कैसे जंग लड़े, हम इस हैवानियत से
देश में पहली बार गैंग रेप जैसी घटना सामने नहीं आई है दिल्ली में तो ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है, जितनी बार सुनाई देती है ऐसी घटना उतनी बार लगता है जैसे बलात्कार किसी एक के साथ नहीं, समाज की हर उस लड़की के साथ हुआ है जिसमे चाह है कुछ करने की और जिसमे जीने की ललक है। इस बार जो हैवानियत की घटना सामने आई है उसने सभी के दिल और दिमाग को झकझोर के रख दिया है। मुद्दा उठा, नारेबाजी हुई, लोगो की भीड़ सडको पे आई, संसद में भी खूब हंगामा हुआ , मीडिया में भी ख़बरें छाई रही, पर क्या आप जानते हैं इन सबका नतीजा क्या निकलेगा ??? ये मुद्दा धीरे-धीरे शांत हो जाएगा, न ही कोई सख्त क़ानून बनेगा, न ही लड़की को कभी इन्साफ मिलेगा। उस लड़की को कानून की नजरों में शायद इन्साफ मिल भी जाए पर उसकी खुद की नजरों में वो इन्साफ के लिए तरसती रहेगी, अपनी लुटी हुई आबरू को पाने के लिए गुहार लगाती रहेगी, समाज में एक इज्जत भरी जिन्दगी जीने के लिए बैचैन रहेगी और हमारे जैसे ही समाज के ठेकेदार उस लड़की की जिन्दगी पग-पग पर बद से बदत्तर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। जिसकी पहली कोशिश हमारी भारत सरकार ने कर ही दी। पूरे दिन संसद में हंगामा तो हुआ पर ये नतीजा न निकल पाया कि आखिर उन हैवानो का करना क्या है?
वैसे इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है असल में बात ये है कि हमारी भारत सरकार को कुत्ते पालने का बहुत शौक है। मुझे बड़ा ही दुख हुआ ये देखकर कि हमारे देश के गृहमंत्री शुशील कुमार शिंदे जी एक बड़ा सा प्रपत्र लेकर आये थे इस मुद्दे पर बोलने के लिए। वाह रे शिंदे जी ! आपसे भारत की आबरू पर दो शब्द न कहे गए, कैसे कहेंगे .........?? जिन मंत्रियों ने भारत माँ की आबरू को ना छोड़ा हो वो भला देश की बेटी की आबरू के लिए क्या कहेगा और क्या करेगा?
संसद में जया जी की बात से मै पूरी तरह से सहमत हूँ कि उन दरिंदों के पोस्टर पूरे देश में लगवाकर उन्हें जनता के बीच छोड़ दिया जाए, पर शीला दीक्षित जी के बयान से मै हैरान रह गई कि " बसों में C.C.T.V कैमरे लगाए जायेंगे। क्यों शीला जी ??.....ये देखने के लिए किबलात्कार का नजारा कैसा होता है। मैडम जी वारदात रोकिये उसके होने के बाद के प्रक्रम मत गिनवाइए, मै देश की सरकार से हाथ जोड़कर विनम्रता से प्रार्थना करना चाहती हूँ कि कम से कम इन मुद्दों पर सियासत खेलना बंद करें और हो सके तो मेहरबानी करके ऐसा कानून बनाए कि लडकियाँ महफूज होकर घर से निकल सकें.....क्योंकि हमारे जैसी पूरे भारत की बेटियाँ महफूज होना चाहती हैं, पर इन सबमें सबसे दुःख की बात ये है कि एक लड़की की आबरू चली गई और कोई दूसरी तैयार बैठी है क्योकि कुछ शख्श भले ही गिरफ्तार हो गए है पर ये करने वाले दिमाग अभी भी आजाद घूम रहे हैं ।
कब तक हम अपने घर से इस डर के साथ निकलेंगे की आज हम बाइज्ज़त घर तो लौट आयेंगे ???????? कब तक इसी तरह संस्कारों का क़त्ल करते रहेंगे देश के ये बलात्कारी दरिन्दे, कब तक बेटियों के कदम घर के बाहर पड़ते ही हर माँ का दिल धड़कते हुए डरता रहेगा और अपनी बेटी की सलामती की दुआ मांगता रहेगा। हमें आजाद होना है, जीना है, इस दुनिया को जीवन देने वाली इस शशक्त शक्ति के लिए आगे बढिए, भारत की आबरू के खातिर आवाज़ उठाइये।
Written By- Swati Gupta
Labels: National


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