Tuesday, 24 September 2013

अकेला कोई नहीं



अकेला कोई नहीं सबके साथ किसी के होने का एहसास होता है 

कभी-कभी आपकी खुशी में किसी अनजाने का हाथ होता है 

अनजाने होकर भी जो जिंदगी में रंग भर जाते हैं 

हवा के झोके के साथ जो कभी खुशबु की तरह बहते 

तो कभी बूंदों की तरह ठहर जाते हैं 

कभी महकाते हैं आपकी मुस्कराहट को 

तो कभी आपकी खुशी को भिगो जाते हैं 

रुकी हुई जिंदगी को देके अहसासों की हलचल 

उसे रफ़्तार में चला जाते हैं 

ये अनजाने कभी बनके आपकी जिंदगी की किताब 

तो कभी सिर्फ एक पन्ना बन के चले जाते हैं |

कवियत्री - जागृती पांडे 

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