Saturday, 24 November 2012

वीरों की कुर्बानी क्या हो जाएगी बेकार ?

   

इस देश का ये बड़ा दुर्भाग्य है कि जो वीर अपने देश और देशवासियों के लिए प्राण तक न्योछावर कर देते हैं उन्ही के परिजनों को इन्साफ के नाम पर सिर्फ इंतज़ार मिलता है, कुछ ऐसी ही कहानी है अमृतसर के शहीद "कप्तान सौरभ कालिया" के परिवार वालो का है, जो सरकार के सामने अपने बेटे के साथ पाकिस्तानी सेना द्वारा किये गए असहनीय दुरव्यहवार के लिए इन्साफ मांग रहे हैं ।
                 बात 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान की है जब कप्तान कालिया और उनके कुछ साथियो को पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर बाईस दिन (15मई ,1999-7 जून 1999) तक प्रताड़नाये दी और फिर 9 जून 1999 को मृत अवस्था में हिन्दुस्तान के हवाले कर दिया । कप्तान सौरभ कालिया के शव निरिक्षण से ऐसी बात सामने ये दिल दहलाने के साथ बहुत शर्मनाक भी हैं, उनकी रिपोर्ट में ये सामने आया की प्रताड़ना देने के दौरान उन्हें सिगरेट से जलाया गया, उनकी नाक को काटा गया, उनके कई शारीरिक अंगो को कटा गया, उनके कानो में गर्म सलाखे दागी गयी, उनका जबड़ा और ज्यादातर दांत टूटे हुए थे, और उनके गुप्तांगो को भी नुक्सान पहुँचाया गया था ।
                  1999 से लेकर 2012 तक 13 वर्षो में कुल 7 विदेश मंत्री बदल चुके हैं, और कप्तान सौरभ कालिया के पिता एन के कालिया  तब से कई पत्र तत्काकिल विदेश मंत्री को और उसके बाद भी कई विदेश मंत्रियो को भेज चुके है मगर उनके पत्रों का न तो कोई जवाब ही आया नहीं उन्हें किसी तरह का कोई इन्साफ मिला है । उनकी मांग है की भारत सरकार को पकिस्तान सरकार से बात कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवानी चाहिए, और इसके लिए  कई वो कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठन का समर्थन जुटा रहे हैं, और उन्हें इंतज़ार है उस दिन का जब उन्हें अपने बेटे की आत्मा को शांति दिलाने वाला इन्साफ मिले । 

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