Tuesday, 27 November 2012

भारत-इंग्लैड मुम्बई टेस्ट पर एक नज़र




एक कहावत बहुत मशहुर है...जब आप किसी और के लिये गढ्ढा खोदते हो तो आप खुद उसमे गिर जाते हो इसका मतलब ये है के आप जब किसी दुसरे का बुरा करते हो तो आप का बुरा हो जाता है।
भारत और इंग्लैड के बीच हुये टेस्ट मैच से पहले कप्तान धोनी ने स्पिन पिच की मांग की और जब उन्हे उनके मनमुताबिक पिच मिली तो उस पर ना तो भारत के बल्लेबाज़ चले ना गेंदबाज।गेंदबाजी  मे ओझा और बल्लेबाजी मे पुजारा, गम्भीर के अलावा किसी ने भी अपने क्षमता के अनुरुप खेल नही दिखाया।भारत की हार पर सबने इस कहावत को दोहराया परंतु भारत ने कुछ गलत नही किया,अपनी ज़मी पर हर टीम अपने हिसाब से पिच बनवा सकती है।जब भारत की टीम विदेशी दौरे पर जाती है तो उन्हे हमेशा स्विंग लेती हुई और तेज़ पिच पर खेलना पड्ता है।

 मैच की बात की जाये तो भारत का प्रदर्शन काफी खराब रहा है।जिस स्पिन गेंदबाजी को हम हमेशा से अच्छा खेलते आये है।इंग्लैड के उसी स्पिन वार के आगे हम ताश के पत्तो की तरह बिखर गये।पहली पारी मे पुजारा और अश्विन अगर पिच पर नही टिकते तो ये मैच शायद 2 दिन मे खत्म हो जाता।जब हमारी गेंदबाजी की बारी आयी तो तीन स्पिनर होने के बाद भी हम स्पिन पिच पर गेंद को सही तरीके से घुमा नही पाये।
फिल्म सन आफ सरदार का एक डायलग है कभी कभी मेरे दिल मे ख्याल आता है के इस दुनिया मे अगर सरदार ना होते तो क्या होता शायद इंग्लैड की टीम को ये अहसास दुसरे टेस्ट के पहले दिन ही हो गया होगा के अगर इंग्लैड की टीम मे सरदार ना होता तो उनका क्या होता।जैसे ही गेंद पहले दिन पानेसर ने हाथ मे ली तो उन्होने अंग्रेजी  अंदाज़ मे भारत के बल्लेबाजो को भांगड़े  पर नचाया और जब उन्होने भगवान को भी अपनी धुन पर नचा दिया तो लगा के अब ये टेस्ट मैच इंग्लैड के खाते मे जायेंगा।पानेसर ने मैच मे कुल 11 विकेट लिये है।

 क्रिकेट के भगवान पर भी इस बार आरोप लगे है।आरोप कहा तक सही है इसका फैसला तो सिर्फ खुद भगवान ही कर सकते है।पिछली 20 पारीयो मे वो 12 बार या तो बोल्ड या एल.बी.ड्ब्ल्यू हुये है।सुनिल गवास्कर इशारो इशारो मे संकेत दे चुके है के अब सचिन के रिफ्लेक्सेस कमजोर हो गये है और उन्हे अब क्रिकेट से सन्यास ले लेना चाहिये।  सचिन के खराब फार्म से पुरा देश परेशान है।वानखेडे पर जब दुसरे टेस्ट की दुसरी पारी मे सचिन आऊट हुये तो सचिन हाय हाय के नारे लगाये गये।जो काफी शर्मनाक था।सचिन की उम्र अब हो चुकी है।जिस तरह की धुआधार पारी वो 25 या 30 साल की उम्र मे खेलते थे अब उनसे फिर वही पारी की उम्मीद करना बेमानी होगा।

एक तरह से देखा जाए तो इतनी चिंता की बात वैसे भी नही है क्योंकी सचिन आज नही तो कल सन्यास जरुर ले लेंगे।अगर वो अगले मैच मे 2 शतक भी लगा देंगे तो भी कुछ फर्क नही पडेगा।अगर इस तरह का परदर्शन कोहली या पुजारा करते तो जरुर चिंता होती क्योंकी वो भारतीय क्रिकेट का भविष्य है।
आने वाले दो मैचो मे कप्तान धोनी ने फिर से स्पिन पिच की मांग की है।अब ये देखना होगा के कोलकाता और नागपूर मे किस तरह से पिच खेलेगी और क्या भारत के सन आफ सरदार हरभजन सिह अपना कमाल दिखा पायेंगे।इस टेस्ट मे तो उनका प्रदर्शन काफी फिका रहा है।साथ ही भारत के ओपनर सहवाग और गम्भीर को भी एक अच्छी शुरुवात देनी होगी।

 कप्तान धोनी के प्रदर्शन पर भी सवाल उठ रहे है. काफी वक्त से टेस्ट मैचो मे उनका बल्ला खामोश है और सिर्फ कप्तानी और विकेटकीपिंग के कारण उन्हे टीम मे रखना शायद पुरी तरह से सही नही है।क्योंकि पहले 11 खिलाड़ी चुने जाते है फिर कप्तान अगर आपकी 11 में जगह नहीं बनती तो कप्तानी बहुत दूर की बात है।

जब सिलेक्शन कमिटी अगले 2 टेस्ट मैचो के लिये टीम का चयन करेंगी तो उन्हे अच्छे तेज़ गेंदबाज भी चुनने होंगे।जहीर खान अब ना पहले जैसे तेज़ है ना उनकी गेंदबाजी को अब बल्लेबाज़ आसानी से खेल रहे है।भारत को कुछ अच्छे तेज गेंदबाजो  की जरुरत है।उत्तर प्रदेश के आल राऊंडर भुवनेश्वर कुमार का रणजी ट्राफी मे प्रदर्शन गेंद और बल्ले दोनो से अच्छा रहा है।उन्हे अगर मौका दिया जाये तो जो आलराऊंडर की जगह अब तक खाली है वो शायद एक अच्छे खिलाडी के द्वारा भर दी जायेगी।
सीरीज़ 1-1 से बराबर हो गई है और 0-4 का बदला 4-0 से जीतकर लेना अब भारत के लिये नामुमकिन है।भारतीय टीम की कोशिश रहनी चाहिये के अगले 2 मैचो को जीतकर इंग्लैड को एक करारा जवाब दे।
  
लेखक - चिराग जोशी 

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