Tuesday, 25 December 2012

अब बस सफेद जर्सी मे दिखेंगे


तेंडुलकर ने क्रिकेट को भारत मे एक धर्म बना दिया और भारत की जनता ने उन्हे इस खेल का भगवान बना दिया है.कई सालो तक भारत मे लोग अपने टी.वी बंद कर देते थे जब सचिन आऊट हो जाते थे.                           


अपने पहले दो एकदिवसीय मैच मे उनके बल्ले से कोई रन नही निकला पर फिर भी उन्होने हार नही मानी.न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच मे जब पहली बार पारी की शुरुवात करने का मौका मिला तो उन्होने उस मौके का भरपूर लाभ उठाया और सिर्फ 49 गेंदो पर शानदार 82 रन बना डाले. एकदिवसीय क्रिकेट मे अपना पहला शतक उन्होने 79 मैचो के बाद बनाया. परंतु उस शतक के पहले ही उनमे एक महान बल्लेबाज़ की छवि उनमे नज़र आने लगी थी.

सचिन रमेश तेंडुलकर जी हा यही नाम है उस महान बल्लेबाज़ का
. अपने 23 साल के एकदिवसीय क्रिकेट के  करियर मे सचिन ने बल्लेबाज़ का हर रिकार्ड अपने नाम किया है.सबसे ज्यादा शतक हो ,सबसे ज्यादा रन या सबसे ज्यादा मैच हर जगह सचिन का ही नाम है. सचिन का खेलने का अंदाज़ बेखौफ है. जब सचिन ने एकदिवसीय मैचो मे बल्लेबाज़ शुरु की तो उन्होने एक नये अंदाज़ मे खेलने का तरीका दिखाया .तकनीक के जरीये किस तरह से तेजी से रन बनाये जा सकते है.

सचिन तेंडुलकर पर हमेशा आरोप लगता रहा है के जब कभी वो शतक बनाते है टीम हार जाती है. लेकिन शायद ऐसा कहने वाले और उनकी बातो पर विश्वास करने वालो ने कभी आकडो पर गौर नही करा है. सचिन के 49 शतक मे से 33 शतक भारत की जीत मे शामिल थे.
अपने पहले ही दौरे पर एक शो मैच मे जब सचिन ने मुश्ताक अहमद की गेंद पर छ्क्के जडे.तो पाकिस्तान के अब तक के उम्मदा लेग स्पिनर अब्दुल कादिर ने कहा –“ बच्चो को क्या छ्क्के मार रहे हो, हमारी गेंद पर मार के बताओ”. सचिन ने कादिर के अगले ही ओवर मे 4 छ्क्के जड दिये.सचिन ने छ्क्के जडने के पहले ना बाद मे कादिर को कुछ कहा. बस अपने बल्ले से जवाब देते रहे. ये सचिन की एक शानदार खूबी है. वो कभी भी शब्दो से नही अपने बल्ले से प्रहार करते है. सचिन ने उस मैच मे सिर्फ 18 गेंद पर 53 रन बनाये थे और वो मैच सिर्फ 20 ओवर का था. अगर वो एक अंतरराष्ट्रिय मैच होता तो ये पारी रिकार्ड के पन्नो मे स्वर्णिम अक्षरो मे लिखी जाती.

सचिन ने दुनिया के हर गेंदबाज़ का सामना किया, किसी ने उन्हे अपनी गती से, किसी ने स्पिन से तो किसी ने उन्हे उकसा के आऊट करने की कोशिश की, लेकिन मास्टर बलास्टर ने सबको चित कर दिया.अपने करियर मे सचिन को सिर्फ आस्ट्रेलिया के ग्लैन मैग्राथ की गेंदबाजी खेलने मे परेशानी आयी और ये उन्होने खुद एक बार कहा था.शेन वार्न के तो वो सपने आने लगे थे.
शारजाह मे लगाये वो 2 शतक आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन मे है.
अकेले दम पर सचिन ने भारत को फाईनल मे पहुचाया और फिर फाईनल मे फिर से शतक लगाकर भारत को कप जीता दिया.
सचिन ना सिर्फ बल्लेबाजी मे बल्कि गेंदबाजी और क्षेत्ररक्ष्ण मे उम्मदा प्रदर्शन करते है. आज भी कोई भी बल्लेबाज़ चाहे वो युवा क्यो ना हो सचिन के थ्रो पर अतिरिक्त रन नही लेता है. गेंद्बाजी मे वो स्विंग भी कराते है तो कभी लेग स्पिन और कभी आफ स्पिन भी करवा देते है. कटक मे आस्ट्रेलिया के खिलाफ़ उन्होने 5 विकेट भी लिये थे और मैच को आस्ट्रेलिया की पकड से छिन लिया था.

सचिन एक महान बल्लेबाज है, पूरी दुनिया ऐसा मानती है. कुछ लोग कहते थे के सचिन उम्मदा बल्लेबाज़ है पर महान नही.
लेकिन उन लोगो के शक को “सर डान ब्रैडमेन “
अपनी पत्नी से कहा था “ये लडका तो मेरे जैसा खेलता है”.

सचिन का एक सपना था.भारतीय टीम को विश्व कप जीताना और 2 अप्रैल 2011 को उनका ये सपना भी पूरा हो गया.सचिन की आंखो मे उस दिन खुशी के आसू थे.
सचिन ने बडे ही सादगी भरे अंदाज़ मे एकदिवसीय क्रिकेट से सन्यास लिया है. सबका कहना है के अगर सचिन एक मैच पहले बता देते तो उन्हे मैदान मे सम्मान के साथ विदा करते. परंतु सचिन को ये सब का मोह नही है. वो तो बस क्रिकेट से प्यार करते है और अभी ये प्यार सिर्फ एकदिवसीय क्रिकेट से कम हुआ है. टेस्ट मे सफेद जर्सी मे भारत का ये शेर अभी भी जवान है.


लेखक-चिराग जोशी (खेल संपादक) 


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