Sunday, 18 November 2012

अल्फाज़


प्यार नाम के अल्फाज़ की ज़िन्दगी के शब्दकोष में तलाश है...

दिल तक तेरे पहुँचने का रास्ता पूछता हर जज़्बात है...

देता हूँ दिलासा हर धड़कन को जिसमें बसा तेरा ही नाम है...

ढूंढता हूँ खो चुके अपने वजूद को जो तेरे अक्स की पहचान है...

हर सांस में बसी गुज़ारिश चाहती बनाना तुझे मेरा अरमान है...

वक्त बेवक्त ना जाने क्यूँ तेरा ख़्याल बन जाता हर लम्हात है...

ज़िन्दा तो हूँ तेरे बिन मगर लगता नहीं जी रहा कोई एहसास है...

बिखरी सी चाहत की दुनिया जिसमें कुछ बचा तो बस मेरे अल्फाज़ हैं....


लेखक - अंकुर सहाय 

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home