Friday, 14 December 2012

और कितनी शांति का रास्ता इख्तियार करे कोई ?


आज (14-12-12) शाम करीब सवा चार बजे असीम त्रिवेदी और अलोक दिक्षित ने टू कुशक रोड पर कपिल सिब्बल के घर के बहार अपने समर्थकों के साथ मिलकर जब कपिल सिब्बल से मिलने की मांग की तो वहाँ उन्हें कपिल सिब्बल से मिलना तो दूर बल्कि उन्हें वहाँ से पुलिस की सहायता से बलपूर्वक हटा दिया गया और इस बिच उन्हें मामूली खरोंचे भी आ गयीं ।
कई सालों पहले की बात हैं..शायद तब की जब कपिल सिब्बल जन्मे भी नही थे या जन्मे थे तो बहुत छोटी उम्र के होंगे.संसद में राम मनोहर लोहिना ने गरीबी रेखा जो उस समय योजना आयोग ने 15 आन्ने तय की थी.उसके खिलाफ़ वह बोल रहें थे.. उन्होंने कहा इस देश में बहुत बढ़ी संख्या ऐसे लोगों की हैं जो मात्र 4 आन्ने में अपना जीवन यापन करते हैं.और नेहरू जी जो आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे उनकी तरफ़ अंगली उठाकर बोलें-इ
 न हज़रत को देखिये इनके कुत्ते पर भी रोज़ाना का 24 रूपय से उपर खर्च होता होगा.नेहरू जी ने अपने हाथ जकड़ लिए और एक शब्द ना कहा.फिर गरीबी रेखा 8 आन्ने के आस-पास तय हुई.देखने वाली बात थी की नेहरू ही क्यों पुरी कांग्रेस पार्टी के एक भी सांसद ने हो हल्ला नही किया.आज वर्तमान राजनीति का दौर इतना अंहकारी और निरंकुश क्यों हो चला है कि कोई नेता अपने खिलाफ़ एक टिप्पणी आदि बर्दशत नही करता.आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत राजनीतिज्ञो ने जिस तरह से इस क़ानून का बेजा लाभ उठाया उससें यही सिद्ध होता हैं कि जनता और राजनेताओं के बीच रिशते अब वैसे नही रहें जैसे की लोकतंत्र में रहने चाहिए.क्यों हमारे तमाम नेता किसी अवतार का रूप होते जा रहें हैं.क्या ऐसा संभव नही कि वहॉे आएं और वोट मांगने के दौरान जितना सामान्य व्यवहार रखते हैं.वोट लेने के बाद भी वैसा ही रखें.आज कपिल सिब्बल के घर का घेराव करने गए असीम त्रिवेदी और आलोक दीक्षित को गिरफ्तार किया गया.साथ-साथ जिस कदर उन्हें धक्के दिए गए,घसीटा गया उससें यही सिद्ध होता हैं सात दिन से अनशन पर भुखे बैठे नौजवानों और युवाओ के इंटरनेट प्रेम की प्रति विचार विमार्श तो कम.कपिल सिब्बल बल्कि आईटी एक्ट जैसे काले क़ानून का समर्थन कर रहे हैं.वो इस क़ानून के खिलाफ़ तो बोलते हैं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से.मनिशंकर अय्यर ने तो सिब्बल जी को लेकर अजीब ही टिप्पणी कर दी थी.सवाल अब भी बरकार हैं साथियों क्या कल भी आप जंतर मंतर नही आएंगे ? मुझे भरोसा हैं कम से कम उन साथियों पर जो लोग इसे पढ़ रहे है कि वे लोग ज़रूर आएंगे.भले थोड़ी देर के लिए सही लेकिन आएंगे.. इस गिरफ्तारी और काले क़ानून का शांतिपूर्ण तरीके से जवाब देने.

 लेखक - अंकित मुटरेजा 

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home