Saturday, 10 November 2012

तेरी मेरी प्रेम कहानी


एक था तितली राजा और एक थी तितली रानी।
बड़ा प्यार करे तितली राजा, पर तितली एक न मानी।।

तितली राजा बोला रानी, प्यार तुझे मैं करता हूँ,
तुझे देखकर सोता हूँ, और तुझे देखकर जगता हूँ।।

साथ अगर मेरा दे दे तो, संग में सैर लगायेंगे,
नदियों, पर्वत, और झरनों को, अपना प्रेम दिखायेंगे।
रानी बोली सुन लो राजा, प्यार तो मैं भी करती हूँ, 
तुझसे जादा प्रेम करू मैं, तुझसे जादा मचलती हूँ।।

प्यार करे तू मुझसे जादा , कैसे ये मैं जान लूं,
कुछ तो करके दिखलाओ, जो बात मैं तेरी मान लूं।
तितली राजा बोला रानी , तुम ही कुछ बतलाओ न,
क्या करके मैं दिखलाऊं, कुछ रस्ता तो दिखलाओ न।।

रानी बोली तितली राजा, तरकीब तुम्हे बतलाती हूँ,
बागों में है मेरा बसेरा , जगह तुम्हे दिखलाती हूँ।
चले वो दोनों राजा रानी, बागों में थे फूल बड़े,
रंग-बिरंगे कुछ छोटे से, बागों में थे खिल रहे।।

तितली बोली सुन लो राजा, ये अनोखा फूल कहा जाता है,
दिन को खिलता सुन्दर सा, और रात को बंद हो जाता है।
कल खिलेगा जब ये फूल, तो राज यही बतलायेगा,
जो बैठेगा पहले आकर, वही सच्चा प्रेमी कहलायेगा।।
                                                  हुआ सवेरा चली तितली रानी, खिल रहा था फूल जहाँ,
प्यार करता है कौन जादा, आज चलेगा पता वहां।
फूल पर पहुंची तितली रानी, थोड़ी मचली इठलाई,
मरा जो देखा तितली राजा, जोर से चीखी चिल्लाई।।

फूल से पूछा रोते-रोते, राजा को मेरे क्या हुआ,
सीने पर वो सर रखे थी, जुदा हुआ तो क्या हुआ।
फूल बोला तितली रानी, प्यार था उसको दिखलाना,
रात को बोला मुझसे आकर, मुझको अन्दर बिठलाना।।

मैंने उसको समझाया, अन्दर सांस नहीं ले पाओगे,
बंद होकर मैं नहीं खिलूँगा, अन्दर ही मर जाओगे।
बात नहीं मानी उसने, मैंने लाख उसे था समझाया,
बैठ गया मेरे अन्दर वो, बिना सांस न जी पाया।।

मरते-मरते बोला मुझसे, रानी को यह बतलाना,
प्यार उसे करता हूँ जादा, जरा प्यार से समझाना।
इस दुनिया में सबसे जादा, प्यार वो तुझको करता था,
मेरे अन्दर रात गुजारी, पर तुझको कहने से डरता था।।

पंख नोचकर तितली रानी, बोली राजा आ जाओ,
नहीं कहूँगी तुझको झूठा, दूर न मुझसे तुम जाओ।
तू कहे तो प्रियवर मेरे, छोड़ दूं मैं दुनिया सारी,
मान गई मैं- प्यार की बाजी तू जीता और मैं हारी।।
 
सुनो गौर से दुनियावालों, प्यार किसी का न आजमाना।
ये तो है अहसास की बातें, दिल में बस भरते जाना।।

By- Swati Gupta

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1 Comments:

At 10 November 2012 at 18:57 , Anonymous Chirag Joshi said...

very nice sunday kavita

 

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