आखिर कब सुधरेंगे नेता ?
मध्य प्रदेश बी जे पी के एक नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ये बयान दिया कि औरतें अगर अपनी लक्ष्मण रेखा से बाहर कदम रहेंगी तो रावण उनके साथ दुष्कर्म करने को तैयार बैठा है, वहीँ संघ के एक नेता मोहन भागवत ने तो दुनिया को “इंडिया” और “भारत” का फर्क भी समझा दिया, ये कह कर कि रेप “इंडिया” में होते हैं “भारत” में नहीं होते हैं |
अब इन नेताओं को कौन समझाए सीता हरण का रहस्य और कौन समझाये कि इंडिया और भारत में कोई फर्क नहीं है, इन्हें कौन समझाए कि सीता माता का अपहारण सीता के लक्ष्मण रेखा लांघने कि वजह से नहीं बल्कि रावण के कुकर्मो का नतीजा था, वही भारत और इंडिया का फर्क बताने वाले नेता को ये कौन बताये कि भारत और इंडिया का फर्क तो तब बताया जाता है जब समाज को तोड़ना होता है |
भारत जो इस वक्त ऐसी देहलीज़ पर खड़ा है जहां इसे इतनी सुलझी सोंच कि जरुरत है कि जो इसकी आगे आने वाली पीढ़ी को एक नयी और स्वस्थ सोंच दे सकें, ऐसी परिस्थितियों में अगर हमारे रूढ़िवादी नेता इस तरह से बयान देंगे तो एक बात तो तय है कि हमारे देश को नयी सोंच तो मिलना दूर पुरानी रूढ़िवादी सोंच से उबारना बहुत मुश्किल हो जाएगा |
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