भी ज्यादा समय से इंडस्ट्री में हैं। 

सोचने वाली बात यह है कि क्या अब भी इन सीनियर एक्टर्स को ऐसी फिल्मों की भूख है जो सिर्फ अच्छा व्यापार करें। इन एक्टर्स को अब अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए और समाज को कुछ सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों से जुड़ना चाहिए। इसके साथ ही ऐसी कहानियों को भी सामने लाना चाहिए जिससे हमारे बॉलिवुड के नाम का डंका पूरे विश्व में बज सके।

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home