Wednesday, 20 February 2013

पुलिस कारनामा भागो भागो पुलिस आई ,पुलिस आई ...........



भागो भागो पुलिस आई ,पुलिस आई ...........आपने किसी चोर के मुंह से तो ये बात सुनी होगी पर आजकल हर आम आदमी यही कह रहा है। जिसकी रक्षक लोग शायद पुलिस को ही कहते हैं। पुलिस की बर्बरता आजकल हर तरफ नजर आ ही जाती है। वो दरअसल बात ये है न निर्दोष भीड़ और परेशान आदमी पर लाठी बरपा के काबू पाना काम है इनका। अब आप तो समझदार हैं ही क्या समझाए आपको।
इसके द्रश्य अबतक हमने केवल टेलीविजन पर ही देखे थे पर आज सामना भी हो गया। दरअसल बात है कानपुर नगर की, जहाँ चौराहे की भीड़ और जाम को नियंत्रित करते-करते पुलिस कैसे खुद अनियंत्रित हो गई इसका नजारा मैंने देखा।
चौराहे पर एक स्कूटर सवार अपने स्कूटर पर कपडे के कुछ गत्ते लेकर निकल रहा था कि एक पुलिसकर्मी ने उसे रोक लिया और मै शायद दूर खड़ी उनके इशारों को समझने की कोशिश कर रही थी। काफी मशक्कत के बाद मै केवल इतना ही समझ पायी कि स्कूटर पर सवार वह कोई दुकानदार था जो उनसे लगातार उसे छोड़ने की विनती कर रहा था और पुलिसकर्मी लगातार अपने तेवर चढ़ा रहा था। बदले में स्कूटर सवार को मैंने उसे दो सौ-सौ की पत्तियां देते देखा। उस बेचारे का तो दिन हो गया। छोटे दुकानदारों की दिन भर की मशक्कत के बाद कमाई ही इतनी होती है। बात यही ख़तम हो जाती तो कोई बात नहीं थी। पर इसके बाद का नजारा काबिले तारीफ था। बगल से एक नीलीबत्ती वाली गाड़ी निकली जिसकी सीट पर शायद शराब की बोतलें रखी थी। गाडी को रोकने की मजाल किसमे थी उल्टा जनाब सलाम ठोके खड़े थे। गाडी गुजर गई और मै वही खड़ी अपने देश के जाबाज पुलिसकर्मी की पीठ मन ही मन ठोकती रही।  मैंने कानून की किताबें तो जादा नहीं पढ़ी पर इतना तो जानती ही हूँ कि ये जो हुआ था वो कानून की भाषा में भी गलत था। पर काश इन्हें कोई मानवता की किताब पढ़ा पाता। अब क्या बताएं इन्हें तो बीच सड़क ..............खैर! अपशब्दों का प्रयोग मै बिलकुल नहीं करुँगी। भई .. ये लोग अपनी गरिमा को बेशक भूल जाएँ पर मै अपनी गरिमा बनाये रखूंगी।


Written By- Swati Gupta

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