मिस्टर क्रिकेटर :माइकल हसी
क्रिकेट के खेल मे फिनिशर की भुमिका हमेशा महत्व्पूर्ण रहती है.फिनिशर वो खिलाडी रहता है जो मिडिल आर्डर मे खेलता हो और जब टीम रनो का पिछा कर रही हो तो मैच को टीम की झोली मे डालकर ही मैदान से वापस आये.
भारत के लिये पहले ये भुमिका कभी कपिल देव,जडेजा और रोबिन सिह निभाते थे तो अब धोनी,युवराज और रैना ने ये जिम्मेदारी ले ली है.रोशन महानामा,कोलिंगवूड और बेवन इस जिम्मेदारी को निभाने मे सर्वश्रेष्ठ थे.
आस्ट्रेलिया के लिये माइकल बेवन ने कई सालो तक फिनिशर की भुमिका मे रहते हुये आस्ट्रेलिया को जीत दिलाई है.उनके जाने के बाद कुछ सालो तक बीच बीच मे एक दो खिलाडी आये परंतु बेवन की कमी को पूरा नही कर पाये.
1 फरवरी 2004 को आस्ट्रेलिया को एक ऐसा खिलाडी मिला जिसने लगभग बेवन की कमी को पूरा कर दिया. वो बाये हाथ से खेलता है, बेवन की तरह शानदार फिल्डिंग करता है.बस बेवन की तरह गेंदबाजी नही कर पाता है.
मिस्टर क्रिकेटर के नाम से मशहूर माइकल हसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मे 28 साल की उम्र मे अपना डेब्यू भारत के खिलाफ़ एकदिवसीय क्रिकेट से किया था.आस्ट्रेलियाई क्रिकेट मे बहुत कम खिलाडीयो को कम उम्र मे टीम मे खेलने को मिलता है. परंतु माइकल हसी को तो ये मौका काफी देर से मिला उन्होने 30 साल की उम्र मे वेस्टइंडीज़ के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट मे डेब्यू किया था.
अपना पहला टेस्ट मैच खेलने से पहले माइकल हसी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट मे वेस्टर्न आस्ट्रेलिया की तरफ से खेलते हुये 15331 रन बनाये थे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मे इतनी देर से डेब्यू करने वाले माइकल हसी ने आते ही शानदार खेल दिखाया और अपने दुसरे ही टेस्ट मैच मे शानदार शतक लगा दिया.
नाक पर हमेशा सन्स क्रिम लगाकर खेलने वाले, शांत स्व्भाव के माइकल हसी जब एक बार पिच पर टीक जाते थे तो उन्हे आऊट करना बहुत मुश्किल होता था. स्व्भाव से शांत हसी के खेल मे काफी तेजी थी. अगर चौके और छ्क्के नही लगते थे तो वो तेजी से दौड कर कई सारे रन बटोर लेते थे.
माइकल हसी एक फिनिशर थे और नबंर 5 पर आकर आस्ट्रेलिया की पारी को सम्भाल भी लेते थे और गती भी देते थे. टेलेंडर्स के साथ किस तरह खेला जाता है ये उनसे हर किसी को सिखना चाहिये और इसकी मिसाल उन्होने कई बार दी है. साऊथ अफ्रिका के खिलाफ 2005 मे उन्होने अपनी जमीन पर ग्लैन मैक्ग्राथ के साथ 10वे विकेट के लिये 107 रनो की साझेदारी की थी.अगले साल 2006 मे उन्होने बांग्लादेश के साथ उन्ही की जमीन पर जैसन गिलेस्पी के साथ शानदार 320 रनो की साझेदारी की थी जिसमे माइकल हसी ने 182 रन बनाये थे जो उनके टेस्ट करियर का सर्वाधिक स्कोर है.
सबसे कम समय मे 1000 टेस्ट रन बनाने का रिकार्ड भी उनके ही नाम है उन्होने 18 अप्रैल 2006 को सिर्फ 166 दिनो मे 1000 टेस्ट रन बनाये थे.
माइकल हसी का निक नेम हस है परंतु उनके क्रिकेट ज्ञान के कारण उन्हे मिस्टर क्रिकेटर कहा जाता है.माइकल हसी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट मे आने से पहले साईंस टीचर बनने के लिये काफी पढाई की थी.
श्रीलंका के खिलाफ हुई सिरीज मे 3 जनवरी 2013 को शुरु हुये अंतिम टेस्ट मैच के बाद उन्होने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया है.
185 एकदिवसीय मैचो मे उन्होने 48.15 की औसत से 5442 रन बनाये है.जिसमे 3 शतक और 39 अर्धशतक बनाये है.
उन्होने 79 टेस्ट मैचो मे मे 51.52 की औसत से 6235 रन बनाये है. जिसमे 19 शतक और 29 अर्धशतक शामिल है.
माइकल हसी को हमेशा उनके शानदार खेल और फिल्डिंग के लिये जाना जायेगा. साथ ही एक ऐसे खिलाडी के तौर पर भी जो आस्ट्रेलिया की ओर से खेला परंतु फिर भी किसी भी तरह के विवादो मे नही फसा था.
चिराग जोशी
स्पोर्ट्स एडिटर
Labels: Sports


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