Tuesday, 4 December 2012

क्या होगी इस देश में विदेशी दुकानों की विजय?

आजकल संसद के शीतकालीन सत्र में खुदरा व्यापार में पूँजी निवेश के मुद्दे पर गर्माहट साफ़ देखी जा सकती है। जिस पर विपक्ष ने वोटिंग प्रस्ताव की मांग रखी है, अब देखना ये होगा कि बुधवार को इस महाबहस के क्या नतीजे सामने आते हैं। जैसा कि हम सभी वाखिफ हैं कि भारत की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि FDI के आने से देश के हालात सुधरेंगे। कांग्रेस इसके फायदे गिनवाते हुए कई दावे कर रही है। संसद में वह अपने पक्ष सामने रखते हुए बोली कि FDI के आने से रोजगार बढ़ेंगे, किसानों को फायदा होगा, उपभोक्ताओं को लाभ होगा। वही सुष्मा स्वराज ने इन सभी बातों का खंडन करते हुए कहा कि FDI के आने से रोजगार केवल चीन जैसे देशों का बढेगा क्योंकि 90% माल वही से आयात होगा जबकि विदेशी कम्पनियाँ हमारे देश के लोगों को कम वेतन पर रखकर उनका शारीरिक शोषण ही करेंगी। उपभोक्ताओं को फायदा हो न हो पर ग्राहक मरेंगे। किसानों को भी किसी तरह का फायदा होने पर उनहोंने ऐतराज ही जताया। इन सब बातों से कौन कितना सहमत है ये आकलन कर पाना बहुत ही मुश्किल ही होगा, पर इन सबसे याद आ जाता है 200 साल की भारत की गुलामी का वो मंजर जो पीढ़ियों तक भुलाए नहीं भूलेगा। वो भी इसी तरह ईस्ट इण्डिया कम्पनी के रूप में भारत में व्यापार के उद्देश्य से भारत आई थी और फिर धीरे धीरे उसने सम्पूर्ण राष्ट्र को एक लम्बी सदी के लिए दासता की जंजीरों में जकड लिया। FDI के लिए कांग्रेस का कहना है कि भारत ने 8500 शहर हैं जिसने 53 शहरों मे, जहाँ की आबादी 1,00,000 से अधिक है वही FDI को लागू किया जाएगा और अगर इसके परिणाम बेहतर न निकले तो इसे हटा दिया जाएगा। मैं जरा हमारी इस सरकार को याद दिला दूं कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी भी शुरुवात में केवल 3 गाँव में आई थी, जिससे हमें छुटकारा दिलाने में न जाने कितनी पुश्तों ने अपनी कमर तोड़ी। कही ऐसा न हो ये विदेशी दुकाने भी कुकुरमुत्तों की तरह  देश में फैलकर एक बार फिर वही दंश झेलने के लिए हमें मजबूर कर दे।
समझ में तो ये नहीं आता कि इस मुद्दे को लेकर सरकार को इतनी हड़बड़ी क्यों है आखिर ये उसी FDI की ही तो बात कर रही है जिसका समर्थन भाजपा के द्वारा किये जाने पर कभी खुद ही कांग्रेस ने इसका विरोध किया था। और फिर जो FDI अमेरिका जैसे देश में सफल नहीं हो पाई। जो अमेरिका के किसानों का भला न कर पाई वो हिनुस्तान के किसानों का क्या भला करेगी भला?
अब इन्तजार है अंतिम फैसले का जिसमे FDI पर अंतिम निर्णय होगा, जो भी हो पर हमें इस FDI को लागू नहीं होने देना चाहिए क्योंकि हमें हमारी आजादी के मायने पता हैं।

By- Swati Gupta

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