सिर्फ एक मेहमान बच पाये
घर मे जब कभी मेहमान आते है।उनका स्वागत हमेशा बहुत अच्छे तरीके से किया जाता है।लेकिन जब बात खेल की हो तो खातिरदारी का तरीका भी बदल जाता है।अभी तीन अंतरराष्ट्रीय टीमे एशिया के दौरे पर है।वेस्टइंडीज़ बांग्लादेश के,न्यूजीलैण्ड श्रीलंका के और इंग्लैड भारत के दौरे पर है।देखा जाये तो तीनो टीम एक दुसरे की टक्कर की है और मुकाबला भी काफी रोमांचक होने की उम्मीद है।तीनो टीम अपने अपने दौरे पर एक टेस्ट मैच खेल चुकी है।
जब भी कोई एशिया की टीम एशिया के बाहर क्रिकेट खेलने जाती है।नयी पिच, नये मैदान और नयी परिस्थिती मे ढलने मे परेशानी महसूस करती है।इसी कारण कई बार सिरीज़ भी हार जाति है।ठीक उसी तरह से जब दुसरी टीमे जब एशियाई टीमो के दौरे पर आती है तो उन्हे भी कई दिक्कतो का सामना करना पडता है।
वेस्टइंडीज़ की टीम बांग्लादेश के दौरे पर है।वहा वो पहला टेस्ट खेल चुकी है और कडे संघर्ष के बाद उसमे जीत भी हासिल की है।
दिवाली के दिन शुरु हुये इस टेस्ट मैच मे वेस्टइंडीज़ के धुआधार सलामी बल्लेबाज़ क्रिस गेल ने अपना पहला टेस्ट खेल रहे बांग्लादेश के सोहाग गाज़ी को मैच की पहली ही गेंद पर छ्क्का लगाकर स्वागत किया और ये बताया के चाहे टेस्ट हो एकदिवसीय या टी-20 गेल के खेलने का अंदाज़ कभी नही बदलता।खैर गेल का तुफान बांग्लादेश के गेंदबाजो को उडा ले जाता उसके पहले ही सोहग गाज़ी ने 24 रनो पर उस पर रोक लगा कर टेस्ट क्रिकेट मे अपना पहला विकेट लिया।
हाल ही मे वेस्टइंडीज़ ने टी-20 वर्ल्ड कप जीता था और लेकिन उनके पास टेस्ट क्रिकेट के लिये भी खास बल्लेबाज़ है।काफी समय से वेस्टइंडीज़ के संकटमोचक रहे चंद्रपाल ने बांग्लादेश के गेंद्बाजो के धैर्य को बहुत परखा और दोहरा शतक लगाया।उन्होने शतकवीर किरोन पावेल के साथ मिलकर वेस्टइंडीज़ का स्कोर पहली पारी मे 527 कर दिया जिसमे विकेटकीपर दिनेश रामदीन का शतक भी शामिल था।
जवाब मे बांग्लादेश की टीम ने नईम इस्लाम के शतक और बाकी बल्लेबाजो की शानदार पारी की बदौलत 556 रन बना कर पहली पारी मे 39 रन की बढत ले ली,दुसरी पारी मे वेस्टइंडीज़ की टीम के बल्लेबाज़ पहली पारी के प्रदर्शन को दोहरा नही पाये और 273 रन पर सिमट गये।बांग्लादेश को जीत के 245 रनो की जरुरत थी।जिस तरह का प्रदर्शन उन्होने पहली पारी मे किया था,उसको देखते हुये ये लक्ष्य आसान था।परंतु चौथी पारी का दबाव छोटे से छोटे लक्ष्य को पहाड जैसा बना देता है और हुआ भी वही बांग्लादेश की पुरी पारी सिर्फ 167 रन पर सिमट गई और वेस्टइंडीज़ ने दौरे का पहला टेस्ट अपनी झोली मे डाल लिया।
न्यूजीलैड की टीम श्रीलंका के दौरे पर है।पहले टेस्ट मे मेज़बान टीम अपने ताबडतोड बल्लेबाज़ दिलशान के बगैर उतरी थी।न्यूजीलैड के कप्तान टेलर ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और ये फैसला उन्हे तब गलत साबित होता दिखा,जब तीसरे विकेट के रुप मे वो पवैलियन की ओर जाने लगे थे।स्कोर बोर्ड पर उस वक्त सिर्फ 40 रन टंगे थे।मेहमान टीम की पहली पारी 221 रन पर समाप्त हुई।जो श्रीलंका की मजबूत बल्लेबाजी के आगे काफी कम स्कोर था।जब श्रीलंका की टीम खेलने उतरी तो उनके 5 विकेट सिर्फ 50 रन पर गिर गये तो लगा के अब शायद मेहमान टीम वापसी कर लेगी,परंतु तब श्रीलंका के कप्तान जयवर्धने अपने चिर-परिचित अंदाज़ मे पिच पर जम गये और मैथूय्ज़ के साथ मिलकर टीम को संकट की स्थिती से उबारा।श्रीलंका ने कप्तान के 91 रन की मदद से पहली पारी मे 247 रन बनाये।
अब न्यूजीलैड के सामने चुनौती थी के एक बडा लक्ष्य खडा करे और श्रीलंका की टीम पर दबाव डाले,परंतु जो हुआ उसकी कल्पना मेज़बान टीम ने भी नही की होगी।न्यूजीलैड की पुरी टीम सिर्फ 118 रन पर ढेर हो गई।जिसमे रंगना हैरथ ने 6 विकेट लिये थे।93 रन के छोटे से लक्ष्य को मेहमान टीम ने बिना कोई विकेट खोये हासिल कर लिया और इस टेस्ट मैच को तीन दिन मे खत्म करके सीरिज़ मे 1-0 की अजेय बढत ले ली है।
तीसरा मुकाबला एशिया धरती पर भारत मे हो रहा है, जहा टेस्ट की नम्बर 2 टीम नम्बर 5 टीम के खिलाफ खेल रही है।इंग्लैड के खिलाफ 0-4 की हार अब भी भारत के हर क्रिकेट प्रेमी और टीम इंडिया के जेहन मे है।हालाकी टीम इसे बदले की लडाई नही बता रही है,परंतु जिस तरह से पिच तैय्यार करने मे कप्तान धोनी दखल दे रहे है।उससे तो कुछ ओर ही बात सामने आ रही है।
मोटेरा के मैदान पर सिक्के ने भारत का साथ दिया और पहले बल्लेबाजी करने उतरे भारत के सलामी बल्लेबाजो ने इस फैसले को सही साबित करते हुये पहले विकेट के 134 रन की साझेदारी की जो सेंचुरियन मे 2010 के बाद टेस्ट मैच मे दोनो के बीच पहली 100 रनो की साझेदारी थी।गम्भीर इस मौके का लाभ नही उठा पाये,परंतु सहवाग ने इस मौके का फायदा उठाते हुये आखिरकार 2 साल बाद टेस्ट क्रिकेट मे शतक लगा ही दिया,इसके पहले इसी मैदान पर 2 साल पहले उन्होने शतक लगाया था।
मोटेरा के मैदान पर सिक्के ने भारत का साथ दिया और पहले बल्लेबाजी करने उतरे भारत के सलामी बल्लेबाजो ने इस फैसले को सही साबित करते हुये पहले विकेट के 134 रन की साझेदारी की जो सेंचुरियन मे 2010 के बाद टेस्ट मैच मे दोनो के बीच पहली 100 रनो की साझेदारी थी।गम्भीर इस मौके का लाभ नही उठा पाये,परंतु सहवाग ने इस मौके का फायदा उठाते हुये आखिरकार 2 साल बाद टेस्ट क्रिकेट मे शतक लगा ही दिया,इसके पहले इसी मैदान पर 2 साल पहले उन्होने शतक लगाया था।
भारत की नयी दिवार कहे जा रहे पुजारा ने भी शानदार दोहरा शतक लगाया और जब कप्तान ने 521 रन पर पारी घोषित की तब वो क्रिज़ पर मौजूद थे।
स्पिन पिच पर भारत की पहली पारी मे इंग्लैड के स्पिनर स्वान ने 5 विकेट लिये,जिसको देखकर ये उम्मीद तो थी के भारत के दो स्पिनरो को इस पिच से ज्यादा मदद मिलेगी और हुआ भी वही इंग्लैड की पहली पारी सिर्फ 191 रन पर सिमट गई।भारत की ओर से अश्विन ने 3 और ओझा ने 5 विकेट लिये, 1-1 विकेट जहीर और उमेश के खाते मे गया।
फलोआन खेलने उतरी इंग्लैड की टीम ने सधी हुई शुरुवात की और उनके सलामी बल्लेबाज़ ने टीम का स्कोर 123 रन तक पहुचा दिया और इसी स्कोर पर उमेश यादव ने इस जोडी को तोड दिया,इसके बाद इंग्लैड के अगले 4 विकेट 76 रन पर गिर गये और उनका स्कोर 199-5 हो गया था।कप्तान कुक सम्भल कर खेल रहे थे,उन्हे दुसरे छोर पर एक साथी की तलाश थी जो इंग्लैड की टीम की नैय्या पार लगा सके।विकेटकीपर प्रायर ने कप्तान को रुकने को भरोसा दिलाया और दोनो ने मिलकर भारत की स्पिन गेंदबाजी का बखूबी से सामना किया ।दोनो ने मिलकर 157 रन की साझेदारी की और इंग्लैड की टीम को पारी की हार से बचा लिया।लेकिन जैसे ही ये जोडी टुटी बाकी बल्लेबाज़ भी ज्यादा देर पिच पर नही रुके और इंग्लैड की टीम दुसरी पारी मे 406 रन पर सिमट गई।
भारत के सामने 77 रनो का एक आसान लक्ष्य था जिसे भारत ने एक विकेट खोकर पार लिया।
इस मैच मे ओझा ने 9 विकेट लिये और पुजारा ने शानदार दोहरा शतक लगाया,इंग्लैड के कप्तान ने भी काफी जुझारू प्रदर्शन किया परंतु दुसरी पारी मे उनके 176 रन उनकी टीम को हार से बचा नही पाये।
तीन मेहमान इस वक्त एशिया के दौरे पर है।पहले वार से सिर्फ एक मेहमान बच पाये है।बाकी दोनो मेहमान पहले ही वार मे चित हो गये है।ये देखना दिलचस्प होगा के अब अगले वार मे मेहमान बाजी मारते है या मेज़बान।
जीत और हार किसकी होगी ये कहना मुश्किल है, परंतु खेल का रोमांच अपनी चरम सीमा पर होगा इसकी पुरी सम्भावना है।
लेखक - चिराग जोशी
Labels: Sports




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