पूरा देश आहत है आज उसके गुजर जाने से
काश हम उसे जिन्दा रख पाते,
काश दे देते उसे हम अपनी ही जिन्दगी,
काश हम उसकी आँखों को ये नज़ारे दिखा पाते,
काश दिखा पाते कि इतनी सर्द में भी यहाँ जलती है जिन्दगी तेरे लिए,
तेरे हर कतरे खून का हिसाब मांगते हैं ये लोग,
तेरी हर एक आह का जवाब मांगते हैं ये लोग,
मर गई आज भारत की आत्मा सिसक सिसक कर ये सवाल करती है,
क्यों क़त्ल कर डाला मेरे संस्कारों का तूने,
न जाने कितनो के जख्मो का बयान करती है,
इनके जख्मो पर भला मरहम कैसे लगे ?
दुःख इस बात का है कि हमारी न्याय प्रणाली के लोग इन तमाम लोगों को न्याय दिलाने के बजाय इन मुद्दों को दबाना चाहते हैं।न्याय आज बिलख बिलख कर रोया हर जन जन के साथ खड़े होकर,
बस तुझ तक पहुँचने का रास्ता ढूंढ रहा था बिलख बिलख कर।
सरकार की न्याय प्रणाली न उसे न्याय दिल पाई न उसे जिन्दा रख पाई। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और ममता शर्मा का कहना है कि इतनी विभत्स घटना के बाद भी जनता को शांति से मनन और चिंतन करना चाहिए। ताकि जब तक हम चिंतन करे तब तक ये आग शांत हो जाए और फिर कुछ दिनों बाद इस चिंतन का नतीजा ये निकले कि फिर जब हम किसी सुबह उठें तो हममे से एक नयी दामिनी तैयार मिले। आज भी इतने बड़े आन्दोलन के बाद भी महिलाओं के साथ होने वाले दुराचार से अखबार और न्यूज़ चैनल सजे मिलते हैं। इस घटना को महज 15 दिन हुए हैं पर आज ही दिल्ली की सडको पर दौडती इन तेज बसों में फिर से एक ऐसा ही किस्सा सामने आया है लड़की की उम्र 13 वर्ष थी पर किस्मत की धनी थी शायद वो जो स्थानीय लोगों ने उसे बचा लिया। आज की ही घटना में मुज्जफरनगर की दो शिक्षकाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई जिसमे से एक तो किसी तरह भाग निकली पर एक फिर से उसी हालात की शिकार हो गई। दूसरी तरफ एक और 13 वर्ष की लड़की के साथ उसके ही मौसेरे भाई और जीजा ने मिलकर बलात्कार किया रिश्तों को शर्मशार कर डाला इन लोगो ने। अभी उस वीभत्स घटना की आग शांत भी न हो पाई कि ये घटनाएं घट गई। ये केवल एक ही दिन की घटना हैं न जाने कितनी घटना होगी जो घटित तो हुई होगी पर उजागर नहीं। हम आज भी महफूज नहीं। मेरी आबरू मुझसे सवाल करती है कि मैं कब तक उसे संभाल कर रख पाउंगी इन मंजरों में। मैं क्या भारत की हर बेटी की आबरू आज ये सवाल करती होगी।
Written by- Swati Gupta
Labels: National


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