Monday, 6 January 2014

पुण्यतिथि / जयदेव (6 जनवरी) ये दिल और उनकी निगाहों के साएं !

                                                                           

हिंदी सिनेमा को मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं, कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया, अल्लाह तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम, आपकी याद आती रही रात भर, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है, नदी नारे न जाओ श्याम पैयां परूं, रात भी है कुछ भींगी भींगी चांद भी है कुछ मद्धम मद्धम, तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूं, जब गमे इश्क़ सताता है तो हंस लेता हूं, एक अकेला इस शहर में, मेरे घर आना जिंदगी, कोई गाता मैं सो जाता, चांद अकेला जाए सखी री, तू चंदा मैं चांदनी तू तरुवर मैं पात रे, ये दिन और उनकी निगाहों के साए जैसे कालजयी गीत देने वाले स्व. जयदेव ऐसे संगीत निदेशक थे, जिन्होंने बहुत कम फिल्मों में संगीत देने के बावजूद फिल्म संगीत के इतिहास में अपना नाम प्रमुखता से दर्ज़ कराया था। पांचवे दशक में चेतन आनंद की फिल्म 'जोरू का गुलाम' से अपनी संगीत-यात्रा शुरू करने वाले जयदेव की प्रमुख फ़िल्में थीं - हम दोनों, मुझे जीने दो, गमन, रेशमा और शेरा, घरौंदा, दो बूंद पानी, आलाप, परिणय, फ़ासला, अनकही, आषाढ़ का एक दिन, प्रेम पर्वत, आंदोलन, तुम्हारे लिए, भावना, दूरियां और आतिश। फिल्म 'अनकही', 'रेशमा और शेरा' तथा 'गमन' के लिए तीन-तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले संभवतः वे देश के पहले संगीत निदेशक थे। पुण्यतिथि पर जयदेव की संगीतमय स्मृतियों को नमन !


                                                     लेखक - ध्रुव गुप्ता 

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