Sunday, 30 December 2012

तुम क्यों छोड़कर चली गई, हमें जगाने के बाद


तुम क्यों छोड़कर चली गई, हमें जगाने के बाद
हर दिल रो रहा है आज, तेरे गुज़र जाने के बाद।।


कितनी बड़ी विडंबना है न ! कि वो निर्दोष थी तो चल बसी और जो गुनेहगार हैं वो आज भी ज़िन्दगी जी रहे हैं। भारत में जिस औरत को आस्था मानकर वर्ष भर पूजा जाता है उसी आस्था के रूप को इन्साफ दिलाने में इतनी देर लग रही है। इन्साफ देने की बजाये जो आवाजें इन्साफ के लिए उठी उन्हें दबाने की कोशिश की गई। कभी भीड़ पर आंसू गैस के गोले बरसाए गए तो कभी लाठियाँ। उस अवाम को रोकने की हर मुमकिन कोशिश कर ली गई जो अपने घर की बेटियों और उस लड़की की आबरू के लिए खड़ी थी। अगर कोई कोशिश नहीं की गई तो वो इसकी कि कोई सख्त क़ानून जल्द से जल्द पास करके उस लड़की को कम से कम थोड़ी राहत दी जाए। सच में उस लड़की का आधा बलात्कार भारत सरकार ने किया है। अगर अब भी दरिंदगी की उस तस्वीर को फांसी न मिली तो उस लड़की की मौत की जिम्मेदार पूरी तरह से भारत सरकार होगी। जिसे FDI पर नियम बनाने पर समय नहीं लगता, जिसे पेट्रोल डीजल और गैस सिलेंडर के दाम बढाने में समय नहीं लगता, पर उसे भारत की बेटी की आबरू से खेलने वालों को फांसी दिलवाने में इतनी देर लग रही है, जबकि 17 दिसम्बर से देश की अवाम लगातार इसके लिए झूझ रही है। अगर उन दरिंदो को फांसी होती है और एक सख्त कानून बनता है तो शायद हमारे जैसी तमाम लड़कियां अपने को थोडा महफूज महसूस करें, पर अगर सरकार सोई रही तो हर माँ अपने बच्चे को जन्म देने से पहले अपनी  कोख से डरेगी की कहीं बेटी न हो जाए! हर भाई की कलाई सूनी रहेगी और इस जीवन का आधार समाप्त हो जाएगा।

Written by- Swati Gupta

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