पाँन्टी की दौलत हर जगह हैं मौजूद लेकिन,पाँन्टी नही |
किसी ने सच ही कहा हैं-दौलत जो ना करवाएं वो कम हैं.दिल्ली के 'महरौली' रोड सी -42 फार्म हाऊँस पर उत्तर प्रदेश समेत देश भर में कई शाराब के जाम में मौजूद पाँन्टी,कई लंबी सी बनी इमारत की नीव में मौजूद पाँन्टी,बड़े-बड़े मल्टीप्लेक्स में मौजूद पाँन्टी,कई आधुनिक दिल्ली की सड़को पर दौड़ती कलस्टर बसों में मौजूद पाँन्टी का भाई हरदीप.| सियायत,दबंगई,बेशुमार
दौलत का काँकटेल 'गुरदीप' उर्फ पाँन्टी चढ्ढा जब दुनिया से रूकसत हुआ उस समय भी शायद वक़्त का सिक्का पाँन्टी के ही पक्ष में ही जा गिरा.जब ही उसके निधन के ठीक एक-आध घंटे बाद मुंबई पर एक तरफ़ा राज करने वाले बाल ठाकरें के निधन की ख़बर आ गयी.और पाँन्टी का साम्राज्य और शाराब के ठेकें पर खोका लगाने से लेकर देश ही नही विदेशों में भी संपत्ति के बूते अपनी छाप जमाने की उसकी कहानी पीछे छूट गयी.जितनी दिलचस्ब पाँन्टी के जीवन की "फर्श से अर्श" तक की दास्ता रही हैं,उतनी हीदिलचस्ब उसकी हत्या की वारदात भी रही.कभी गुत्थी खुलती नज़र आती तो कभी उलझती.शुरूआती ख़बरो ने इस खूनी वारदात को दोनों भाईयों के बीच की खूनी रंजीश से जोड़ा.उसके बाद परत-दर-परत होती तहकी़कात से इतना तो साफ़ हो गया कि जो कुछ भी हुआ हैं उसके पीछे दौलत ही दोनों भाईयों की अर्थी उठने का मुख्य कारण बनी.मौका-ए-वारदात की जांच से यही लगा कि पाँन्टी और हरदीप के बीच के संपत्ति विवाद ने दोनो भाईयों के बीच ऐसी दरार पैदा कर दी जिसके नशे में दोनों भाई एक दूसरें के खून के प्यासे बन बैठे.लेकिन,बाद में मालूम चला इस वारदात में तीसरा एंगल भी निकलता हैं.जी,हां... उत्तराखंड अल्पसंख्यक मंत्रालय संभालने वाले नामधारी सिंह का.(अब वे इस पद से हटा दिए गये हैं)माना जाता हैं कि पाँन्टी का ही रसूख था जिसके कारण पूर्व मुख्यमंत्री रमेश ने उन्हें यह महत्वपूर्ण मंत्रालय सौपा और आगे चलकर मुख्यमंत्री बदले,सत्ता की लगाम 'भाजपा' से 'कांग्रेस' के हाथ में भी जा पहुंची.फिर,भी नामधारी की कुर्सी बनी रही..इतना याराना था पाँन्टी और नामधारी में.
जब पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने का प्रयास कर रही थी तब पुलिस का शक इसी तरफ गया के कही नामधारी ने ही तो बेशुमार दौलत के चलते शतरंज की बिसात बिछा कर दोनों भाईयों को मात तो नही दें दी.'सचिन त्यागी' जो नामधारी के पीएसओ वारदात पर मौजूद थे.. शक की सुई उसकी तरफ घुमी क्योंकि घायल वो भी हुआ था.तब मालूम चला कि नामधारी की सुरक्षा को देखते हुये सचिन ने हरदीप को गोलियों से छल्ली कर दिया.सचिन के होश आने पर भीतर से यह ख़बर आ रही हैं कि नामधारी ने ही हरदीप पर गोली चलाई थी.जबकि सचिन ने उसे ऐसा करने से रोका भी था.नामधारी अब 27 दिसम्बर तक न्यायिक हिरासत में हैं.वही पाँन्टी और हरदीप के घरवालों का मानना हैं कि इस वारदात के पिछे ज़रूर किसी का हाथ हैं क्योंकि संपत्ति को लेकर विवाद पहले ज़रूर रहता था पर काफ़ी समय से हरदीप रोज़ सुबह उठकर पाँन्टी के पैर छुटा था.दिल्ली पुलिस की माने तो नामधारी ने स्वीकार कर लिया हैं कि इस वारदात के पीछे उसका हाथ था.कुछ काँल डिटेल्स भी निकाली गयी हैं जिससें यह साबित होता हैं कि वारदात से ठीक एक रात पहले नामधारी ने उत्तराखंड से काफ़ी लोगों का जत्था दिल्ली बुलाया था. |
लेख - अंकित मुत्त्रीजा
Labels: National

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