अगर ऐसा हो जाता, तो क्या बात होती!!
हँसी ले गए, ख़ुशी ले गए, अश्क भी ले जाते तो क्या बात होती।
ना हँसते, ना रोते, न चैन खोते हम,
ना लब पर दुआओं की बारात होती .....................
ना दुआ दे गए, ना दवा दे गए, बेकरारी भी ना देते तो क्या बात होती।
ना जख्म लगता, ना मरहम की जरुरत होती,
ना इस आवाज में दर्द की एक आह होती .....................
नींद ले गए, वो मेरा होश ले गए, हर पल कों चुरा लेते तो क्या बात होती।
ना जगते, ना सोते, ना होश खोते हम,
ना तेरी याद मेरे दिल में दिन रात होती ..........................
ना राह दिखा गए, ना मंजिल बता गए, खुद का एहसास न कराते तो क्या बात होती।
ना घर दूंदते हम, ना पता पूछते हम,
ना राहों में ठोकर खाने की आवाज होती .............................
प्यार की जंग छेड़ गए वो, अकेला हमें छोड़ गए वो, शौक से यूँ लड़ने न देते तो क्या बात होती।
ना जीत ढूँढ़ते हम, ना हार ढूँढ़ते हम,
ना दिल में उनको पाने की आवाज होती ....................
प्यार दे गए वो, करार ले गए वो, राहो में साथ न देते तो क्या बात होती।
ना दोस्त ढूँढ़ते हम, ना प्यार ढूँढ़ते हम,
ना एक साथी की इस दिल में पुकार होती ....................
दिल में उनके प्यार था, नजर में इजहार था, नजरों को ना मिलाते तो क्या बात होती।
ना प्यार नजर आता, ना इज़हार नज़र आता,
ना इस दिल में अरमानों की सौगात होती ........................
By- Swati Gupta
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