Wednesday, 24 October 2012

गिर रहा पत्रकारिता का स्तर जिम्मेदार कौन

 लगता है सैफ-करीना की शादी भारत देश के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है वरना सारा मीडिया क्यों उनकी हर एक गतिविधि को पल पल दिखता, आज मीडिया पर एक बड़ा इल्जाम लगातार लगता नजारा आता है की अब वह सच्चाई और उम्दा खबरों को छोड़कर फिजूल की खबरे देखने में जुट गया है मगर जो लोग इस पत्रकारिता पर इल्जाम लगाते है पहले उन्हें खुद अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए ।
            आज का एक बड़ा दर्शक वर्ग बेहूदा कही जा सकने वाली खबरों में अपनी रूचि इस कदर दिखा रहा है की ऐसे लोगो को आसानी से मौका मिल गया है जो सनसनी के नाम पर कभी मसाले के नाम पर ऐसी खबरे छाप रहे है जिन्हें कभी पाठक देखना पसंद भी नहीं करता था 
             आज अगर भगत सिंह जैसे किसी वीर की पुण्यतिथि होती है तो लोग बमुश्किल ही जान पाते है मगर अमिताभ बच्चन के जन्मदिन के मौके पर सारा अखबार उनकी जीवनी से रंग जाता है, मगर इस सब में जितनी गलती उन लोगो की है जो ऐसी बे सर पैर की खबर छापते है उससे जादा गलती उनकी है जो ऐसी खबरे पढना चाहते है । निसंदेह ऐसी खबरे पत्रकारिता को तो कलंकित करती है बल्कि सामाज के मष्तिस्क और आत्मा पर बुरा प्रभाव डालती है ।

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2 Comments:

At 25 October 2012 at 08:01 , Anonymous Ashish Shukla said...

आखिर पत्रकारिता में यही कहा जाता है कि पाठक कि नजर से स्टोरी पढ़ें फिर उसी हिसाब से स्टोरी कवर करें ...

 
At 25 October 2012 at 08:46 , Anonymous Ankit Mutreja said...

भाई,इन दोनों ने भी समाज में अपना एक मुक़ाम बनाया हैं.दरअसल लोगों के साथ भी दिक्कत हैं कि वे जानना चाहते हैं की शादी कैसी रही और आदि आदि.मीडिया केवल क्रांति या आंदोलन के मुद्दो पर काम नही कर सकता.मनोरंजन पर निर्भर रहना भी जरूरी हैं.आप सुधीर चौधरी की बात करते तब पत्रकारिता के स्तर के गिरने के बारे में समझ आता.यह जो किस्सा आप सुना रहें हैं ये तो अब चलन हैं.

 

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