फेसबुक : संचार क्रांति की तरफ जुड़ता एक बड़ा अध्याय
पिछले दो सालोँ मेँ फेसबुक ने भारतीय युवाओँ के विचारोँ को काफी हद तक राष्ट्रवाद की तरफ मोड़ा है ,जब मैँ फेसबुक पे आया था तो एक दो पेज और तीन चार ग्रुपोँ के अलावा पूरा फेसबुक लड़के लड़कियोँ की चैँटिग के लिये प्रयोग होता था MTV पे पेजोँ पर कमेँट की बाढ़ आ जाती थी।
लेकिन धीरे धीरे कुछ राष्ट्रवादी पेज बनते गये और नयी नयी जानकारियाँ उपलब्ध कराते गये
इसमेँ बहुत बड़ा योगदान मोबाईल फोन कम्पनियोँ का भी है कल तक सिर्फ मँहगे फोन मेँ फेसबुक आता था अब तो एक से दो हजार के फोन मेँ भी फेसबुक चल जाता है इसके कारण अब गाँव गाँव तक इसकी पहुँच हो गई है गाँव मेँ पहले चौपाल लगाकर चर्चा की जाती थी अब वो फेसबुक से जुड़ गये हैँ फेसबुक पर चर्चायेँ की जाती हैँ।
अभी एक गाँव मेँ दो सक्रिय चार फेसबुकिये हैँ लेकिन 2015 तक एक गाँव मेँ पचास से सौ लोग फेसबुक से जुड़ जायेँगे और पूरे एक गाँव मेँ वैचारिक क्राँति लाने के लिये उस गाँव के सिर्फ एक व्यक्ति को सिस्टम के खिलाफ खड़ा कर देना काफी है हमेँ उसे जागृत करना है वो पूरे गाँव को जागृत कर देगा।
हमारी पहुँच हिन्दी भाषी राज्य यूपी एमपी दिल्ली राजस्थान बिहार मेँ अधिकतम है जो आबादी मेँ काफी बड़े हैँ अगर 2015 तक फेसबुक चलता रहा तो हमारे पास एक ऐसा मंच होगा जहाँ से उठने वाली बात गाँव गाँव तक पहुँचेगी और मिडिया को सच्चाई बताने को बाध्य होना पड़ेगा.
सरकार चाहे किसी की भी बने हम तो सिस्टम की कमियाँ निकालते ही रहेँगे ताकि हमारा देश फिर से साँस्कृतिक आर्थिक सामरिक और बौद्धिक महाशक्ति बन जाये।
लेकिन धीरे धीरे कुछ राष्ट्रवादी पेज बनते गये और नयी नयी जानकारियाँ उपलब्ध कराते गये
इसमेँ बहुत बड़ा योगदान मोबाईल फोन कम्पनियोँ का भी है कल तक सिर्फ मँहगे फोन मेँ फेसबुक आता था अब तो एक से दो हजार के फोन मेँ भी फेसबुक चल जाता है इसके कारण अब गाँव गाँव तक इसकी पहुँच हो गई है गाँव मेँ पहले चौपाल लगाकर चर्चा की जाती थी अब वो फेसबुक से जुड़ गये हैँ फेसबुक पर चर्चायेँ की जाती हैँ।
अभी एक गाँव मेँ दो सक्रिय चार फेसबुकिये हैँ लेकिन 2015 तक एक गाँव मेँ पचास से सौ लोग फेसबुक से जुड़ जायेँगे और पूरे एक गाँव मेँ वैचारिक क्राँति लाने के लिये उस गाँव के सिर्फ एक व्यक्ति को सिस्टम के खिलाफ खड़ा कर देना काफी है हमेँ उसे जागृत करना है वो पूरे गाँव को जागृत कर देगा।
हमारी पहुँच हिन्दी भाषी राज्य यूपी एमपी दिल्ली राजस्थान बिहार मेँ अधिकतम है जो आबादी मेँ काफी बड़े हैँ अगर 2015 तक फेसबुक चलता रहा तो हमारे पास एक ऐसा मंच होगा जहाँ से उठने वाली बात गाँव गाँव तक पहुँचेगी और मिडिया को सच्चाई बताने को बाध्य होना पड़ेगा.
सरकार चाहे किसी की भी बने हम तो सिस्टम की कमियाँ निकालते ही रहेँगे ताकि हमारा देश फिर से साँस्कृतिक आर्थिक सामरिक और बौद्धिक महाशक्ति बन जाये।
लेख: अजय शुक्ला
Labels: National

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