जनतारूपी ज्वालामुखी से सरकार हैरान क्यों
हाल में दिल्ली में हुए अतिघ्रनित कुकृत्य बलात्कार के खिलाफ प्रदर्शन से अगर सत्ता में बैठे लोगो को आश्चर्य हो रहा है तो वो ये जान ले कि जिन परिस्तिथियों को अपने समक्ष पाकर आज वो इतने परेशान हैं वो उन्ही के द्वारा उत्पन्न कि हुई हैं और आज जो जनतारूपी ज्वालामुखी उनके सामने आ खड़ा हुआ है उसमे लावा तो बहुत समय पहले से फूट रहा था, क्यूंकि ये तूफ़ान उस लंबी ख़ामोशी के बाद आया जहां पर हर शांतिप्रिय इंसान का धैर्य टूट जाता है |
लोगो का सड़क पर उतरकर इस तरह उस प्रताड़ित लड़की का साथ देना इस बात का सुबूत है कि लोगो में गुस्सा बहुत है और सरकार उसे अजमाने के बजाये दोषियों पर कार्यवाही का कोई त्वरित तरीका निकाले तो उसके और समाज दोनों के लिए ही बेहतर रहेगा, साथ ही सरकार के कुछ नुमाइंदो को भी इस बात का पूरा ख्याल रखना होगा कि वो अपनी भाषाशैली में जिम्मेदारी का भी परिचय दें, और वो भी तब जब मुल्क इस तरह कि परिस्थितियों में है जब किसी बलात्कारी को क़ानून का भय न रहा हो, जनता का विश्वास क़ानून और व्यवस्था पर से उठ गया हो, जब लोग भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में सड़क पर आकार इन्साफ मांगने को मजबूर हो जायें |
समझने वाली बात ये नहीं कितने लोग इस समय सड़क पर उतर कर प्रदर्शनकारी बन गए है समझने वाली बात तो ये है कि क्यूँ इतने लोग इस तरह सड़क पर आकार इन्साफ मांग रहें हैं, और इसका जवाब सरकार को आसानी से मिल सकता है अगर वो आँखे खोल कर जनता कि समस्याओं को देखे और उन्हें समझे |
ये जन सैलाब सुबूत है इस बात का कि ना जाने कितने ही कुकृत्य रोजाना इस देश और देश कि राजधानियों पर रोज होते हैं जिनकी खबर पुलिस स्टेशनों तक पहुँच भी नहीं पाती है, क्यूंकि जनता के समक्ष अपराधकर्ताओं को सजा न मिलने के ऐसे उदाहरण सामने प्रस्तुत हैं जो उन्हें इस बात के लिए तैयार कर देते हैं कि अगर वो इस मामले पर इन्साफ कि उम्मीद रखते हैं तो वो ऐसी चीज़ कि कामना कर रहें हैं जो इस व्यवस्था में मुमकिन नहीं है, ये जन सैलाब इस बात का भी सुबूत है कि राजनेताओं के बड़े-बड़े आश्वासनों को सुन-सुन कर जनता थक चुकी है और वो देश में एक ऐसी व्यवस्था चाहती जो उसकी सुरक्षा कि जिम्मेदारी लें सके और इस बात कि पुष्टि कर सके कि वो भविष्य में एक भयमुक्त समाज उन्हें दे सकने में सक्षम है |
लेखक- वैभव सिन्हा
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