Sunday, 9 June 2013

खुरचे हुए शब्द



खुरचे हुए शब्द
नाखूनों से , दांतो से
और निगाहों से
बेजान हैं जान नहीं बची
वो अंडे भी तो टूट चुके हैं
उस घोंसले में बेवक़्त
और ढो रहा है भार
वो घोंसला
उन टूटे अंडों का
और तब से अब तक उसमें
कोई नया अंडा नहीं जन्मा
कहीं खुरच तो नहीं गया ??
वो घोंसला भी
शब्दों की तरह
ये शब्द तो पढे नहीं जाते
और उस घोंसले में भी तो
कोई रहने नहीं आता
कि कहीं खुरच के
बेवक़्त कोई और
अंडा फूट ना जाये ।

By- Deepti Sharma

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