कोई बता दे कहाँ है मेरा घर !
बेटियां जब पैदा होती हैं तो माँ बाप ये समझना शुरू कर देते हैं कि उनका सर झुक गया । बेटी के कानों में जब ये बातें डाली जाती हैं कि वो पराया धन हैं तो वो खुद फैसला नहीं कर पाती कि वो कहाँ जाएँ । क्योकि सारी उम्र वो खाना बदोश ही रहती हैं उनका कोई घर नहीं होता । कभी वो माँ बाप के घर में मेहमान होती हैं तो कभी ससुराल के घर में अजनबी ।
कभी हमसफ़र का घर भी उसका अपना नहीं होता तो बेटे के घर में भी कभी उसके लिए जगह नहीं होती । वो सारी उम्र न सिर्फ इसी तरह बसर करती है बल्कि अपने अरमानों का भी गला घोंट देती है । फिर भी कभी अपने ख्वाहिशों को कभी भी सरे आम नहीं करती कि पता नहीं वो पूरी होंगी भी या नहीं ।
लड़की माँ बाप और अपने हमसफ़र के घर में सिर्फ अजनबी ही नहीं रहती बल्कि हमेशा डर खौफ और नशीहतों के साए में भी परवान चढती है ।
फिर कभी जब एक दिन एक लड़की बड़े अरमानो के साथ दुल्हन बनती है तो उसकी ख़ुशी नाखुशी, उसका हसी मजाक , दुःख सुख सब कुछ ससुराल वालों के हाथ में होता है । उसकी अपनी कोई राय नहीं होती । और तो और इस अजनबी भरे माहौल में उसे ये भी नहीं पता होता कि वो अपना कदम कहाँ रखे । वो हमेशा ससुराल वालों के रहमों करम पर ही पलती है । क्योकि ससुराल में वो अपने माँ बाप कि इज्जत खाक में नहीं मिला सकती ।
और अगर आज के दौर में उसको जगह मिल भी जाए पर जब तक उसको जगह मिलती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । उसकी तकरीबन आधी जिन्दगी ख़त्म हो चुकी है । उसके कदम तक जमीन में रखने के काबिल नहीं रहते ।
बेटियां पराई थी पराई है, पर क्या ये पराई ही रहेंगी ? शायद कोई भी इन्हें मुक्कमल जगह नहीं दिला सकता यहाँ तक कि खुद खुदा तक नहीं । नारी सबसे शक्तिशाली है ये सिर्फ वाक्य नहीं है ये सही है क्योंकि इतना कुछ वो अकेली ही सहती है । पुरुषो में इतनी ताकत नहीं ।
आप लोगो से बस इतनी गुजारिश है कि आप अपनी बहन , बेटी , माँ और पत्नी को उसका घर जरूर बता देना । मुझे भी तलाश है अपने घर की ।
कभी हमसफ़र का घर भी उसका अपना नहीं होता तो बेटे के घर में भी कभी उसके लिए जगह नहीं होती । वो सारी उम्र न सिर्फ इसी तरह बसर करती है बल्कि अपने अरमानों का भी गला घोंट देती है । फिर भी कभी अपने ख्वाहिशों को कभी भी सरे आम नहीं करती कि पता नहीं वो पूरी होंगी भी या नहीं ।
लड़की माँ बाप और अपने हमसफ़र के घर में सिर्फ अजनबी ही नहीं रहती बल्कि हमेशा डर खौफ और नशीहतों के साए में भी परवान चढती है ।
फिर कभी जब एक दिन एक लड़की बड़े अरमानो के साथ दुल्हन बनती है तो उसकी ख़ुशी नाखुशी, उसका हसी मजाक , दुःख सुख सब कुछ ससुराल वालों के हाथ में होता है । उसकी अपनी कोई राय नहीं होती । और तो और इस अजनबी भरे माहौल में उसे ये भी नहीं पता होता कि वो अपना कदम कहाँ रखे । वो हमेशा ससुराल वालों के रहमों करम पर ही पलती है । क्योकि ससुराल में वो अपने माँ बाप कि इज्जत खाक में नहीं मिला सकती ।
और अगर आज के दौर में उसको जगह मिल भी जाए पर जब तक उसको जगह मिलती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । उसकी तकरीबन आधी जिन्दगी ख़त्म हो चुकी है । उसके कदम तक जमीन में रखने के काबिल नहीं रहते ।
बेटियां पराई थी पराई है, पर क्या ये पराई ही रहेंगी ? शायद कोई भी इन्हें मुक्कमल जगह नहीं दिला सकता यहाँ तक कि खुद खुदा तक नहीं । नारी सबसे शक्तिशाली है ये सिर्फ वाक्य नहीं है ये सही है क्योंकि इतना कुछ वो अकेली ही सहती है । पुरुषो में इतनी ताकत नहीं ।
आप लोगो से बस इतनी गुजारिश है कि आप अपनी बहन , बेटी , माँ और पत्नी को उसका घर जरूर बता देना । मुझे भी तलाश है अपने घर की ।
स्वाति गुप्ता
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