Friday, 15 November 2013

खेल खेल ही रहा तुम भगवन हो गए



देखते ही देखते ये सफ़र पूरा हो गया 

खेल खेल ही रहा Sachin Tendulkar भगवान् हो गया 


वाह ऐसा खेल खेला हम सब ना भूल पाएंगे 

तुम से ही होगा शुरू तुम पे ख़त्म पायेंगे


स्टीवा हो या ओलंगा या हो अख्तर
अब सब के सब चैन से सो पायेंगे


खेल तुमने जो भी खेला मुझको सब अच्छा लगा 

फैन है जितने तुम्हारे शायद किसी के बन न पायंगे


मनी' इतने सरल इतनी सज्जनता शायद हि अब मिल पाए

कवी - मनीष शुक्ल 'मनी' 
 स्केच - गायत्री रेड्डी

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