Saturday, 24 November 2012

बन गई 'आम आदमी पार्टी'

                         


टीम केजरीवाल ने आखिरकार अपनी पार्टी बना ली है। पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी रखा गया है और उसका ढांचा राजधानी दिल्ली से लेकर गांवों तक फैला होगा। कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई नेशनल काउंसिल की बैठक में पार्टी का संवैधानिक ढांचा तय हो गया है। पार्टी में आंतरिक लोकपाल भी होगा और एक परिवार का एक ही सदस्य पदाधिकारी होगा। 26 नवंबर को जंतर-मंतर पर पार्टी की पहली रैली होगी।
आम आदमी के नाम की टोपी लगा कर सियासी मैदान में कूदे अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी का नाम भी आम आदमी पार्टी ही रखा। आम आदमी से जोड़ कर पार्टी के लुभावने नारे केजरीवाल ने ट्विटर पर उछाल दिए। उन्होंने ट्वीट किया कि मैं हूं आम आदमी-मैं लूंगा स्वराज, मैं हूं आम आदमी-मैं लूंगा पूर्ण आजादी। मैं हूं आम औरत-मैं दूर करूंगी महंगाई।
जाहिर है वोटों के लोकतंत्र में आम आदमी की बड़ी अहमियत है। नेताओं के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे अरविंद केजरीवाल की पार्टी को भी इसी आम आदमी का सहारा है। पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि यहां जो लोग आए हैं वो आम आदमी हैं। जो इस देश की पीड़ा को समझ भी रहे हैं और उसके निवारण के लिए काम भी कर रहे हैं। सालों से भुगत रहे हैं भ्रष्टाचार को। ये लोग परिवर्तन कर सकते हैं। हम इस लड़ाई को अंतिम परिणाम तक लेकर जाएंगे। स्वराज के सपने को पूरा करने तक ये लड़ाई जाएगी।
आम आदमी पार्टी ने अपना ढांचा राजधानी से गांव तक फैलाया है। दिल्ली में एक सेंट्रल कमेटी होगी जिसमें राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी होगी। इसका एक राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर भी होगा। इसी तरह राज्यों में स्टेट कमेटी की परिषद और कार्यकारिणी होगी और उसका भी स्टेट कोऑर्डिनेटर होगा। ये ढांचा जस का तस जिले और गांव तक जाएगा। जिला परिषद का खाका हर ब्लॉक कमेटी से चुन कर आए दो-दो कोऑर्डिनेटरों से तैयार होगा। इसी तरह ब्लॉक परिषद भी ग्राम कमेटी से आए दो-दो कोऑर्डिनेटर की मदद से तैयार होगी। एक सवाल ये कि परिषद और कार्यकारिणी में क्या फर्क होगा, तो परिषद में हर आम और खास सदस्य होगा, लेकिन कार्यकारिणी में कुछ चुने हुए लोग होंगे जो अहम फैसले लेंगे।
हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से ये भी कहा गया है कि 26 नवंबर को जितने भी लोग दिल्ली के जंतर मंतर पर आएंगे सब पार्टी के फाउंडर मेंबर होंगे। उसके बाद रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। यहां सभी तबके के लोग आए हैं। एक कार्यकर्ता तो अपनी पार्टी से इस्तीफ़ा देकर आया है। राजनीतिक पार्टियों के परिवारवाद पर हल्ला बोलती रही टीम केजरीवाल ने खुद को परिवारवाद से पूरी तरह दूर रखने का फैसला किया है। एक परिवार-एक पदाधिकारी के फॉर्मूले पर अमल करते हुए तय किया गया है कि एक परिवार के दो सदस्य पार्टी के पदाधिकारी नहीं होंगे। एक परिवार के दो लोग अलग-अलग कमेटियों में भी नहीं हो सकते। मसलन सेंट्रल कमेटी में प्रशांत भूषण-शांति भूषण साथ नहीं होंगे। सेंट्रल कमेटी में केवल प्रशांत भूषण ही रहेंगे।
जनलोकपाल की मांग से अपने आंदोलन की शुरुआत करने वाली टीम केजरीवाल की पार्टी में आंतरिक लोकपाल भी होगा। ये लोकपाल पार्टी के किसी भी सदस्य के खिलाफ शिकायत की जांच कर सकता है। इस लोकपाल से आम आदमी भी कर सकता है पार्टी के सदस्य की शिकायत। आरोप सही होने पर उस सदस्य को पार्टी से निकालने का भी अधिकार लोकपाल को होगा।
केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अपनी पहली रैली सोमवार यानी 26 नवंबर को जंतर-मंतर पर करेगी। 26 नवंबर वाकई ऐतिहासिक दिन है। 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने भारत का संविधान स्वीकार किया था। अरविंद इस तरह से अपनी पार्टी को स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के अधूरे संकल्पों को पूरा करने वाली पार्टी बताना चाहते हैं। ये एक बड़ा दावा है जिस पर अरविंद और उनकी पार्टी कितनी खरी उतरती है, इस पर इतिहास की भी नजर होगी।

साभार - इ खबर 

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