Thursday, 5 February 2015

भ्रष्टाचारी शादी

भई आजकल मौसम जरा शादियों वाला है। शादियाँ तो आपके आस-पडौस और परिवार में भी हो रही होगी। पर यहाँ जरा शादी की बात निराली है। और ये शादी है हमारे पडौस के शर्मा जी की बेटी की। बेचारे सामान्य परिवार के शर्मा जी की इतनी ही चाह तो है कि उनकी बिटिया अच्छे परिवार और भले लोगों के बीच पहुँच जाए। पर कोई हंसी मजाक है क्या? बिटिया का ब्याह अच्छे परिवार में करवा पाना। वो भी इस महगाई के दौर में। वैसे शर्मा जी इस बात से खुश है कि बिटिया के लिए घर परिवार अच्छा और ऊँचा मिला और लोग भी बहुत भले हैं। मांग भी कुछ ख़ास नहीं है हाँ, पर खाने की लड़ाई है। लड़के वालों का सख्त कहना है कि सारा खाना देशी घी का होना चाहिए और शहर के नामी गिरामी  हलवाई के यहाँ की मिठाई और शहर के नामी लोगों के यहाँ की ही आइस्क्रीम, चाट, पकवान, लस्सी आदि माँगा है। आखिर ऊंचे-ऊंचे घरों से लोग आएँगे। शर्मा जी हमारे घर ये सब बता ही रहे थे कि पिता जी पूछ ही बैठे - " हैं ...........????? शर्मा जी ये सब कैसे करेंगे आप? इससे तो आपका पूरा बजट ही हिल जाएगा।" 
शर्मा जी बोले - "अरे नहीं गुप्ता जी, आजकल नामी गिरामी लोगों का कौन सा काम रह गया है। उनका तो अब केवल नाम रह गया है। सब इंतजाम हो जाएगा बल्कि ये सोचिये कि बस हो ही गया।"
रिफाइंड तेल के कनस्तर मंगवा लिए हैं और देसी घी की इत्र की शीशियाँ। खुशबू के साथ-साथ स्वाद भी एकदम देसी घी जैसा लाती है। रही मिठाइयों की बात तो शहर के नामी हलवाई के यहाँ से खाली डिब्बे मंगवा लिए हैं और नुक्कड़ के हलवाई के यहाँ से मिठाई लाकर भरवा देंगे डिब्बों में।
गुप्ता जी - " अरे ! शर्मा जी लड़के वालों को कुछ पता चल गया तो .........?"
शर्मा जी -" अरे नहीं गुप्ता जी। जब सावित्री बिटिया दिखी थी तब उसी के मिस्ठान भण्डार की मिठाई खिलाई थी। लड़के वाले खासी तारीफ़ कर रहे थे। बस चाट पकोड़े पकवान आइसक्रीम सबका वही हाल है। बैनर नामी रखेंगे और आदमी अपने। शादी के तोहफों में फिरोजाबाद के एक मित्र से हमने डिनर सेट मंगवा लिए हैं हलका defected माल है किसी की समझ ने न आएगा। और लोग तारीफ़ भी करेंगे।"
गुप्ता जी-" अरे वाह ! गुप्ता जी ,शादी में भी भ्रष्टाचार ?"
शर्मा जी -" आखिर सीखा भी तो अपनी ही सरकार से है। क्या होगा हमारी बेटियों का जब महगाई आसमान छुएगी? क्या हमारी बेटियों को महगाई की मार चढ़ा दें? हमें भी सोनिया का ही रास्ता अपनाना होगा,और वादा करके उसे न निभाना होगा।"
मैं वही खड़ी सब सुन रही थी और मन में ही बोली " वाह  मनमोहन तेरी माया जैसा तू वैसी ही प्रजा को पाया "


By- swati gupta

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