Tuesday, 4 December 2012

हमराह



हर ख़्वाब उमड़ रहा है तेरी आशिकी की पनाहों में ,
हमराह गुज़र रही उम्मीद तुझे चाहने के बहानों में ,
हर कदम बिखर रहा है तेरी बेरूखी की राहों में ,
पल पल घुट रही है ज़िन्दगी धुंध सी इन यादों में ,
हर ख़्याल रूठ रहा है तेरी नफरत की उड़ानों में ,
बेखौफ बढ़ रही है रवानी जज़्बात के तूफानों में ,
हर एहसास छूट रहा है तेरी चाहत की थकानों में ,
बेजान पड़ रही है धड़कन इकरार के इंतज़ारों में ,
हर लम्हा भटक रहा है तेरी संगदिली की दरारों में ,
           बेलगाम जल रही है सांस मोहब्बत के शरारों में.............

By Ankur Sahay 

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