हम सिविलाइजेशन ही भूल गये और विकासशील हो गये
दिल्ली पुलिस के साथ कई और पुलिसिया महकमे की कार्य शैली पर लगातार प्रश्न उठे रहे हैं ,जहाँ एक ओर महिला सुरक्षा को लेकर लगायी जा रही अटकलों को दामिनी (काल्पनिक नाम) केस ने सिरे से खारिज कर दिया है ,वहीँ गाज़ियाबाद में ४ सितम्बर २०१२ को बबलू पुत्री कु . किरन लापता है ,किरन के पारिवारिक आर्थिक स्थित सही न होने के कारण वह प्रमोद अग्रवाल निवासी डी -४१ रामप्रस्थ कालोनी थाना लिंकरोड जिला गाज़ियाबाद के यहाँ ६ महीने से घरेलु कार्य करती थी,किरन के पिता के अथक प्रयास के बाद थाने में ०३-१२-२०१२ को धारा ३६४ में प्राथमिकी दर्ज की गयी ,किरण के पिता के मुताबिक़ ०४-०९ -२०१२ को अचानक रात को करीब १० बजे प्रमोद अग्रवाल के पुत्र सुमित अग्रवाल ने अपने मोबाईल से फोन किया किया की किरन घर से गयाब हो गयी है |
बबलू आनन -फानन प्रमोद अग्रवाल के घर पहुचकर अपनी पुत्री की तलाश शुरू कर दी ,पर पुत्री का कुछ पता न चला जिसपर बबलू को इन लोगों पर अपनी पुत्री को गयाब करने का शक जाहिर किया तो सुमित अग्रवाल बबलू को बहला फुसलाकर सूर्य नगर चौकी पर ले गया और कहा की - तुम्हारी रिपोर्ट लिखवा देता हूँ रिपोर्ट से तेरी पुत्री मिल जाएगी ,बबलू कम पढ़ा लिखा है केवल अपना नाम लिखना जानता है उसकी इसी कमी का फायदा उठाकर सुमित अग्रवाल ने ना जाने क्या लिखवाया और बबलू को बिना सुनाये हस्ताक्षर करवा लिए |
बबलू ने जब यह रिपोर्ट अन्य लोगो को दिखाई तो पता चला की सुमित अग्रवाल ने धोखाधड़ी करके सही तथ्य छिपाकर गलत रिपोर्ट लिखा दी है तथा बबलू उन की पुत्री की आयु १५ वर्ष के स्थान पर १८ वर्ष लिखा दी है बबलू ने इन लोगों से काफी पूछताछ कर चूका ,किन्तु ये लोग कुछ नही बता है है .बबलू को शक है की किरन को किन्ही गलत हाथों में दे दिया है या फिर इन्होने उसके साथ दुष्कर्म करके उसकी हत्या कर दी ताकि सच्चाई सामने न आ सके |
बबलू ने दिनाक १०-०९-२०१२ को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक प्रार्थना पत्र दिया ,कितुं पुलिस ने इस प्रार्थना पत्र पर कोई कार्यवाही नही की ,क्योंकि ये लोग काफी धनी व प्रभावशाली व्यक्ति है आज तक बबलू की पुत्री का कोई पता नही है की वह जिन्दा भी है या नही | बबलू इधर -उधर भटकता फिर रहा है ,किन्तु पुलिस इन लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही कर रही है पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न करने पर इनके हौसले और बुलंद हो गये था ये लोग बबलू को धमकी दे रहे हैं की यदि तूने कोई कानूनी कार्यवाही हमारे खिलाफ की तो तेरे सारे परिवार को जान से मार देंगे तू हमारा कुछ नही कर सकता इस प्रकार बबलू व उसके परिवार को इन लोगों से बराबर खतरा बना हुआ है |
उपरोक्त लिखी स्टोरी आपके संज्ञान में लाना एक उदेश्शय तो था ही पर ये भी बताना की ना जाने कितनी आमानवीय घटनाओं के केस देश की तमाम थानो ,चौकियों और कोतवालियों में दर्ज ही नही होते यदि होते भी है तो कोई सकारात्मक पहल का कोई जवाब नही आता ,क्या वाकई में पुलिस विभाग में सिखाये गये मानवीय मूल्यों की परिभाषा पुलिस भूल चुकी है ,और क्यों उन आमानवीय कृत्यों को अंजाम दे रहे के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही नही करती ,दामिनी के साथ ऐसी घटना होने पर पूरा देश जागरुक होकर न्याय की मशाल लेकर महिला सुरक्षा सशक्तिकरण की बात कर रहा तभी ना जाने पुलिस विभाग कितने बलात्कारियों का साथ दे रहें होंगे केस दर्ज ना करके और महिला उत्पीडन के मामले निपटाने के लिए पैसे में तौल -मौल कर रहे होंगे ,आज विकासशील देशों में हमारी गिनती है पर गतिशीलता के दौर में ना जाने देश के मानवीय मूल्यों में गतिरोध ज्यादा ही उत्पन्न हुआ हम सिविलाइजेशन ही भूल गये और विकासशील हो गये |
Labels: National


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