Saturday, 22 December 2012

किस बात का लोकतंत्र !

ये है हमारे देश का लोकतंत्र , राहुल . मनमोहन , सोनिया के पास इतनी फुर्सत नहीं की वो अपने मुह से जवाब दे सके लाठियों से दिया जा रहा है जवाब .
मनमोहन कोशिश करेंगे की आगे ऐसी घटनाये न हो और विशेष सत्र के लिए भी सोचना पड़ेगा .अरे कितना मूर्ख बनाओगे हमारा कह क्यों नहीं देते की तुम नहीं सुधरोगे चाहे कोई मरे या जिए , देश जवाब चाहता है न्याय चाहता है पर हमारी सरकार के पास इतनी फुर्सत कहा , देश के भावी प्रधान मंत्री राहुल महोदय न जाने कहा है , केवल चुनाव प्रचार के दौरान ही वो अपनी शर्ट की बाहें समेटते हुए दिखाई पड़ते है , एफ डी आई जैसे मुद्दे पर तुरंत चर्चा होती है और वोटिंग हो जाती है , पर किसी को न्याय दिलाने के लिए हमारे प्रधान मंत्री को सोचना पड़ता है , जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस बल की कमी पड़ जाती है पर राष्ट्रपति भवन के सामने हजारो की तादात में पुलिस बल मौजूद हो जाता है , शिंदे की बात चीत होती है मनमोहन से , सोनिया की बात होती है मनमोहन से , शीला की बातचीत होती है मनमोहन से और बातचीत का परिणाम क्या निकलता है ये तो भगवान् ही जानते है अरे कितनी बातचीत करोगे अब , देश में कोई भी काण्ड होता है बातचीत का दौर शुरू हो जाता है पर परिणाम कुछ नहीं निकलता इनको शायद इस बात का एहसास ही नहीं है की जनता ने इन्हें बातचीत के लिए नहीं चुन है बल्कि इस लिए चुना है ताकि जनता को उनकी बात का जवाब दे सके देश को इन्साफ दे सके , न्याय कर सके . देश की सबसे प्रभावशाली सख्शियतो में से एक और सरकार की सर्वोच्च महिला न्याय की मांग कर रही है अरे देवी जी आप किससे मांग कर रही है सब कुछ तो आपके हाथ में है कभी तो कुछ ऐसा करो की हम अपने आपको गर्व से हिंदुस्तानी कह सके , पूरी दुनिया में देश की धित्कार हो रही है उसके बावजूद भी सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है , ऊपर से इन्साफ मांग रही जनता पर लाठिय  बरसाई जा रही है .

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