दिल की बात होठों तक क्यों नहीं आती है?
दिल की बात दिल में ही क्यों रह जाती है ..................
दिल की बात होठों तक क्यों नहीं आती है।
न शिकवा कर पाते हैं , न गिला कर पाते हैं,
जब भी कोई बात मेरे दिल को तडपाती है ..........
न प्यार जता सकते हैं, न शिकवा बता सकते हैं,
न अपने दिल की बातों का, अहसास करा सकते हैं,
मेरे दिल में सिर्फ प्यार है, नजर में इन्तजार है,
उसे दिल भर के प्यार करने को, मेरा दिल बेकरार है,
By- Swati Gupta
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