Sunday, 24 March 2013

बस दिल की दरकार है इतनी


दिल की दरकार है कि वो मेरा प्यार समझ लें।
बात अधूरी न रह जाए कहीं, वो हालात समझ लें।

बड़ी मुश्किल से थाम रख्खा है हमने अपने दम को।
कहीं दम न तोड़ दें हम, वो मेरे ज़ज्बात समझ लें।

प्यार की बस्ती बसी बसाई है, उजड़ जायेगी सनम।
वीरान नगरी न बस जाए, जो वो कब्रिस्तान समझ लें।

बड़ी ही बेरंग लगती है जिन्दगी, मुझको उनके बिना।
बस इतना कर दे रहम, कि वो मेरा प्यार समझ लें।

हालात बुरे होते गए हम खुदा के सामने रोते गए।
पर वो खुदा खुदाई के नाम पर पत्थर बना रहा।

हम तड़पते रहे हर रोज, हम मरते रहे हर रोज।
और वो खुदा खुदाई के नाम पर, सिर्फ तकता रहा। 

समझदार नहीं थे हम, जो मोहब्बत कर बैठे।
मैंने समझा उसे खुदा, पर वो हमे पत्थर समझता रहा।

दिल का ये दर्द हम बयां करते करते थक गए।
और एक वो था कि हर रोज नए दर्द से भरता रहा।
वो खुदा खुदाई के नाम पर पत्थर बना रहा।

Written By- Swati Gupta

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