28 साल बाद भी नहीं जागी सरकार
भोपाल गैस त्रासदी को 28 साल हो गये है पर अब भी न इस घटना से प्रभावित लोगो के ज़ख्म ही भरे हैं और न ही यहाँ यूनियन कार्बाइड कंपनी में पड़ा कचरा ही साफ़ हुआ है, गौरतलब है की मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में 3 दिसम्बर 1984 को एक भयानक औद्योगिक घटना घटी थी इसे "भोपाल गैस त्रासदी" के नाम से जाना जाता है, भोपाल में यूनियन कार्बाइड कंपनी के कारखाने से "मिथाइल आइसो सायनाइड" नामक गैस का रिसाव हुआ था जिससे लगभग 15000 से भी ज्यादा लोगो की मौत हो गयी थी और बहुत सारे लोग अंधेपन का शिकार हुए थे ।
इतिहास की इस सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी को शायद ही कोई भुला पाए, जब उस प्लांट के आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोग सोए और सुबह का सूरज नहीं देख सके, एक रिपोर्ट के मुताबिक गैस ने आस-पास के लोगो को 3 मिनट में मौत की नींद सुला दिया था, त्रासदी के बाद लोगो को जो सबसे बड़ी समस्याएँ सामने आयीं उनमे फेफड़ो की तकलीफ, उल्टी,दस्त,सिर चकराना,सांस की तकलीफ,अंधापन,प्रजनन सम्बन्धी परेशानी आदि शामिल हैं ।
दूसरी तरफ आज इतने सालों बाद भी वहाँ पड़े कचरे का निपटारा नहीं हो पाया है, सबसे पहले राज्य सरकार ने कंपनी के कैंपस में पड़े कचरे का निपटारा गुजरात के अंकलेश्वर में करने का फैसला किया था मगर स्थानीय विरोध के कारण ये योजना सफल नहीं हो पायी थी, बाद में राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश के धार जिले में पीथमपुर में कचरा नष्ट करने का फैसला किया और 40 मीट्रिक टन कचरा नष्ट भी कर दिया था पर वहाँ भी स्थानीय विरोध के कारण यह कार्य सफल न हो सका और आज भी 350 मीट्रिक तन कचरा कैंपस में पड़ा हुआ है सरकार के इस असंवेदनशील रवैये को देखकर कहा जा सकता है की सरकार इस मामले में बहुत ही गैरजिम्मेदाराना रवैया अपना रही है ।
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