Monday, 24 December 2012

मेरा शहर



मेरे शहर से जब मै दुर हो गया

मै गाता रहा कोई सुनता न था
मै रोता था तो कोई आसु नही पोछता था
मै चलता था तो भी पैरो  कि आवाज नही आती थी
मेरी बाते यु ही गुजती थी
मेरी तन्हाईयो का कोई सहारा न था
वो शहर था मेरा
जहा मै बोलना सीखा 
लिखना सीखा 
मुसीबतो से गुजरा
पर जो भी था वो मेरा शहर था
उसकी मिट्टी की खुशबु याद आती है 
तो मन मेरा तडपता है
वो सडके जहा मै चलना सीखा 
वहा की गलीयो का सकरापन 
चौराहे की भीड़ 
जिसमे मै अपने आप को ढुढता हूँ 
उस शहर कि तस्वीर बदल गई है
वहा अब वक्त नही मिलता
उस तालाब का किनारा जहा मै सोचा करता था 
आज वो जर्जर है
वो हर जगह जहा मै बैढकर रोया करता था 
वहा अब आसु नही धुआं  बहा करता है.
वो शहर मुझे भुल गया है.
वो शहर था मेरा
वो शहर था मेरा जिसे मै छोड आया हूँ 
मेरा बरसो पुराना रिश्ता उससे तोड आया हूँ 



निरज जाट

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