हमारी अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए हम चुप रहेंगे,तो बोलेगा कौन ?

वो ठंड से घबरा नही रहें,क्योंकि उन्हें यह भरोसा हैं कि आप आएंगे ? उनके हौसलें भले तरह-तरह से तमाम लोगों ने कमजोर बनाने का प्रयास किया हो फिर भी भीतर से उन्हें भरोसा हैं कि आज नही तो कल कुछ बदलेगा क्योंकि उन्हें भरोसा हैं कि आप बदलाव की ब्यार में सम्मलित होंगे.जन्तर मन्तर ही हैं.. जहां ना जाने कितने लोग अनशन पर बैठते हैं और चले जाते हैं.कुछ उम्मीदों और दिलासों को पोटली में लेकर तो कुछ मायूसियों को पलकों के किनारे चुप-चाप छुपा कर चल देते हैं.पिछले दो-तीन सालों में हम लोगों ने अनशन को लेकर जो कुछ भी अनुभव किया उसके बाद कई लोग इस अहिंसक और दमदार प्रदर्शन के जरिये से अपने विश्वास को कमजोर होता पाने लगें.लेकिन,भूलिएगा मत मध्यप्रदेश में खंडवा का वह जिला जहां 12 दिन बाद तो मीडिया के सरोकारी कैमरा ने 'साँस बहु और सीरियल' को कैद करने के साथ-साथ अपने दायित्व को निर्वाह करने का निर्णय लिया.. और वहां हुआ क्या यह हम सब के सामने हैं.'एकता मंच' के तहत भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर किसानो,आदिवासियों का दिल्ली कूच ग्वालियर तक केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को खींच ले जाता हैं.प्रधानमंत्री की भूमि अधिग्रहण को लेकर बनायी गयी समीति की बैठक जो उन की अध्यक्षता में होनी थी,एक दफ़ा भी नही हुई इसकी पोल खुलने लगती हैं.मीडिया ख़ास तौर पर साथ नही होता फिर भी आसवाशन से ही सही मालूम होता हैं कि सत्ता के हुनहार खिलाड़ी लड़खड़ाने लगे हैं.तो कैसे मान लिया जाएं के इस तरह के विरोध प्रदर्शनो से कुछ हासिल नही होता.सत्ता का घमंड और उस का अहंकार बेशक टूटता हैं बशर्ते आप अपने अधिकारों और हक़ को लेकर आवाज़ बुलंद कीजिये.आज आईटी एक्ट की धारा 66 ए के विरोध में असीम/आलोक समेत तमाम साथी आईटी मिनिस्टर के घर यानी 'कपिल सिब्बल' के घर का घेराव करेंगे. रणनीति रूख बदल रही हैं.. जंतर मंतर पर ही बैठे हुये छ: दिन बीत जाने के बाद सरकार ने कोई सुध ना ली.इसलिए अब वक़्त उन्हें यह अहसास करवाने का हैं कि हमें हथकड़िया पसंद नही हैं.आप के कई कानून ब्रिटिश शासन के समय से चले आ रहें हैं.किंतु यह मंच सोशल साईट्स का जिसने हमे उस राजनीति के मंच से जोड़ा जहां पहुंचने वालों तक हमारा ही पहुंचना असंभव सा बन जाता हैं.उस मंच को किसी तलवाल धारी कानून के तहत हम कैसे लहूलुहान होने दें ?
हमारा-आपका इतिहास यहां दर्ज हो रहा हैं.. क्या-क्या कई सालों में बदला उस का समस्त लेखा जोखा यहां मौजूद हैं.आने वाला वक़्त ज़रूर सवाल करेगा कि हमें जकड़न से छुड़वाने के लिए तुमनें क्या किया?तब हमारे पास कुछ तो जवाब होना चाहिए.बहुत से लोग हैं जो यहां रह कर इन्हीं मंचो को गरियाते रहते हैं,स्वागत हैं.. गरिया सकते हैं.लेकिन,आलोचना करने का अधिकार भी तो इसी मंच ने आप को प्रदान किया हैं.लोकतंत्र में आलोचना,विरोध,नही होगा तो क्या होगा ? आप स्कूल,काँलेज,नौकरी के डर में बंधे मत रहिए.. यह कोई बाहरी शक्तियों के खिलाफ़ क्रांति आदि जैसा कुछ नही हैं.केवल हमारी ही सरकार,हमारे ही चुने गए प्रतिनीधियों तक संदेश पहुंचाने का वक़्त हैं कि हमें यह कानून नही चाहिए.तो आइए.. ऐसे मौके कम ही आते हैं.. आज शाम चार बजे जन्तर मन्तर.. |
By-Ankit Muttrija
Labels: National


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