Monday, 12 November 2012

हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहाँ दम था

हमें तो अपनों  ने लूटा गैरों में कहाँ दम था। ये किसी बेवफा फिल्म का डायलाग नहीं मेरी धरती माँ की पुकार है।
हाल ही में अरविन्द केजरीवाल द्वारा किये गए एक के बाद एक खुलासे से कांग्रेस की राजनीति दुनिया में भूचाल तो आ गया, पर क्या कांग्रेस द्वारा खड़ा किया गया आलिशान भ्रष्टाचारी महल इस भूचाल से ढह पायेगा। हैरानी की बात तो ये है कि आरोप प्रत्यारोप तो लगातार चलते रहे, पर अभी तक कुछ बाल तक बांका नहीं हुआ है हमारी सरकार का। अरविन्द ने पहले रावर्ट वाड्रा, फिर नितिन गड्गरी और फिर अम्बानी बधुओं समेत 700 लोगों पर निशाना साधते हुए 6,000 करोड़ रुपये काला धन जमा करने का आरोप लगाया।
अरे! इतना तो अंग्रेज ने भी हमारे देश की सम्पति को नहीं लूटा होगा जितना ये अंग्रेज मेरा मतलब है सोनिया सरकार लूटपाट कर रही है। अब भले ही बेचारे फसे हुए लोग अरविन्द जी को ही स्वार्थी बताये पर जनता इतनी भी अंधी नहीं है। क्योंकि सरकार की मंसा  इतनी ही साफ़ होती तो अपने पास पहुँचने वाली काला धन जमा करने ववाले 700 लोगों की सूची में से केवल 100 लोगों के खिलाफ कार्यवाही न कराते। और तो और कार्यवाही भी हुई तो छोटी राशि वालों की, बड़े बड़े तीस मार खान तो यूँ ही आजाद घूम रहे है। सरकार जनता को बेवकूफ बनाना बंद कर दे। अभी सरकार ने जनता को बेवकूफ बनाने का एक नया अंदाज दिखाया था। जिसमे उन्होंने अपने पुराने मंत्रियों को निलंबित करके नए मंत्रियों को उनकी जगह दे दी। जरा आप हमें एक बात बताये, आपने कोई गाय पाली है और वो आपका खराब चारा खाने से बीमार पड़ जाए तो आप अपना चारा बदलेंगे या गाय। भई अगर गाय बदल दी तो वो आपका खराब चारा खाकर फिर बीमार होगी। ये जो नए मंत्री आये हैं न ये भी आपका खराब वाला चारा खा-खा कर फिर भ्रष्टाचार की एक नयी कहानी लिखेंगे और नए-नए रिकॉर्ड कायम करेंगे। जनता को बेवकूफ न बनाए और अपने कर्म सुधारें क्योंकि वापस तो आपको किसी सूरते हाल में आना नहीं है।
जय हिन्द 
जय भारत 

By- Swati Gupta

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