नकारात्मक अच्छी बात नहीं
जिंदगी की राह बाधाओं से भरी पड़ी हैं। ऐसे में, यदि हमारा नजरिया नकारात्मक है, तो हमारी जिंदगी सीमाओं में कैद हो जाएगी। ऐसे नजरिये की वजह से हमें अपने काम में सीमित कामयाबी ही मिल सकेगी। हमारे पास रिश्तेदारों की, दोस्तों की कमी होगी और हम जिंदगी की खुशी का मजा उठा नहीं पाएंगे। नकारात्मक नजरिये के चलते अपने लिए सबसे बड़ी बाधा हम खुद बन जाते हैं। इस तरह के नजरिये वाले लोगों को नौकरी, शादी, रिश्ते-नाते, दोस्ती और संबंधों को कायम रख पाना भी काफी मुश्किल होता है। यह सच है कि सकारात्मक नजरिया विकसित करने के लिए थोड़ा तनाव झेलना पड़ता है पर कामयाबी हमेशा सकारात्मक नजरिये से मिलती है। नकारात्मक नजरिया छूत की बीमारी की तरह है जो अपने साथ-साथ अपने आस-पड़ोस के लोगों और आने वाली पीढ़ियों तक फैल जाती है। हम बचपन में जो भी नजरिया अपनाते हैं, वह उम्र भर हमारे साथ रहता है। बचपन में हमारे लिए सकारात्मक नजरिया बनाना बेहद आसान होता है। अगर किसी कारणवश बचपन में सकारात्मक नजरिया नहीं मिला तो कोई बात नहीं, बड़े होने पर इसे बदला जा सकता है। हो सकता है सकारात्मक नजरिया विकसित करने के लिए हमें थोड़ा तनाव झेलना पड़े और बदलाव की वजह से थो ड़ी असहजता महसूस हो, पर इसका सौ प्रतिशत फायदा हमें ही मिलता है। हमें जैसा भी माहौल और शिक्षा मिलती है, बड़े होने पर हमारे नजरिये में बदलाव के जिम्मेदार हम स्वयं बनते हैं। हमें अपने व्यवहार और कायरे की जिम्मेदारी कबूल करनी होगी। कुछ लोग किसी गलती के लिए खुद को छोड़कर बाकी सभी लोगों को दोषी ठहराते हैं। ऐसे लोग हमेशा दूसरों में कमियां ढ़ूंढ़ते रहते हैं। इस तरह के लोगों के लिए दूसरों में कमियां ढूंढ़ना प्रतियोगिता में इनाम पाने की तरह है । ऐसे लोग हरेक में हर हालात में कोई न कोई नुक्स निकाल ही लेते हैं। इस तरह के लोग हमें अकसर दफ्तर और परिवार में मिल जाएंगे। वे हमेशा अपनी समस्यायों के लिए पूरी दुनिया को दोषी मानते हैं। ये लोग दूसरों के जोश पर पानी फेर देते हैं। इसलिए यह हम पर निर्भर है कि हर सुबह हम अपना नजरिया खुद चुनें। नकारात्मक नजरिये वाले लोग अपनी असफलता के लिए अकसर अपने माताप्िाता, दोस्त, जीवन साथी, तकदीर, परिस्थितियों आदि से लेकर पूरी दुनिया को जिम्मेदार ठहराते हैं, ऐसा उचित नहीं है। दोष किसी और का नहीं होता है, दोष सिर्फ और सिर्फ नकारात्मक नजरिये का होता है। नकारात्मक नजरिये की वजह से घर और कामकाज की जगह का माहौल बिगड़ जाता है और फिर ऐसा इंसान समाज के लिए बोझ बन जाता है। हमें अपने बीते दिनों से आजाद होना होगा। अपने मन से नकारात्मक की धूल झाड़कर मुख्यधारा में शामिल हो ना होगा। सच्चाई, ईमानदारी और अच्छाई से जुड़ी चीजों के बारे में सोचने से हमारी सोच सकारात्मक होगी।
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